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मोदीराज में डिजिटल इंडिया की ऊंची उड़ान, तीसरी तिमाही में हुए रिकॉर्ड 2.7 अरब यूपीआई लेनदेन

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया का सपना तेजी से साकार हो रहा है। 2019 की तीसरी तिमाही में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या 2.7 अरब पहुंच गई है। ये संख्या पिछले वर्ष जुलाई से सितंबर की तिमाही के दौरान हुए कुल यूपीआई लेनदेन से 183 प्रतिशत अधिक है। अगर रुपये के मामले में देखें तो इस वर्ष तीसरी तिमाही में यूपीआई ट्रांजैक्शन में कुल 4.6 ट्रिलियन रूपये का लेनदेन हुआ है, जो 2018 की तीसरी तिमाही की तुलना में कुल 189 प्रतिशत अधिक है।

वर्ल्डलाइ की इंडिया डिजिटल पेमेंट्स रिपोर्ट- Q3 2019 के मुताबिक इस दौरान मोबाइल वैलेट्स से कुल 1.04 बिलियन लेनदेन हुए थे, जो पिछली बार की तुलना में करीब 5 प्रतिशत अधिक है। आपको बता दें कि अगस्त,2016 में यूपीआई की शुरुआत के समय 21 सदस्य बैंकों में दस लाख से कम लेनदेन हुए थे। वहीं आज 141 बैंकों ने इसे स्वीकार कर लिया है और इस वर्ष अक्टूबर महीने में 1 अरब लेनदेन हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2019 की तीसरी तिमाही में क्रेडिट कार्ड से 54 करोड़ लेनदेन हुए, जो पिछले वर्ष की तीसरी तिमाही की तुलना में 25.6 प्रतिशत अधिक हैं। इस वर्ष तीसरी तिमाही में IMPS में भी खासी बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान 59 करोड़ से अधिक IMPS ट्रांजैक्शन हुए हैं, जो कि पिछले वर्ष की तीसरी तिमाही की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक है।

प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार ने डिजिटल पेमेंट के बढ़ावे और डिजिटल इंडिया के सपने को पूरा करने के लिए कई प्रयास किए हैं। डालते हैं एक नजर-

अक्टूबर में यूपीआई से लेनदेन हुआ एक अरब के पार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया परवान चढ़ता जा रहा है। देशवासियों में बढ़ते ऑनलाइन लेनदेन की वजह से यूपीआई ट्रांजैक्शन हर महीने नए रिकॉर्ड कायम कर रहा है। अक्टूबर के महीने में यूपीआई यानि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के जरिए लेनदेन का आंकड़ा एक अरब के पास पहुंच गया है। इसके साथ ही यूपीआई सबसे तेजी से बढ़ने वाला सिस्टम बन गया है। आपको बता दें कि पिछले महीने सितंबर में इसके जरिए 95.5 करोड़ लेनदेन हुए थे।

भारतीयों के लिए एक और खुशखबरी की बात है। अब विदेश जाने वाले भारतीय जल्द ही कई देशों में यूपीआई के जरिए भुगतान कर सकेंगे। इसके लिए नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने काम करना शुरू कर दिया है। अगले छह महीनों में प्रयोग के तौर पर संयुक्त अरब अमीरात और सिंगापुर से इसकी शुरुआत की जाएगी। संयुक्त अरब अमीरात और सिंगापुर में पहले ही रुपे कार्ड की शुरुआत हो चुकी है। अब यहां यूपीआई पर काम चल रहा है। डेबिट व क्रेडिट कार्ड की तरह ही, भारतीय संयुक्त अरब अमीरात और सिंगापुर में यूपीआई से भी पेमेंट कर सकेंगे। अगर इसका प्रयोग भारतीय यात्री देश से बाहर भी करते हैं, तो भारत में इसे और भी लोग अपनाएंगे। जाहिर है कि यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस एक अंतर बैंक फंड ट्रांसफर की सुविधा है, जिसके जरिए स्मार्टफोन पर फोन नंबर और वर्चुअल आईडी की मदद से पेमेंट की जा सकती है। यह इंटरनेट बैंक फंड ट्रांसफर के मकैनिज्म पर आधारित है।

विश्व डिजिटल प्रतिस्पर्धा रैंकिंग में लगायी चार पायदान की छलांग
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सभी क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विश्व डिजिटल प्रतिस्पर्धा रैंकिंग में भारत का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। डिजिटल प्रतिस्पर्धा के मामले में भारत ने चार पायदान की छलांग लगायी है। भारत अब 44 वें स्थान पर पहुंच गया है। आईएमडी की विश्व डिजिटल प्रतिस्पर्धात्मकता रैकिंग 2019 के अनुसार, भारत 2018 में 48वें स्थान से आगे बढ़कर 2019 में 44वें पर पहुंच गया है। भारत ने सभी कारकों ज्ञान, प्रौद्योगिकी और भविष्य की तैयारी के मामले में काफी सुधार दर्ज किया है। अमेरिका इस लिस्ट में पहले स्थान पर है।

वर्ष 2018-19 में पहली बार डेबिट कार्ड से अधिक हुआ यूपीआई ट्रांजेक्शन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में डिजिटल इंडिया की मुहिम परवान चढ़ती जा रही है। मोदी सरकार की नीतियों की वजह से डिजिटल लेनदेन में लगातार बढ़ातरी दर्ज की जा रही है। आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2018-19 में यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस यानि यूपीआई के जरिए डिजिटल पेमेंट ने डेबिट कार्ड से हुए लेनदेन को पीछे छोड़ दिया है। वित्त वर्ष 2019 में देश में 5.35 बिलियन यूपीआई ट्रांजेक्शन हुए, जबकि डेबिट कार्ड के जरिए सिर्फ 4.41 बिलियन लेनदेन हुए। देश में ऐसा पहली बार हुआ है कि यूपीआई ट्रांजेशक्शन के आंकडों ने डेबिट कार्ड के जरिए लेनदेन के आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है।

इससे यह साबित होता है कि देशवासियों में डिजिटल पेमेंट के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। मोदी सरकार ने तीन साल पहले यूपीआई ट्रांजेक्शन की शुरुआत की थी। आपको बता दें कि वर्ष 2017-18 डेबिट कार्ड से 3.24 बिलियन लेनदेन हुए थे, जबकि यूपीआई ट्रांजेक्शन सिर्फ 915.2 मिलियन हुए थे।

RTGS और NEFT के माध्यम से लेनदेन पर अब नहीं लगेगा कोई चार्ज
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बैंकिंग सिस्टम में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इसी मुहिम के तहत मोदी सरकार ने एक जुलाई से नेट बैंकिंग में RTGS और NEFT के माध्यम से भुगतान करने पर या पैसों के लेनदेन पर शुल्क खत्म करने का फैसला किया है।

मोदी सरकार के फैसले के बाद आरबीआई RTGS और NEFT पर बैंकों से अब प्रोसेसिंग और टाइम वैरिंग चार्ज नहीं वसूलेगा। हालांकि बैंक ग्राहकों से इस फीस से ज्यादा शुल्क वसूलते हैं। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के मुताबिक आरबीआई की प्रोसेसिंग फीस और टाइम वैरिंग चार्ज खत्म होने के बाद बैंक भी ग्राहकों से कम शुल्क लेंगे। RTGS से बड़ी धनराशि एक से दूसरे खाते में तत्काल स्थानांतरित करने की सुविधा है, वहीं NEFT के जरिये अधिकतम दो लाख रुपये तत्काल किसी भी खाते में डाले जा सकते हैं। इन दोनों पर इंटरनेट बैंकिंग और बैंक शाखा का शुल्क लगता है। स्टेट बैंक NEFT पर एक से पांच रुपये लेता है, वहीं RTGS पर 5 से 50 रुपये शुल्क वसूला जाता है।

अब छोटे सेविंग एकाउंट्स पर चेक जैसी सुविधाएं मुफ्त
मोदी सरकार ने छोटे खाताधारकों के हित में एक और बड़ा फैसला किया है। अब प्राथमिक बचत खाताधारकों यानी जीरो बैलेंस एकाउंट वालों को चेकबुक और अन्य सुविधाएं मुफ्त में मिलेंगी। पहले सामान्य बचत खातों को ही चेक जैसी सुविधाएं निशुल्क मिलती थीं और इन खातों में न्यूनतम राशि रखने की जरूरत होती है। छोटे खाताधारकों को बैंक अब रुपे कार्ड और अन्य सुविधाएं देने से भी इनकार नहीं कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल इकोनॉमी बनने की ओर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की बागडोर थामने के साथ ही डिजिटल इंडिया के लिए ऐसी मजबूत पहल की जिसके लगातार कई बड़े परिणाम सामने आ रहे हैं। ये ऐसे परिणाम हैं जिनसे देश ही नहीं विश्व जगत को भी भरपूर फायदा मिल रहा है। डिजिटल इंडिया का उद्देश्य है देश को डिजिटल लिहाज से एक सशक्त और मजबूत अर्थव्यवस्था बनाना। मौजूदा सरकार ने ऐसे कई कदम उठाए हैं जिनसे आम लोगों को डिजिटली साक्षर होने की प्रेरणा तो मिली ही है, साथ ही वे खरीदारी से लेकर लेनदेन और कारोबार तक डिजिटल ढांचे में ढल रहे हैं।

सिलिकॉन वैली में केंद्रीय आईटी मंत्री के अनुभव
केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने डिजिटल इकोनॉमी पर सितंबर,2018 के मध्य में अर्जेंटीना में हुई G-20 की मंत्रिस्तरीय बैठक और उसके बाद कैलिफोर्निया की सिलिकॉन वैली की यात्रा के दौरान अपने अनुभव को एक ब्लॉग के जरिए शेयर किया है। Times of India में अपने इस ब्लॉग में उन्होंने लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत में हो रही डिजिटल क्रांति की गूंज पूरे विश्व में सुनाई पड़ रही है। वो लिखते हैं कि सिलिकॉन वैली के इनोवेशन की ताकत के पीछे दरअसल वहां काम कर रहे भारतीय हैं। समय आ गया है कि डिजिटल पर सिलिकॉन वैली जैसा इकोसिस्टम अब अपने देश में भी बने। वैसे डिजिटल के पैमाने पर पिछले चार सालों मे देश में क्रांतिकारी बदलाव स्पष्ट रूप से दिख रहे हैं।

कॉमन सर्विस सेंटर से डिजिटल उद्यमशीलता को बढ़ावा
दो लाख ग्राम पंचायतों को मिलाकर देश भर में करीब 3 लाख से अधिक  कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से 400 से अधिक सेवाएं-सुविधाएं लोगों तक पहुंच रही हैं। कॉमन सर्विस सेंटर के सहारे आधार एनरॉलमेंट, टिकट बुकिंग और जन सुविधाओं से जुड़ी कई प्रकार की ई-गवर्नेंस सर्विस दी जा रही हैं। कॉमन सर्विस सेंटर ने देश के गरीब, हाशिए पर खड़े, दलित और महिलाओं में डिजिटल उद्यमशीलता को बढ़ावा दिया है। इन सेंटरों में 52,000 से अधिक महिलाएं काम कर रही हैं जो लोगों को टिकट बुकिंग, टेली मेडिसिन, जन औषधि और आधार सर्विस मुहैया करा रही हैं। 

गांवों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने पर विशेष जोर
आंकड़े बताते हैं कि भारत की डिजिटल प्रोफाइल लगातार कैसे दमदार होती जा रही है। 130 करोड़ लोगों के इस देश में 121 करोड़ मोबाइल फोन हैं, 122 करोड़ आधार कार्ड बन चुके हैं, करीब 50 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता हैं। देश भर में एक लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को हाई स्पीड ऑप्टिकल फाइबर से कनेक्ट किया जा चुका है और 2.5 लाख से अधिक गांवों में हाई स्पीड ब्रॉडबैंड सर्विस पहुंचाई जा चुकी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक एक करोड़ से अधिक लोगों को डिजिटली साक्षर किया जा चुका है।

मोदी सरकार की नीतियों से डिजिटल क्रांति की ओर बढ़ता भारत
मोदी सरकार डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इसके लिए व्यापारियों को कैशबैक और ग्राहकों को अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर छूट देने जैसे प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजस्व विभाग एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसमें डिजिटल मोड से पेमेंट करने वालों को एमआरपी पर छूट दी जाए, यह छूट अधिकतम 100 रुपये रखी जा सकती है। वहीं दूसरी तरफ डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए व्यापारियों को कैशबैक की भी सुविधा दी जा सकती है। कैशबैक कितना मिलेगा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि व्यापारी ने डिजिटल मोड से कितना पेमेंट लिया। 

सुरक्षित है यूपीआई के जरिए डिजिटल पेमेंट
यूपीआई के जरिए पैसों के लेनदेन में कहीं भी कोई दिक्कत नहीं होती है, साथ ही इसके जरिए ट्रांजेक्शन काफी सुरक्षित भी है। इसमें स्मार्ट फोन पर पहले एप लांच किया जाता है और फिर उसी के द्वारा जिसे पैसा भेजना है उसके मोबाइल नंबर को जोड़कर रकम ट्रांसफर कर दी जाती है। इसमें गलती की गुंजाइश न के बराबर है, साथ ही पैसा ट्रांसफर होने के बाद तत्काल पता भी चल जाता है। सरकार की तरफ से लांच किए गए BHIM एप के अलावा निजी कंपनियों की तरफ से संचालित ‘PhonePe’ और ‘Tez’ एप भी यूपीआई प्लेटफार्म के जरिए डिजिटल पेमेंट को बढ़ाने में भूमिका निभा रहे हैं।

डेबिट कार्ड, भीम ऐप से 2,000 रुपये तक के लेन-देन पर अब कोई चार्ज नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज्यादा से ज्यादा लोगों को डिजिटल पेमेंट के लेकर प्रोत्साहित करना चाहते हैं। लोगों को कैशलेस पेमेंट के लिए प्रेरित करने के लिए मोदी सरकार ने डेबिट कार्ड, भीम ऐप और अन्य पेमेंट गेटवे से 2000 रुपये तक के लेन-देन पर सभी चार्जेस हटा दिए हैं। यह सुविधा एक जनवरी, 2018 से लागू हो गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले महीने ही डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहन देने के लिए डेबिट कार्ड, भीम यूपीआई या आधार आधारित अन्य भुगतान प्रणालियों के जरिए 2,000 रुपये तक के लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट दर (एमडीआर) चार्जेस का बोझ सरकार द्वारा उठाने के प्रस्ताव को सहमति दी थी। वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार के मुताबित दिसंबर तिमाही में भीम ऐप के जरिए लेन-देन 86 प्रतिशत बढ़ा है। इस दौरान भीम ऐप के जरिए 13,174 करोड़ रुपये के 14.56 करोड़ लेन-देन हुए। राजीव कुमार ने कहा, डिजिटल भुगतान को और प्रोत्साहन देने के लिए सरकार डेबिट कार्ड-भीम से 2,000 रुपये तक के लेन-देन पर चार्जेस की भरपाई करेगी। दुकानदारों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। केंद्र सरकार 1 जनवरी, 2018 से दो साल तक एमडीआर का बोझ उठाएगी ।बैंकों को इसका भुगतान सरकार करेगी। इससे सरकार पर 2,512 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हमेशा से मानना रहा है कि भ्रष्टाचार को डिजिटल पेमेंट के जरिए ही काबू में पाया जा सकता है। यही वजह है उन्होंने इस ओर लगातार प्रयास किए हैं। एक नजर डालते हैं रुपयों के लेनदेन में पारदर्शिता लाने के लिए केंद्र सरकार ने क्या क्या किया है।

डिजिटल भुगतान में भारत ने यूके, चीन और जापान को भी पछाड़ा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए हर तरह की कोशिशें की हैं। उनके प्रयासों से हुई सफलता का लोहा दुनिया भी मानने लगी है। एक सर्वे में पता चला है कि डिजिटल पेमेंट्स के मामले में भारत ने यूनाइटेड किंगडम, चीन और जापान जैसे देशों को भी काफी पीछे छोड़ दिया है। लाइव मिंट की खबरों के अनुसार एफआईएस के सर्वे में डिजिटल भुगतान प्रणाली में भारत को 25 देशों में सबसे विकसित माना गया है। एफआईएस अमेरिका स्थित एक बैंकिंग टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर है जिसने हर वक्त उपलब्धता, स्वीकार किए जाने लायक और तत्काल भुगतान के मापदंडों के आधार पर यह सर्वे किया है। इस सर्वे से यह भी साफ हो गया है कि यूनाइटेड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने भी लोकप्रियता के नए शिखर को छू लिया है। यानी लोग कैश की जगह प्वॉइंट ऑफ सेल मशीन और ई-वॉलेट का इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं।

डिजिटल पेमेंट प्रणाली में भारत सबसे सक्षम
गौरतलब है कि फ्लेवर्स ऑफ फास्ट के नाम से तैयार एफआईएस सर्वे के लिए फास्टर पेमेंट्स इनोवेशन इंडेक्स (FPII) का इस्तेमाल किया गया। इसके तहत 1 से 5 तक के स्केल का उपयोग हुआ, जिसमें लेवल- 1 तेज पेमेंट, लेवल- 3 लोगों तक पहुंच और 24 घंटे उपलब्धता और लेवल- 5 उपभोक्ता को आकर्षित करने वाले अतिरिक्त क्षमता शामिल हैं। भारत की IMPS विश्व की एकमात्र प्रणाली पायी गई है जो तेज भुगतान संवर्द्धन सूचकांक रैंक में लेवल 5 पर है।

डिजिटल पेमेंट से पारदर्शी शासन को मिल रही ‘शक्ति’
भ्रष्टाचार से निपटने, पारदर्शी और प्रभावी शासन उपलब्ध कराने और गरीब-अमीर के बीच खाई को पाटने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल इंडिया का कंसेप्ट सामने रखा है। डिजिटल पेमेंट को प्रचलन में लाना भी इसी व्यवस्था का हिस्सा है। इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म जेफरीज ने एक रिपोर्ट में कहा है कि बैंक उपभोक्ताओं द्वारा डिजिटल पेमेंट बढ़ा है।

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