Home विचार जम्मू कश्मीर में रोहिंग्या मुसलमानों को बसाने में छुपा है बड़ा राज?

जम्मू कश्मीर में रोहिंग्या मुसलमानों को बसाने में छुपा है बड़ा राज?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के म्यांमार दौरे पर द्विपक्षीय बातचीत में रोहिंग्या शरणार्थियों का मुद्दा भी उठ सकता है। भारत में रोहिंग्या शरणार्थियों की मौजूदगी आज कई सवाल उठा रही है। सबसे बड़ा सवाल ये है कि जम्मू कश्मीर के जम्मू और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में कुछ वर्गों द्वारा इन्हें खास तौर पर बसाने के पीछे क्या उद्देश्य छुपा हो सकता है?

कौन हैं रोहिंग्या मुसलमान
रोहिंग्या मुसलमानों के बारे में कहा जाता है कि वे मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं। म्यांमार सरकार ने इन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया है, हालांकि वहां ये कई पीढ़ियों से रह रहे हैं। ऐसे में पिछले करीब सात साल से वहां की सेना और रोहिंग्या मुसलमानों के बीच एक संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। इस दौरान एक लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान विस्थापित हो चुके हैं। एक अनुमान के मुताबिक भारत में करीब 40,000 रोहिंग्या मुसलमान हैं जिन्हें कुछ खास संगठनों और लोगों की ओर से जम्मू और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में बसाने पर जोर दिख रहा है।

रोहिंग्या मुसलमानों को बसाने के खिलाफ प्रदर्शन
जम्मू में रोहिंग्या मुसलमानों को बसाने के खिलाफ पिछले कई महीनों से प्रदर्शन के दौर चलते रहे हैं। यहां अवैध रूप से बसे रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को बाहर निकाले जाने की मांग को लेकर नेशनल पैंथर्स पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन किया था। इनका कहना है कि जिन लोगों को आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होने पर म्यांमार से बाहर निकाल दिया गया, वे जम्मू में आकर अवैध रूप से बस गए हैं। ये डोगरों की धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए रोहिंग्या और बांग्लादेशी लोगों को खतरा बताते हैं। ये सवाल उठाते हैं कि जब पिछले 70 वर्षों से बसे हुए पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों को नागरिकता का अधिकार नहीं मिला है तो रोहिंग्या मुसलमानों के पक्ष में इसके लिए क्यों आवाज उठाने वाले सामने आ रहे हैं?

जम्मू और लद्दाख में बढ़ते जा रहे ‘रोहिंग्या’
दरअसल जम्मू व सांबा में बड़ी संख्या में रोहिंग्या और बांग्लादेशी बसे हुए हैं। ये लोग राजीव नगर, कासिम नगर, नरवाल, भंठिड़ी, बोहड़ी, छन्नी हिम्मत, नगरोटा व अन्य क्षेत्रों में बसे हुए है। इन लोगों के बसने से जम्मू की भौगोलिक स्थिति के तब्दील होने का खतरा 2010 से लेकर अब तक रोहिंग्या और बांग्लादेशी शरणार्थियों की संख्या में करीब तीन गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक जानकारी के मुताबिक जम्मू में 5,086, सांबा जिले में 634 और लद्दाख में सबसे अधिक 7,664 रोहिंग्या मुसलमानों ने अपने ठिकानें बना रखे हैं। है। चिंता की बात इसलिए भी है क्योंकि 38 रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ 17 एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है। इन्हें हटाने की मांग कुछ खास हिंसक घटनाओं के बाद और जोर पकड़ने लगी। पिछले साल अक्टूबर में एक मुठभेड़ में मारे गए दो आतंकियों में से एक म्यांमार का निकला था।

क्या हो सकता है ‘रोहिंग्या’ की रिहायश का राज?
सवाल है कि जम्मू कश्मीर ही इनकी असली जगह क्यों बन रहा है? अखबारों में ऐसी रिपोर्ट आती रही है कि कुछ खास मुस्लिम संगठन रोहिंग्या और बांग्लादेशी अवैध मुस्लिम शरणार्थियों को जम्मू और लद्दाख में बसाने की कवायद में जुटे हुए हैं। वीएचपी ने इस कोशिश को देश के खिलाफ साजिश बताते हुए पुलिस-प्रशासन से इन विदेशियों को निकाले जाने की मांग की थी। एक तरफ जम्मू सिटीजन फोरम जैसी संस्था ने इनकी रिहायश को अवैध बताते हुए इन्हें निकाले जाने की मांग की थी तो जम्मू मुस्लिम ऐक्शन कमेटी इनके बचाव में उतरी नजर आई। जम्मू चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (JCCI) ने तो यहां तक एलान कर दिया था कि अगर सरकार ने इन शरणार्थियों को बाहर निकालने की पहल नहीं की तो वह लोग खुद सीधी कार्रवाई करेगा।

राज्य में सांख्यिकीय बदलाव की कोशिश
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पिछले फरवरी में रोहिंग्या मुसलमान और बांग्लादेशी मुसलमानों की पृष्ठभूमि की जांच को कहा था। उन्होंने कहा था : ‘’कुछ लोग एक तरफ तो पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों को पहचान पत्र जारी करने को लेकर सवाल करते हैं लेकिन रोहिंग्या और बांग्लादेशी शरणार्थियों को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताते। इससे लगता है कि एक निहित स्वार्थ के चलते ऐसा किया जा रहा हो। कुछ खास तरह के विदेशियों के रहने का समर्थन कर वो राज्य में सांख्यिकीय बदलाव चाहते हैं।‘’

फिर तो धारा 370 का मतलब क्या?
जम्मू कश्मीर को धारा 370 के तहत विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है। इस धारा के तहत देश के ही दूसरे राज्यों के नागरिकों को यहां जमीन के मालिकाना हक की अनुमति नहीं। इसी धारा में 370 में बाद में जोड़े गए अनुच्छेद 35(ए) के तहत जम्मू कश्मीर का नागरिक तभी राज्य का हिस्सा माना जाएगा जब वो वहां पैदा हुआ हो। यानी एक तरफ तो कोई भी दूसरा नागरिक जम्मू कश्मीर में ना तो संपत्ति खरीद सकता है और ना ही वहां का स्थायी नागरिक बनकर रह सकता है, दूसरी ओर राज्य में रोहिंग्या मुसलमानों के पैरोकार उभरकर सामने आ रहे हैं जो इन्हें यहां बसाने पर आमादा हैं। ऐसे में धारा 370 के औचित्य का सवालों में आना लाजमी है।

अवैध शरणार्थियों को निकाले जाने की पहल में अड़ंगा
भारत में रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में भी है। रोहिंग्या समुदाय ने भारत से निकाले जाने की तेज हुई मांगों के बीच सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करते हुए अर्जी दे रखी है। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा है कि गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने संसद में बयान दिया है कि केंद्र सरकार ने राज्यों को रोहिंग्या सहित अवैध अप्रवासियों की पहचान करने और उन्हें देश से निकालने का निर्देश दिया है। रोहिंग्या मुसलमानों के लिए यहां प्रशांत भूषण पैरवी में लगे हुए हैं। ऐसे में आगे उस कवायद की दरकार है ताकि प्रशांत भूषण जैसों की हमदर्दी देश की सुरक्षा पर भारी ना पड़े।

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