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“मोदी को बोल दूंगा”-सवा सौ करोड़ लोगों के भरोसे का प्रतीक बना ये शब्द

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“वो कह रहा था, मोदी को बोल दूंगा। फिर मैंने उसके कान के नीचे लगाया।”
“मैं बीजेपी का सांसद नहीं हूं, शिवसेना का सांसद हूं।”
“वो मोदी कह रहा था, भाई प्रधानमंत्री को ऐसे बोलते हैं क्या?”

ये तीन बयान हैं जो शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ ने अलग-अलग समय में दिए हैं। ये बयान पूरी एक फिल्म का हिस्सा हो सकते हैं। सांसद महोदय की स्क्रिप्ट कैसे बदलती है, उस धार को महसूस कर सकते हैं। इस मामले में चाहे जो भी कार्रवाई हुई हो, लेकिन चार शब्दों ने मेरे दिल को छू लिया। ये शब्द हैं – मोदी को बोल दूंगा।

दरअसल ये शब्द आज देश के सवा सौ करोड़ लोगों के लिए एक उम्मीद बन गए हैं, भरोसा बन गए हैं। प्रधानमंत्री देश की जनता के लिए एक ताकत बन गए हैं। लोगों के लिए एक आवाज बन गए हैं। लोगों को यह विश्वास हो गया है कि प्रधानमंत्री उनकी बात जरूर सुनेंगे। पिछले तीन साल में प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह से लोगों के दिल में जगह बनाई है उससे लोगों को लगने लगा है कि वो उनकी मदद जरूर करेंगे। उनकी शिकायत पर कार्रवाई जरूर करेंगे। आम जनता के बीच पैदा हुआ ये विश्वास बेवजह नहीं है। इसे तीन हिस्सों में समझा जा सकता है।

1. जन सामान्य को यह एहसास हो गया है कि वो सीधा प्रधानमंत्री तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं।
2. आम लोगों को इस बात का विश्वास है कि प्रधानमंत्री उनकी बात सुनते हैं। और
3. प्रधानमंत्री के पास जब कोई Genuine मामला पहुंचता है तो उस पर कार्रवाई भी होती है।

पहला बिंदू – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो व्यवस्था सरकार बनने के बाद फौरन तैयार की है। उसका परिणाम यह है कि इस देश का जन सामान्य अपनी सहूलियतों के हिसाब से सीधे प्रधानमंत्री से जुड़ सकता है। चाहे वो चिट्ठी लिखना हो, सोशल मीडिया (ट्वीटर और फेसबुक) हो, नरेंद्र मोदी एप हो। यहां तक कि अब लोग फोन के जरिए भी सीधे प्रधानमंत्री तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं। जिस तरह से लाखों-करोड़ों की तादाद में लोगों की चिट्ठियां, फोन कॉल, ऑडियो रिकॉर्डिंग या इमेल प्रधानमंत्री तक पहुंची है, इससे जन सामान्य की भागीदारी का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।

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दूसरा बिंदू – प्रधानमंत्री हर किसी की बात सुनते हैं। मन की बात का एक भी एपिसोड ऐसा नहीं होगा, जहां जन सामान्य की बात न हुई हो। छोटा से छोटा मुद्दा हो, तब भी प्रधानमंत्री इसे नोटिस लेते हैं। हालांकि यह संभव नहीं है कि हर किसी को प्रधानमंत्री जवाब दे पाएं, लेकिन फिर भी वो कोशिश करते हैं कि जितना संभव हो, उन सभी लोगों को वो व्यक्तिगत रूप से जवाब दे पाएं। यहां तक कि बच्चों को खेल का मैदान चाहिए हो या सार्वजनिक स्थलों पर डस्टबिन का रखना हो, बच्चे भी बेहिचक मासूमियत भरे लहजे में प्रधानमंत्री को आदेश देते दिखते हैं।

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तीसरा बिंदू – प्रधानमंत्री की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जब भी उन्हें कोई मामला दिखता है तो वो इसकी जांच करवाते हैं। Genuine मामले में वो आगे बढ़कर मदद करते हैं। वाराणसी में रैली के दौरान व्यस्तता के बावजूद जिस तरीके से उन्होंने असम के एक मरीज की मदद की और दिल्ली पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया, वो सवा सौ करोड़ देशवासियों को आत्मविश्वास से भर देता है। इसी तरह से कर्नाटक की सारा हो या गाजियाबाद की डोरिस फ्रांसिस, आगरा की तैयबा हो या पटना के सुमित रंजन सिन्हा – हर किसी को सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मदद मिली।

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इसलिए शिवसेना के सांसद रवींद्र गायकवाड़ को यह समझना होगा जब कोई शख्स एक सांसद को भी यह कह रहा है कि वो मोदी को बोल देगा, तो वो इसे गाली न समझें, बल्कि ये महसूस करें कि देश का लोकतंत्र मजबूत हो रहा है। जन सामान्य अपनी ताकत का अहसास कर रहा है। उसे पता है कि अगर गलत हुआ तो उसे न्याय मिलेगा, चाहे वो कितना भी बड़ा आदमी क्यों न हो। यही लोकतंत्र की ताकत है और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शत-शत नमन।

-हरीश चंद्र बर्णवाल

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