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स्टार्टअप ने बदली युवा भारत की तस्वीर, 32,000 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड निवेश

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स्टार्टअप ने युवा भारत की तस्वीर बदल कर रख दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से भारत स्टार्टअप के मामले में अमेरिका और ब्रिटेन के बाद दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। स्टार्टअप पर नई नीति लागू होने के बाद 2015 में करीब 32,000 करोड़ रूपये का निवेश हुआ है। सबसे बड़ी बात यह है कि 2015 में स्टार्टअप में महिलाओं की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक बढ़ी है। साथ ही स्टार्टअप से 2020 तक करीब ढाई लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है।

प्रधानमंत्री ने 16 जनवरी 2015 को स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया की शुरुआत की। प्रधानमंत्री के स्टार्टअप शुरू करने का मकसद इस मुहिम को घर-घर तक पहुंचाना था। भारत में अब हर साल 1000 से 1200 तक नए स्टार्टअप शुरू होते है। इसको गति और उचित प्रोत्साहन मिले तो हम दुनिया का सबसे बड़ा स्टार्टअप देश बनने की हैसियत रखते हैं, जिसकी तरफ हमने कदम भी आगे बढ़ा दिए है।

2015 भारतीय स्टार्टअप के लिए काफी बढ़िया साल रहा है। अकेले 2015 में स्टार्टअप में 9 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ। जबकि अगर 2010 से 2015 के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्टार्टअप में कुल निवेश 18 बिलियन डॉलर हुआ। 2010 से 2015 तक हुए 18 बिलियन के निवेश में से 9 बिलियन का निवेश 2015 में ही सिर्फ हुआ। ये सिर्फ नरेंद्र मोदी के स्टार्टअप के बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्टर देने के कारण संभव हो पाया।

नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) की 2015 की स्टार्टअप आई रिपोर्ट बताती है कि भारत में अभी 4,200 स्टार्टअप चल रहे है। नरेंद्र मोदी के अथक प्रयासों का ही असर है कि भारत स्टार्टअप के मामले में अमेरिका और ब्रिटेन के बाद दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंच चुका है। चौथे नंबर पर इजरायल और पांचवें नंबर पर चीन है।

भारत सरकार की स्टार्टअप पर नई नीति लागू होने के बाद 2015 में 400 स्टार्टअप में करीब 32,000 करोड़ रूपये का निवेश हुआ। जबकि 2014 में 179 स्टार्टअप में 14,500 करोड़ रुपये का ही निवेश हुआ। इसका मतलब नरेंद्र मोदी के स्टार्टअप को मुहिम बनाने के बाद 2015 के हर हफ्ते स्टार्टअप में 625 करोड़ रूपये का निवेश हुआ। अगर 2014 से तुलना की जाए तो 2015 में स्टार्टअप में निवेश करने वालों की संख्या में 230 गुना वृद्धि दर्ज हुई, जबकि निवेश में 125 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जो स्टार्टअप अभी नए हैं, उनमें भी निवेश में साढ़े छह गुना की बढ़ोतरी हुई है।

2014 में स्टार्टअप में पुरूषों की लीडरशिप 91 प्रतिशत थी, जबकि महिलाओं की मात्र 9 प्रतिशत थी। जो कि 2015 में स्टार्टअप में महिलाओं की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक बढ़ी और यही नहीं महिलाओं वाले स्टार्टअप में निवेश में भी 450 गुना की बढ़ोतरी हुई। इससे सिद्ध होता है कि नरेंद्र मोदी महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर कितना गंभीर है।

अमेरिका में 29 करोड़ की जगह भारत में एक स्टार्टअप की औसत वैल्यू करीब 18 करोड़ है। इसलिए भी भारत में स्टार्टअप में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। 2015 में स्टार्टअप के जरिए देश के 80 से 85 हजार लोगों को रोजगार मिला है। और अनुमान के हिसाब से 2020 तक स्टार्टअप में ढाई लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।

भारत में स्टार्टअप में निवेश करने का सबसे बड़ा कारण यहां की युवा जनसंख्या है। भारत में 72 प्रतिशत लोगों की उम्र 35 साल से कम और औसत उम्र 28 साल है, जो कि भारत को दुनिया का सबसे युवा स्टार्टअप देश बनाता है। ये बात दुनिया भर के निवेशकों को आकर्षित करती है।

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