Home विपक्ष विशेष आशीष कुलकर्णी ने खोला कांग्रेस और राहुल की नाकामियों का ‘कच्चा-चिट्ठा’

आशीष कुलकर्णी ने खोला कांग्रेस और राहुल की नाकामियों का ‘कच्चा-चिट्ठा’

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एक ओर तो अपनी नीतियों और कार्यशैली की वजह से कांग्रेस पार्टी अपनी साख लगातार खोती जा रही है। दूसरी ओर मुश्किल समय से गुजर रही इस पार्टी को लगातार चुनावी झटके भी झेलने पड़ रहे हैं। तीसरा पक्ष यह है कि इसके नेता और अन्य सदस्य लगातार पार्टी से पलायन कर रहे हैं। ताजा स्थिति यह है कि महाराष्ट्र में लंबे समय तक कांग्रेस के ‘वॉर रूम’ सलाहकार और राहुल गांधी के ऑफिस के रणनीतिकार रहे आशीष कुलकर्णी ने इस्तीफा दे दिया है। कुलकर्णी ने अपना इस्तीफा कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भेजा है। कड़े शब्दों में लिखे अपने तीन पेज के इस्तीफे में कुलकर्णी ने जहां एक ओर कांग्रेस पार्टी की कार्यशैली और संस्कृति पर सवाल उठाए हैं, वहीं कांग्रेस हाईकमान और टॉप लीडरशिप से लेकर पार्टी के सीनियर नेताओं पर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

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वामदलों के सिद्धांतों पर चल रही है कांग्रेस
आशीष कुलकर्णी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस अब विचारधारा के तौर पर खुद को वामपंथ के नजदीक ले जाने लगी है और कश्मीरी अलगाववादियों तक का समर्थन करने लगी है। उन्होंने कांग्रेस पर जेएनयू में राष्ट्रविरोधी प्रदर्शनों का समर्थन करने और तुष्टीकरण की राजनीति करने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा, ”कांग्रेस की छवि कश्मीरी अलगाववादियों और जेएनयू में विवाद पैदा करने वालों के लिए सहानुभूति रखने वाली पार्टी की बन गई है।”

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हिंदुओं की विरोधी पार्टी बन गई है कांग्रेस
आशीष कुलकर्णी ने यह आरोप भी लगाया कि कांग्रेस कभी वामपंथ और दक्षिणपंथ के बीच की विचारधारा पर चलने वाली पार्टी हुआ करती थी, लेकिन यही पार्टी अब कम्युनिस्टों, तृणमूल कांग्रेस जैसी हिन्दू विरोधी पार्टी की सहधर्मी बनती जा रही है। उन्होंने लिखा, ”कांग्रेस को मुस्लिम तुष्टिकरण की नीतियों की वजह से हिन्दू विरोधी पार्टी के रूप में देखा जा रहा है।”

कांग्रेस में छाया ‘भाई-भतीजावाद’-‘सामंतवाद’
आशीष कुलकर्णी ने कांग्रेस पार्टी में आतंरिक लोकतंत्र और पारदर्शिता का अभाव बताया है और इसके लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है, ”कांग्रेस अब भी एक सामंतवादी पार्टी है। एक खास समूह के अलावा नये खून को पार्टी में नहीं आने दिया जा रहा है। जमीन के नेताओं के लिए पार्टी की ऊपरी सतह पर पहुंचना मुश्किल है, इसलिए मैं दुखी होकर इस्तीफा दे रहा हूं।”

जमीनी हकीकत से कट चुकी है कांग्रेस
आशीष कुलकर्णी ने पार्टी की नीतियों पर भी सवाल उठाते हुए लिखा है कि पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए कोई ब्लूप्रिंट तक नहीं तैयार किया गया है। पिछले कुछ सालों में पार्टी जमीनी हकीकत से पूरी तरह से कट चुकी है। यह बदलते सियासी मिजाज के हिसाब से अपने को ढालने में नाकाम रही है। पार्टी में सामान्य कार्यकर्ता बुरी तरह से हतोत्साहित हैं और काडर खत्म हो रहा है। उन्होंने लिखा है कि विपक्ष के तौर पर कांग्रेस का रुख आम लोगों को अपनी ओर खींचने में पूरी तरह से विफल रहा है।

पार्टी में प्रबंधन नहीं, नेतृत्व में भी शून्यता
राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े करते हुए कुलकर्णी ने कहा कि महाराष्ट्र, असम, गोवा, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में पार्टी की हार के लिए कुप्रबंधन और पार्टी की निष्क्रियता ही जिम्मेदार है, जिससे पार्टी लगातार चुनावी हार का सामना कर रही है। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश और गुजरात के चुनाव से पहले भी पार्टी यही निष्क्रियता दोहरा रही है।

प्रियंका को राहुल का प्रतिद्वंद्वी बनाने की कोशिश
कुलकर्णी ने अपने पत्र में ये भी कहा कि कुछ लोग गांधी परिवार में दरार पैदा करने के लिए राहुल के सामने प्रियंका को खड़ा करने की हर वक्त कोशिश करते रहते हैं। उन्होंने लिखा है कि हाल ही में प्रियंका गांधी के कांग्रेस में कार्यकारी अध्यक्ष बनने की संभावना वाली खबरें मीडिया में आई थीं। उसके पीछे पार्टी के कुछ दिग्गजों का हाथ है। उन्होंने ही ऐसी अफवाहों को हवा देने का काम किया।

कांग्रेस के ‘पीके’ थे आशीष कुलकर्णी !
जिस तरह से चुनावी रणनीतिकार के रूप में आज प्रशांत किशोर का जिक्र होता है। वैसे ही आशीष कुलकर्णी भी एक समय कांग्रेस के पीके थे। कुलकर्णी वर्षों तक शिवसेना चीफ बाल ठाकरे के करीबी रहे। वर्ष 2003 में जब उद्धव ठाकरे ने पार्टी की कमान संभाली, तब नारायण राणे से करीबी होने के चलते कुलकर्णी को साइडलाइन कर दिया गया। बाद में नारायण राणे के साथ कुलकर्णी भी कांग्रेस में शामिल हो गए। कुलकर्णी ने वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों में मुंबई की सभी 6 लोकसभा सीटों पर अशोक चव्हाण को क्लीन स्वीप करने में मदद की। इसके बाद कुलकर्णी को वर्ष 2009 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी दी गई। कांग्रेस को लगातार तीसरी बार जीत हासिल हुई। इसके बाद कुलकर्णी के टैलेंट पर गांधी परिवार की नजर पड़ी और उन्हें दिल्ली ऑफिस बुला लिया गया था। तब से अब तक वे पार्टी में लगातार मजबूत स्थिति बनाए हुए थे। 

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