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मोदी सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं ने बदल दी लोगों की जिंदगी, पढ़िये बदलते भारत की 5 कहानियां

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को स्वास्थ्य योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद किया। नरेन्द्र मोदी ऐप के माध्यम से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हर सफलता और समृद्धि का आधार है स्वास्थ्य, फिर वो प्रगति चाहे एक व्यक्ति से जुड़ी हो, परिवार या समाज से जुड़ी हो या पूरे राष्ट्र से जुड़ी हो, उसकी बुनियाद स्वास्थ्य पर ही टिकी होती है।” पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार अच्छी और सस्ती स्वास्थ सेवाएं सभी देशवासियों तक पहुंचाने का हर प्रयास कर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के लाभार्थियों से भी बात की। आइये इन्हीं में से कुछ अनुभवों को उनके ही शब्दों के माध्यम से अनुभव करते हैं।

3.5 लाख की जगह खर्च हुए 55 हजार : वीरभान जी
उत्तर प्रदेश में लखनऊ के वीरभान जी ने कहा, ‘’मुझे छाती में पीठ में दर्द होता था। केजीएमसी में डॉक्टर को दिखाया तो चेक कर कहा कि ब्लॉकेज है, स्टेंट डालना पड़ेगा। दो साल पहले पत्नी का स्टेंट डलवाया था, जिसमें डेढ़ लाख खर्च हुआ था। दो महीने पहले भाई ने मेदांता में स्टेंट बदलवाया, जिसमें 3.5 लाख रुपये खर्च हुए थे। लेकिन मैंने करवाया तो सिर्फ 55 हजार रुपये ही लगे, स्टेंट की कीमतें कम करके आपने अच्छा किया है।“

…जब एक मां ने पीएम मोदी को दिया आशीर्वाद
अलवर राजस्थान श्रीमती लक्ष्मी देवी ने कहा, ”तीन-चार साल से परेशान थी, हाथों से चलती थी। मुझे भी इच्छा होती थी कि खूब दौड़ूं, घर के काम करूं। बेटा ने कहा कि चलो घुटना प्रत्यारोपण का ऑपरेशन करवा दूं। चार लाख रुपये लगते। मेरे पास पैसे नहीं थे, मैंने मना कर दिया। तब मैंने अखबार में देखा कि आपने छूट दी है। इसकी जानकारी लेने के बाद मैंने घुटनों का ऑपरेशन करवाया। आज मैं काफी राहत महसूस कर रही हूं। आप तो भगवान हैं हमारे लिए।”

मुफ्त में डायलिसिस देकर गरीबों को बचा लिया : विजय बाबू गारू
आंध्रप्रदेश के विजयबाबू गारू ने कहा, ”तीन साल से डायलिसिस चल रहा है। इससे पहले निजी अस्पताल में इलाज में बहुत खर्च होता था। 30 से 40 हजार रुपये खर्च होता था, लेकिन अब आपने जो डायलिसिस सेंटर खुलवाया है तब से फ्री डायलिसिस मिल रहा है।  डायलिसिस के लिए कुछ भी खर्च नहीं हो रहा है, सिर्फ दवाएं जनऔषधि केंद्र से लेते हैं। आपकी स्कीम बहुत अच्छी है। ये नहीं होता तो बहुत गरीब आदमी मर जाते।”

तीन हजार का खर्च चार सौ से पांच सौ हो गया : सुभाष मोहंती
कटक से सुभाष मोहंती ने कहा, ”चार साल से डायबिटीज और बीपी से पीड़ित हूं। मेरी पत्नी का भी भी यही बीमारी है। पहले हमारी दवाओं का खर्च 3 हजार का खर्च था। जन औषधि से 400 से 500 रुपये में हो जाता है। जब जाते हैं तब दवाइयां मिल जाती हैं, कोई दिक्कत नहीं है।”

जन औषधि केंद्रों के आवंटन में पूरी पारदर्शिता :  अंजन प्रकाश
झारखंड में रामगढ़ के अंजन प्रकाश ने कहा,  ”मैं प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत दुकान चलाता हूं। मैं बताना चाहूंगा कि इस प्रकार के दुकान खोलने की प्रक्रिया में किसी भी तरह के भ्रष्‍टाचार से नहीं गुजरना पड़ता है। यह पूरी तरह से पारदर्शी है। मुझे एक सप्ताह में इसका लाइसेंस मिल गया। पुरानी दुकान वाले थोड़ा नाराज रहते हैं, वे दवाओं के बारे में झूठ भी फैलाते हैं, लेकिन मुझे लोगों की बहुत दुआएं मिलती हैं। जो मरीज दवाएं इस्तेमाल कर रहे हैं उन्हें विश्वास हो रहा है।”

फर्क तो है भाई…

  • घुटना प्रत्यारोपण में पहले 2.5 लाख से 3 लाख तक लगता था। अब 60 से 70 हजार में घुटना प्रत्यारोपण हो जाता है।
  • स्टेंट की कीमत 1.5 से 3 लाख की थी जिसका अब अधिकतम मूल्य 29 हजार तक कर दिया गया है। बेयर मेटल स्टेंट की कीमत अधिकतम 8 हजार रुपये किया गया।
  • प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों में मिलने वाली दवाइयां बाहरी दवाइयों की तुलना में 80 से 90 प्रतिशत तक सस्ती मिलती हैं।
  • प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस के तहत 2.25 लाख मरीजों के 22 लाख से ज्यादा सेशन हो चुके हैं। 500 से अधिक जिलों में 400 जन स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों में ये सेवाएं चल रही हैं।
  • ‘आयुष्मान भारत’ के तहत देश के हर कोने में 1.5 लाख स्वास्थ एवं कल्याण केंद्र खोलने की योजना। इसमें दवाइयों के साथ डाइग्नॉस्टिक की सेवा भी मिलेगी।

 

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