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चुनाव आयोग ने भी मान लिया कि इस देश में एक ही ‘पप्पू’ है!

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”पप्पू शब्द का इस्तेमाल एक विशेष व्यक्ति के लिए उपहासजनक है, जिन्हें आमतौर पर सभी लोग इस नाम से समझ जाते हैं जो इस चुनावी राज्य में विवाद पैदा कर सकता है।” गुजरात राज्य चुनाव आयोग ने इसी दलील के साथ प्रदेश में चुनावों तक विज्ञापनों में ‘पप्पू’ शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है, लेकिन सवाल यह है कि इस देश में लाखों व्यक्तियों के नाम पप्पू होंगे फिर इसपर रोक लगाने का उद्देश्य क्या है? दरअसल राहुल गांधी की पहचान इस देश में ‘पप्पू’ के तौर हो चुकी है, यानी ऐसा व्यक्ति जिसकी उम्र के हिसाब से समझ विकसित नहीं हो पाई है। दरअसल बीते कुछेक वर्षों में कई वाकये ऐसे हुए हैं जो वास्तव में उन्हें ‘पप्पू’ साबित करते हैं। आइये हम ऐसे ही कुछ वाकये पर नजर डालते हैं-

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विकास को पागल कहा
कांग्रेस पार्टी ने अपना चुनावी कैंपेन ही गुजरात में हुए विकास को टारगेट करते हुए किया है। देश-समाज का कोई भी व्यक्ति गुजरात मॉडल का उपहास उड़ाए जाने से ‘‘निराश’’होगा। क्योंकि विकास का गुजरात मॉडल आजमाया और परखा गया मॉडल है और कई अन्य राज्यों में इसे दोहराया गया है, लेकिन राहुल गांधी जानबूझकर ‘विकास’ की मानसिकता को कमजोर कर रहे हैं जो घातक है।

आलू की फैक्ट्री लगाएंगे
राहुल गांधी अपने भाषणों में तो अक्सर बेवकूफी भरी बातें कहते रहते हैं, लेकिन 1 अक्टूबर, 2016 को यूपी विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने सारी हदें ही पार कर दीं। राहुल ने कहा, ”केंद्र में मेरी सरकार नहीं है, मैं तो सिर्फ दबाव बना सकता हूं। आप चाहते हैं कि यहां पर आलू की फैक्ट्री लगाई जाए, लेकिन मोदी सरकार आपकी मांग नहीं मान रही है।”

आलू की फैक्ट्री से सोना
14 नवंबर को गुजरात के पाटन में रैली के दौरान राहुल गांधी ने ऐसी बात कह दी कि फिर से उनका मजाक बन गया। उन्होंने कहा, ”ऐसी मशीन लगाऊंगा इस तरफ से आलू डालो उस तरफ से सोना निकालो। इस साइड से आलू डालो उस साइड से सोना निकालो। इतना पैसा बनेगा समझ नहीं आएगा खर्च कहां करूं।”

लेडीज टॉयलेट में घुस गए
11 अक्टूबर को राहुल गांधी गुजरात के छोटा उदयपुर पहुंचे जहां उन्होंने एक रैली को संबोधित किया। राजनीतिक सभाओं और बयानबाजी के बीच राहुल के साथ एक ऐसी घटना हुई जिससे वे मजाक का शिकार हो गए। यहां ‘संवाद’ सभा के दौरान युवाओं से बातचीत कर रहे थे। सभा खत्म होने के बाद, राहुल टाउन हाल से बाहर निकले और पुरुषों के बजाय महिलाओं के टॉयलेट में घुस गए।

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विधेयक की कॉपी फाड़ दी
27 सितंबर, 2013 को दागी जनप्रतिनिधि विधेयक को सरेआम फाड़ने का ड्रामा तो आप सबको याद होगा। किस तरह डॉ मनमोहन सिंह कैबिनेट को शर्मसार होना पड़ा और भारत की पूरी राजनीतिक व्यवस्था का अपमान किया गया। तीन-चार दिनों तक राहुल गांधी मीडिया की सुर्खियों में तो रहे, लेकिन उनकी हरकतों ने उन्हें एक अगंभीर राजनेता की छवि गढ़ दी।

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चीनी दूतावास में की ‘गुप्त मंत्रणा’
डोकलाम भारत और चीन के बीच जारी तनाव के बीच चीनी राजदूत से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की मुलाकात को लेकर बवाल खड़ा हो गया। चीनी दूतावास के WeChat अकाउंट ने 8 जुलाई को राहुल की बैठक की पुष्टि की थी, लेकिन राहुल गांधी ने पहले तो मुलाकात नहीं होने की बात कही फिर चीनी मीडिया में यह खबर आने के बाद आखिरकार कांग्रेस ने माना कि राहुल की मुलाकात हुई है।

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राहुल के एनआरआई
22 सितंबर, 2017 को राहुल गांधी ने न्यूयॉर्क के ऐतिहासिक टाइम्स स्क्वेयर में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि देश को आपकी जरूरत है। महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, डॉक्टर आंबेडकर, मौलाना आजाद सभी एनआरआई थे। इन लोगों ने विदेशों में रहकर दुनिया को देखा और समझा। इसके बाद भारत लौटे और देश के लिए काम किया। कांग्रेस का असली आंदोलन एनआरआई मूवमेंट था।

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महिलाओं को शॉर्ट में देखना चाहते हैं राहुल
‘क्या संघ में कभी किसी महिला को स्कर्ट में देखा है?’ राहुल गांधी का यह बयान न सिर्फ उनकी सतही सोच को प्रकट करता है, बल्कि यह भी बताता है कि उनकी समझ का स्तर क्या है। उन्हें यह कौन समझाए कि संपूर्ण भारत के अधिकांश भाग में महिलाओं का पारंपरिक परिधान साड़ी ही है। यहां तक कि हमेशा आधुनिक पोशाक पहनने वाली महिलाएं भी सार्वजनिक जीवन में या पारंपरिक अवसर पर साड़ी पहनने को ही प्राथमिकता देती हैं।

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