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शशि थरूर ने पूर्वोत्तर के लोगों की वेशभूषा का उड़ाया मजाक, सोशल मीडिया पर हुई जमकर खिंचाई

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कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने एक बार फिर देश के लोगों का अपमान किया है। तिरुवनंतपुरम में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शशि थरूर ने पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों की वेशभूषा का मजाक उड़ाया। दरअसल शशि थरूर कह रहे थे कि प्रधानमंत्री मोदी तरह-तरह के कपड़े और पगड़ियां पहनते हैं, लेकिन मुस्लिम टोपी पहनन से बचते हैं। इसी बात के दौरान उन्होंने पूर्वोत्तर राज्य के लोगों की सांस्कृतिक और क्षेत्रीय पहचान की पोशाकों और पारंपरिक टोपियों का मजाक उड़ाया। जाहिर है कि खुद को संभ्रांत तबके का समझने वाली कांग्रेसी मानसिकता से ग्रसित शशि थरूर पहले भी देश के आम नागरिकों का इसी तरह मजाक उड़ा चुके हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर शशि थरूर की जमकर खिंचाई हो रही है। देशभर के लोगों ने पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों का मजाक उड़ाने वाले उनके बयान की निंदा की है। 

यह कोई पहली बार नहीं है, इससे पहले भी थरूर कई मौकों पर इसी तरह की बयानबाजी कर चुके हैं, डालते हैं एक नजर-

शशि थरूर ने मानुषी छिल्लर का उड़ाया मजाक
पिछले वर्ष नवंबर में कांग्रेस नेता शशि थरूर ने मिस वर्ल्ड 2017 बनीं मानुषी छिल्लर के नाम का सोशल मीडिया पर मजाक बनाया था। शशि थरूर ने मानुषी के सरनेम ‘छिल्लर’ का मजाक उड़ाते हुए उसे ‘चिल्लर’ कहकर संबोधित किया और उसे नोटबंदी से भी जोड़ दिया है। एक ट्वीट में उन्होंने कहा है, “हमारा चिल्लर भी मिस वर्ल्ड बन गया। उन्होंने मानुषी के नाम के सहारे मोदी सरकार द्वारा लागू की गई नोटबंदी को फेल करार दिया।

गांवों और परिवारों के बीच अंतर नहीं जानते हैं शशि थरूर !
13 फरवरी, 2018 को कांग्रेस के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने एक ट्वीट पोस्ट कर दावा किया कि केंद्र सरकार अपने ही लक्ष्यों को बार-बार बदल रही है। देखिये ये ट्वीट-

 

दरअसल शशि थरूर कुछ-कुछ ऐसी बातें कर रहे हैं जैसी बातें उनकी पार्टी के लोग अक्सर किया किया करते हैं। कुछ-कुछ ऐसी भी जो आज कई मीडिया घराने भी करते हैं। वे इस बात में फर्क नहीं कर पाते हैं कि ग्रामीण विद्युतिकरण क्या है और घर-घर विद्युतिकरण क्या है?

शशि थरूर के लिए कुछ तथ्य नीचे दिये गए हैं-

ग्रामीण विद्युतिकरण का अर्थ यह है कि पावर ग्रिड से बिजली गांवों तक पहुंचा देना, न कि घर-घर बिजली पहुंचाना।

उनकी जानकारी के लिए यह भी तथ्य है कि ग्रामीण विद्युतिकरण की परिभाषा भी नरेंद्र मोदी की सरकार ने नहीं बनाई है। यह 1997 से अपरिवर्तित है जिसमें कहा गया है कि अगर ग्रिड से बिजली गांवों तक पहुंचा दी जाती है तो उसे विद्युतिकृत माना जाता है।

15 अगस्त, 2015 को प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किला से कहा था कि 1000 दिनों के भीतर सभी गांवों में बिजली पहुंचा दी जाएगी। इसका लक्ष्य एक मई, 2018 तक निर्धारित किया गया है। अगर दिनों के हिसाब से देखें तो एक मई, 2018 तक यह 990 दिन ही होते हैं।

ग्रामीण विद्युतिकरण की बात की जाए तो अप्रैल, 2015 से अब तक दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (DDUGJY) के तहत 18,452 गांवों में से 16, 341 गांवों का विद्युतिकरण किया जा चुका है।

घर-घर बिजली की बात करें तो यह ग्रामीण विद्युतिकरण से बिल्कुल अलग बात है। 22 दिसंबर, 2017 को सरकार की घोषणा के अनुसार इसका सौभाग्य योजना और हर घर विद्युतिकरण (universal household electrification) का लक्ष्य 31 मार्च, 2019 निर्धारित किया गया है, जिसपर कार्य जारी है।

दरअसल शशि थरूर इस बात में अंतर कर पाने में अक्षम साबित हुए हैं कि ग्रामीण विद्युतिकरण क्या है और हर घर बिजली योजना क्या है? अपनी अधूरी और गलत जानकारी की बदौलत वे लोगों को गुमराह भी कर रहे हैं। उन्हें एक बार फिर याद दिला दें कि ग्रामीण विद्युतिकरण का लक्ष्य एक मई, 2018 है जबकि हर घर बिजली पहुंचाने का लक्ष्य 31 मार्च, 2019 है। फिर शशि थरूर बताएं कि सरकार ने अपने लक्ष्यों को कब परिवर्तित किया है?

जब दिखावे की धार्मिक आस्था थरूर पर फिर पड़ी भारी
धार्मिक आस्था जब सिर्फ दिखावे के लिए हो तो आप बुरी तरह से घेर लिए जाते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ कांग्रेस नेता शशि थरूर के साथ। 29 मार्च, 2018 को शशि थरूर को जैन धर्म के 24वें तीर्थकर भगवान महावीर की जन्म जयंती पर शुभकामना संदेश देने का ख्याल आया। ट्विटर के जरिए उन्होंने अपना संदेश दिया लेकिन संदेश के साथ तस्वीर सही लगे इसका या तो उन्हें ध्यान नहीं रहा, या भगवान महावीर के बारे में उन्हें कुछ पता नहीं है। शशि थरूर ने भगवान महावीर की जगह गौतम बुद्ध की तस्वीर लगा दी। इसके बाद भी शशि थरूर को ट्विटर पर लताड़ लगी थी।

 

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