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नोटबंदी को ‘आत्महत्या’ जैसा बताने वाले शौरी साहब जरा इस सच्चाई को भी समझ लीजिए

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भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़े ढांचागत बदलाव के उद्देश्य से किए गए विमुद्रीकरण यानी नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके अरुण शौरी ने तो नोटबंदी को आत्महत्या जैसा निर्णय बताया, लेकिन क्या यही हकीकत है? आइये हम जानते हैं कि वास्तव में नोटबंदी का क्या उद्देश्य था और इससे क्या-क्या लाभ हो रहे हैं।

अर्थव्यवस्था की हो रही ‘सफाई’
वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बार-बार कहा था कि वह भारतीय सिस्टम में पारदर्शिता लाने का प्रयास करेंगे। चुनाव में मिली बड़ी जीत सिस्टम की ‘सफाई’ के लिए दिया गया जनमत भी माना गया। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी भी मानते हैं कि सिस्टम को साफ करने के लिए बड़े और कड़े निर्णय लेने ही पड़ते हैं। जाहिर है नोटबंदी भी इसी तरह की ‘शॉक थेरेपी’ है जो भारतीय अर्थव्यवस्था को कई ‘बीमारियों’ से मुक्त कर रही है।

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कालाधन बैंकिंग सिस्टम में आया
आर्थिक प्रणाली को साफ व स्वच्छ करने के लिए नोटबंदी का निर्णय सफल साबित हो रहा है। नोटबंदी के बाद कालेधन को पकड़ने में सबसे बड़ी सफलता मिली है। नोटबंदी का ही नतीजा है कि 18 लाख संदिग्ध खातों की पहचान हो चुकी है। 2.89 लाख करोड़ रुपये जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा अडवांस्ड डेटा ऐनालिटिक्स के जरिए 5.56 लाख नए मामलों की जांच की जा रही है। साथ ही साढ़े चार लाख से ज्यादा संदिग्ध ट्रांजेक्शन पकड़े गए हैं।

जाली नोट खत्म हुए
प्रधानमंत्री मोदी ने जो भी निर्णय किया वह भारत की इकॉनमी को बचाने के लिए था। दरअसल नोटबंदी केवल ब्लैक मनी तक सीमित नहीं था, इसके और भी कई आयाम थे। नोटबंदी इसलिए आवश्यक था क्योंकि भारतीय रुपया नकली नोटों की वजह से बर्बाद हो रहा था। रिजर्व बैंक के अनुसार 500 रुपये के बंद हुए हर 10 लाख नोट में औसत 7 नोट नकली थे और 1000 रुपये के बंद हुए हर 10 लाख नोटों में औसत 19 नोट नकली थे।

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वित्तीय ढांचे में ‘स्वच्छता’ 
नोटबंदी की वजह से देश की वित्तीय प्रणाली की सफाई करने में सहायता मिली है। देश में व्यापार करने वाली 3 लाख से ज्यादा फर्जी कंपनियां एजेंसियों के रडार पर हैं, जबकि 2.1 लाख फर्जी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है। वहीं 2,09,032 संदिग्ध शैल कंपनियों के बैंक अकाउंट फ्रीज किए गए हैं ताकि अवैध लेन-देन और कर चोरी पर रोक लगाई जा सके। नोटबंदी का ही असर है कि 400 से ज्यादा बेनामी लेनदेन की पहचान कर, 800 करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू वाली प्रॉपर्टी जब्त की गई है। साथ ही करंसी सर्कुलेशन में भी 21 प्रतिशत तक की कमी आई है।

नोटबंदी ने ‘महामंदी’ से बचाया
2007-09 के बीच विश्व की अर्थव्यवस्था में व्यापक मंदी थी। विशेषकर संयुक्त राज्य अमेरिका में चलनिधि यानि Liquidity की कमी से उत्पन्न हुई थी। यह बड़ी वित्तीय संस्थाओं के पतन, राष्ट्रीय सरकारों द्वारा बैंकों की “जमानत” और दुनिया भर में शेयर बाज़ार की गिरावट का कारण बनी। आवास बाजार को नुकसान उठाना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप कई निष्कासन, प्रतिबंध और दीर्घकालिक रिक्तियां सामने आईं। दरअसल बीते दशक में भारत भी ऐसी ही समस्याओं का सामना कर रहा था और भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी की तरफ जा रही थी।

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‘कैश बब्बल’ से बच गया भारत
नोटबंदी के बाद भारतीय शेयर बाजारों पर सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। नवंबर 2016 के बाद निफ्टी और बीएसई के शेयर सूचकांक में 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो चुकी है। दूसरी बात यह कि नोटबंदी के वक्त देश में ‘कैश बब्बल’ था और अगर नोटबंदी न होती तो भारत भी अमेरिका की तरह 2008 जैसी मंदी का शिकार हो सकता था। नोटबंदी से पहले कम टैक्स कलेक्शन होता था जिस कारण सरकार को ज्यादा नोट छापने पड़ते थे और उसकी वजह से देश में कैश का ढेर हो गया था। हर ट्रांजैक्शंस के लिए कैश चल रहा था। जिसका अंजाम बुरा हो सकता था।

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कर अनुपालन में बड़ी वृद्धि
5 अगस्‍त, 2017 तक ई-रिटर्न भरने की संख्‍या पिछले वर्ष इसी अवधि तक भरे गए 2.22 करोड़ ई-रिटर्न की तुलना में बढ़कर 2.79 करोड़ हो गई यानि 57 लाख की वृद्धि। एक साल के भीतर टैक्स पेयर्स की संख्या में 25.3 प्रतिशत की वृद्धि बड़ी बात कही जा सकती है। इसके अतिरिक्त पूरे वित्‍त वर्ष 2016-17 के दौरान दायर सभी रिटर्न की कुल संख्‍या 5.43 करोड़ थी जो वित्‍त वर्ष 2015-16 के दौरान दायर रिटर्नों से 17.3 प्रतिशत अधिक है।नोटबंदी से अर्थव्यवस्था बढ़ी के लिए चित्र परिणाम

पकड़ी गई 72 हजार करोड़ की संपत्ति
”न खाऊंगा, न खाने दूंगा”… केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के इस संकल्प को आयकर विभाग अपनी कार्रवाई से आगे बढ़ा रहा है। बेनामी संपत्ति के मामले में देश भर में कार्रवाई जारी है। सरकार कई स्तर पर ऐसी अघोषित-बेनामी संपत्तियों का पता लगाने में लगी हुई है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि उसने सघन खोज, जब्ती और छापे में करीब 71,941 करोड़ रुपये की ‘अघोषित आय’ का पता लगाया है।

डिजिटल ट्रांजैक्शन्स बढ़े
करीब 50 लाख वर्कर्स के बैंक खाते खोले जा चुके हैं, इसके बाद उन वर्कर्स को अपनी पगार सीधे बैंक खातों में मिलेगी। नोटबंदी के बाद करीब एक करोड़ से ज्यादा वर्कर्स को ईपीएफ और ईएसआईसी सिस्टम से जोड़ा जा चुका है। साथ ही डिजिटल ट्रांजेक्शन में 56 पर्सेंट तक की बढ़ोतरी हुई। अक्टूबर 2016 में 71.27 करोड़ का डिजिटल ट्रांजेक्शन हुआ था, जबकि मई 2017 में सह आंकड़ा 111.45 करोड़ तक पहुंच गया है।Image result for मोदी और डिजिटल ट्रांजेक्शन

आतंकवाद और नक्सलवाद पर लगाम
नोटबंदी के बाद से आतंकियों के हौसले पस्त हुए हैं और उनके पास पैसा पहुंचने पर काफी हद तक ब्रेक लगाई जा सकी है। पहले जब कभी भी किसी आतंकी का एनकाउंटर होता था तो हजारों लोग वहां पहुंच जाते और आर्मी पर पत्थरबाजी करते। अब हालात ये हैं कि इनकी तादाद 20 या 30 से ज्यादा नहीं होती। हवाला के जरिये नक्सलियों आतंकवादियों और जिहादियों को जो पैसा मिलता था वो अब कचरा बन गया है।

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विश्‍व बैंक ने भविष्‍यवाणी की है कि 2017-18 के दौरान भारत की वृद्धि 7.7 प्रतिशत रहेगी जो इस बात को बल प्रदान करती है कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की नींव काफी मजबूत है और नीतिगत ‘बाधाओं’ के पश्‍चात झटकों को सह सकती है। भारत की आर्थिक वृद्धि दर जो वार्षिक औसत 7 प्रतिशत से अधिक है वह जी-20 देशों के बीच सबसे मजबूत है।

1 COMMENT

  1. Bilkul sahi baat hai …note Bandi aur GST Shahi hai… I have seen the people who have no contribution by tax in this country but they keep criticizing everything by saying “what a dirty!! what a poor”… We are getting lot of money by text from those people and they are now crying.. people who have lot of Black Money and bought the plots are crying now… If the people are so fair in this country why are we having so many suspected bank transaction… Modi Sahab you are doing correct… Please go ahead we all are with you.. at least now a days we are able to eat the food and having no button on the kitchen as we had earlier another governments… Old garments have the new development in the railway today they are criticizing for the accidents… We are surprised to see all these by old Government and the development by you

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