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राहुल गांधी की ‘हिट एंड रन’ रणनीति का पर्दाफाश

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 22 अगस्त से 25 अगस्त तक जर्मनी और ब्रिटेन के दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने जिस प्रकार का ‘आचरण’ दिखाया वह राजनीतिक रूप से अपरिपक्व, अतिरंजित, अशालीन, अहंकारी और और देश की जनता को गुमराह करने वाला है। वे लगातार गलतबयानी कर ‘बिलो द बेल्ट’ शैली में देश की छवि खराब कर रहे हैं। विशेष बात यह कि वे अपने ही दिए बयानों पर कायम नहीं रहते।
दरअसल ‘इरादतन’ झूठ बोल कर मुद्दे को उठाना, लोगों को भरमाना और फिर अपनी ही कही बातों से पलट जाना… उनकी फितरत हो गई है। इसे सहज शब्दों में कहें तो राहुल गांधी ने ‘हिट एंड रन’ की नीति अपना ली है ताकि ‘दुष्प्रचार’ भी हो जाए और अपना बचाव भी कर जाए।

आपको बता दें कि डोकलाम मामले पर सरकार की विफलता गिना रहे कांग्रेस अध्यक्ष से जब यह पूछा गया कि वे इससे कैसे निबटते तो उन्होंने कहा कि मुझे मामले की की ज्यादा जानकारी नहीं है। इसी तरह बेरोजगारी पर अपना ‘विजन’ देते हुए उन्होंने आरएसएस की तुलना आतंकवादी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से कर दी। वहीं महिलाओं के हिंसा के लिए देश की संस्कृति को ही जिम्मेदार ठहरा दिया।

सवाल ये है कि अगर उन्हें देश के बारे में नकारात्मक बातें करने में आनंद आता है तो वे विदेशी धरती का इस्तेमाल क्यों करते हैं? सवाल यह भी कि अगर कोई बात कहते हैं तो उस पर वे कायम क्यों नहीं रहते?

सिख नरसंहार पर राहुल ने कांग्रेस को दी ‘क्लीन चिट’
25 अगस्त को लंदन में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के साथ बातचीत के दौरान 1984 में सिखों के नरसंहार पर राहुल गांधी ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। जाहिर है उनकी मंशा नरसंहार में शामिल जगदीश टाइटलर, सज्जन कुमार और कमलनाथ जैसे नेताओं को बचाने की थी। हालांकि जब विरोध हुआ तो उनकी पार्टी ने राहुल को ‘बच्चा’ ठहराते हुए बचाव किया कि दंगों के समय वे महज 14 साल के थे।

 

डोकलाम मामले पर घिरे तो पलट गए राहुल गांधी
24 अगस्त को लंदन में आयोजित इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के कार्यक्रम में चीन और भारत के बीच खत्म हो चुके डोकलाम विवाद को राहुल गांधी ने फिर से हवा देने की कोशिश की। पहले तो उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इस मुद्दे को सही तरीके से नहीं निबटा। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि आप इससे कैसे निबटते, तो उन्होंने मामले की जानकारी नहीं होने की बात कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की।

भारतीय संस्कृति में दोष या राहुल की सोच में खोट?
भारत और भारतीय संस्कृति के प्रति राहुल गांधी के नफरत का भाव एक बार फिर तब जाहिर हो गया जब जर्मनी में उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं के अपमान के लिए भारतीय संस्कृति दोषी है। 22 अगस्त को जर्मनी के हैम्बर्ग स्थित बूसेरियस समर स्कूल में छात्रों को संबोधित करते हुए दिए गए उनके बयान का कांग्रेस पार्टी ने बाद में बचाव किया और राहुल गांधी को ‘नादान’ ठहराने की कोशिश की।

प्रधानमंत्री बनने का ‘सपना’ देख रहे हैं राहुल गांधी!
राहुल गांधी के भीतर पीएम बनने की लालसा इतनी उबाल मार रही है कि वे कन्फ्यूज हो गए हैं। दरअसल 23 अगस्त को जर्मनी में उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगर सबसे बड़ी पार्टी होगी तो वे प्रधानमंत्री बनेंगे। हालांकि जब संभावित महागठबंधन के दलों ने ऐतराज जताया तो फिर ब्रिटेन में कह दिया कि मैं पीएम बनने का सपना नहीं देखता।

सर्जिकल स्ट्राइक पर अब राहुल को सबूत नहीं चाहिए!
सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाने वाले राहुल गांधी ने ब्रिटेन की धरती से एक बार फिर खुद को पलटू राम साबित कर दिया। दरअसल इस बार उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक को देश की उपलब्धि बताया। 24 अगस्त को लंदन के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटिजिक स्टडीज (IISS)  में बातचीत के दौरान उन्होंने इसका समर्थन किया।  हालांकि इससे पहले राहुल गांधी सेना के इस बड़े ऑपरेशन पर सबूत मांगते थे।

संसद में बहस का स्तर खुद गिरा चुके हैं राहुल गांधी
राहुल गांधी अपने बयानों और कारनामों में कितना विरोधाभास रखते हैं इसका एक और उदाहरण तब सामने आया जब उन्होंने कहा कि संसद में बहस का स्तर ठीक नहीं है। हालांकि 20 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव के दौरान उनके गिरे हुए स्तर को पूरी दुनिया ने देखा था, जब वे जबरन पीएम मोदी के गले पड़ गए थे और इसके बाद उन्होंने आंखों से इशारा भी किया था।

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