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क्या राजनीति को पार्ट टाइम जॉब की तरह लेते हैं राहुल गांधी?

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राजनीति को लेकर राहुल गांधी कितने सीरियस हैं आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव नतीजों का विश्लेषण कर रहे थे, उस वक्त कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपने दोस्तों के साथ हॉलीवुड फिल्म स्टार वॉर्स देख रहे थे। राहुल की कांग्रेस गुजरात को छोड़िए, हिमाचल प्रदेश में भी हार गई थी। ऐसे में विश्लेषण छोड़कर राहुल के स्टार वॉर्स देखने में व्यस्त रहने पर एक बार फिर से सवाल उठने लगे है कि क्या वे राजनीति को लेकर गंभीर हैं या फिर इसे पार्टटाइम जॉब की तरह ले रहे हैं।

सौजन्य

जिस राहुल गांधी के भरोसे कांग्रेस पार्टी देश की सत्ता में फिर से वापसी की उम्मीद कर रही है वह बेहद कमजोर है। राहुल गांधी का रिकॉर्ड तो ये है कि अब तक उनके नेतृत्व में जितने भी चुनाव लड़े गए उसमें कांग्रेस हारती ही चली आ रही है। गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में हार के बाद अब सिर्फ चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बची है।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल कई बार अपनी हरकतों के कारण मजाक का पात्र बन जाते हैं और जब भी पार्टी को उनकी ज्यादा जरूरत होती है, वो फिल्म देखने या फिर विदेश यात्राओं पर निकल जाते हैं। कभी वो नानी से मिलने इटली चले जाते हैं, तो कभी मानसिक तनाव और थकान मिटाने के लिये बैंकॉक-म्यांमार की यात्रा पर निकल जाते हैं। यही नहीं हो बीच-बीच में वो लंदन-न्यूयॉर्क की यात्राओं पर भी गुपचुप तरीके से निकलते रहते हैं।

राहुल के लिये विदेश यात्रा से बढ़कर कुछ भी नहीं
राहुल गांधी पर आरोप लगते रहे हैं कि वो हर अहम मौकों पर पार्टी को बीच मझधार में छोड़कर विदेश भाग जाते हैं। हाल ही में इसका उदाहरण तब भी देखने को मिला जब राष्ट्रपति चुनाव के लिये रणनीति बनानी थी लेकिन, वो अपनी जिम्मेदारियों को छोड़ कर कहीं चले गये थे। हालांकि जब भी उनकी ऐसी हरकतों पर सवाल उठने लगते हैं, तो उनकी पार्टी उनका बचाव करने लगती है। पिछले जून में सहारनपुर और मंदसौर पर सियासी नौटंकी करने के बाद वो अचानक इटली चले गये और कहा कि नानी से मिलने जा रहे हैं। 

60 दिन की लंबी गुपचुप विदेश यात्रा
राहुल की सबसे चर्चित छुट्टी फरवरी, 2015 की थी, जब वो अचानक देश से बाहर चले गए थे और 60 दिन बाद दिल्ली लौटे। बाद में पता चला कि वह बैंकॉक और म्यांमार घूमने गये थे। कहा गया कि मानसिक तनाव से मुक्ति के लिये उन्होंने इन देशों की यात्राएं की हैं। तब का उनका यात्रा विवरण भी दिलचस्प है-

• 16 फरवरी को दिल्ली से बैंकॉक के लिए उड़ान भरा
• 17 फरवरी को बैंकॉक से कंबोडिया गये और वहां 11 दिनों तक ठहरे
• 28 फरवरी को वापस बैंकॉक आ गए
• अगले दिन म्यांमार पहुंच गये और वहां लगातार 21 दिनों तक विश्राम किया
• 22 मार्च को वापस थाइलैंड पहुंचे और अयुथ्या बौद्ध केन्द्र में 9 दिन रहे
• 31 मार्च को वियतनाम पहुंचे और 12 अप्रैल तक वहीं ठहरे
• 12 अप्रैल को एक बार फिर बैंकॉक पहुंच गये और 16 अप्रैल तक वहीं आराम किया। फिर वापस दिल्ली लौट आये।

सवाल इसलिए भी उठने लगते हैं कि पिछले कुछ समय से कांग्रेस पार्टी समस्याओं से घिरी हुई है और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। राहुल गांधी परिदृश्य से उसी समय गायब हो जाते हैं जब उनकी जरूरत होती है।

राहुल गांधी की छुट्टियों पर एक नजर –

  • 25 अगस्त, 2017 को राहुल गांधी नॉर्वे की राजधानी ओस्लो चले गए। ये दौरा उस वक्त हुआ जब 27 अगस्त को बिहार में विपक्षी एकता की ताकत दिखाने को लालू प्रसाद रैली कर रहे थे। इसी दौर में चीन के साथ डोकलाम विवाद भी चल रहा था ।
  • इसी साल 28 जून को राष्ट्रपति पद के लिए नामाकंन करने गई मीरा कुमार के साथ भी राहुल गांधी मौजूद नहीं थे।
  • 13 जून,2017 को जब मंदसौर में किसानों का आंदोलन चल रहा था और कांग्रेस पार्टी हमलावर थी तो राहुल गांधी इटली नानी से मिलने चले गए।
  • 6 और 9 जनवरी, 2017 को जब कांग्रेस पार्टी देश भर में विरोध प्रदर्शन कर रही थी तो राहुल गांधी विदेश में रहे।
  • दिसंबर 2016 में जब कांग्रेस पार्टी नोटबंदी को लेकर विरोध कार्यक्रमों की धार तेज कर रही थी, राहुल ठीक उसी वक्त विदेश चले गए। उनकी गैरमौजूदगी ने विरोध की धार को कुंद कर दिया।
  • बीते वर्ष देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का माहौल था। उसी समय राहुल गांधी अपनी खाट सभाओं को छोड़कर नए साल की छुट्टियां मनाने लंदन थे।
  • 2015 में भी बिहार चुनाव के ठीक पहले राहुल गांधी फ्रांस में थे।
  • राहुल की सबसे चर्चित छुट्टी फरवरी 2015 की थी। बजट सत्र के दौरान वह अचानक देश से बाहर चले गए और जब 57 दिनों बाद दिल्ली लौटे तो पता चला कि वह बैंकाक, म्यामांर घूमने गए थे। उन्होंने ध्यान करना भी सीखा।
  • दिसंबर, 2014 में पार्टी स्थापना दिसव पर भी राहुल नदारद थे।
  • मई, 2014 को सोनिया गांधी की ओर से तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए आयोजित विदाई भोज में भी राहुल गांधी नहीं दिखे।
  • राहुल गांधी नवंबर 2014 में अचानक गायब हो गए थे। सवाल संसद तक में उठा तो कांग्रेस को बचाव में उतरना पड़ा था।
  • राहुल गांधी 2014 के लोकसभा चुनाव के ठीक पहले गुप्त स्थान पर छुट्टियां मनाने चले गए थे। इसी बीच एक खुली जीप पर घूमते राहुल की फोटो सामने आई थी और बताया गया था कि यह रणथंभौर के नेशनल पार्क की है।
  • जून, 2013 में जब उत्तराखंड बाढ़ और भू-स्खलन की भारी तबाही झेल रहा था तब भी राहुल विदेशों में आराम फरमा रहे थे। उस समय वहां कांग्रेस की ही सरकार थी।
  • 16 दिसम्बर 2012 को हुए निर्भया बलात्कार और हत्या मामले में दिल्ली और देशभर में छिड़े आंदोलन के बीच भी उनके पास युवाओं की आवाज बनने का मौका था लेकिन उस समय भी राहुल गांधी विदेश दौरे पर थे।
  • साल 2012 में हद तब हो गई थी जब वे नए साल की छुट्टियां मनाने फ्रांस चले गए थे जिसमें एक फोटो में वो एक युवती के साथ दिखाई दिए थे।

बिना किसी नेता की पार्टी है कांग्रेस
राहुल के इसी रवैये पर जोरदार हमला बोलते हुए इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने हाल ही में कहा कि कांग्रेस बिना नेता की पार्टी है। उन्होंने कहा कि 131 साल पुरानी कांग्रेस अब कोई बड़ी राजनीतिक ताकत नहीं बन सकती। कांग्रेस को नेतृत्व विहीन पार्टी बताने वाले गुहा इससे पहले भी राहुल गांधी पर तीखे तंज कस चुके हैं। राहुल पर तंज कसते हुए कहा था कि अजय माकन और दिग्विजिय सिंह जैसे नेता पद से हटाए जा रहे हैं लेकिन राहुल गांधी बने हुए हैं। गुहा ने कहा था कि राहुल गांधी को राजनीति से रिटायर हो जाना चाहिए, शादी करके परिवार बसाना चाहिए। यही उनके लिए अच्‍छा होगा, यही भारत के लिए अच्‍छा होगा।

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