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राहुल गांधी इतने कन्फ्यूज क्यों रहते हैं?

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कुछ दिन पहले कहा था कि वह मुंह खोलेंगे तो भूकंप आ जाएगा। लेकिन उन्होंने जो आरोप लगाए वो फुस्स साबित हुए। जलजले की तो बात छोड़िए कोई खास हलचल भी नहीं मची। राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सहारा और बिड़ला को लेकर कथित तौर पर जो आरोप लगाए, उसमें कोई दम नहीं है। इसमें कुछ नया भी नहीं है क्योंकि इन्हीं आरोपों को लेकर प्रशांत भूषण की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई तक के लिए राजी नहीं हुआ। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इसी मुद्दे को पहले उठा चुके हैं लेकिन ये बेबुनियाद साबित हुआ।

क्या राहुल को पहले से पता नहीं था कि इस तरह का मामला पहले से ही कोर्ट में है या फिर सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए जोश में बोल गए। इससे उनकी राजनैतिक अपरिपक्वता झलकती है और उपहास के पात्र भी बन जाते हैं।

वाराणसी में राहुल का मजाक उड़ाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके (कांग्रेस) एक युवा नेता हैं। वह भाषण देना सीख रहे हैं। जब से उन्‍होंने बोलना सीखा है, बोलना शुरू किया है, मेरी खुशी का ठिकाना नहीं है। 2009 में पता ही नहीं चलता था कि इस पैकेट के अंदर क्‍या है। अब पता चल रहा है कि क्‍या है। अच्‍छा हुआ वह कुछ तो बोले। ना बोलते तो बड़ा भूकंप आ जाता। इतना बड़ा भूकंप कि देश 10 साल तक उससे उबर नहीं पाता।

राहुल के आरोप पर बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष इस तरह के बेबुनियाद आरोप इसलिए लगा रहे हैं ताकि अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले की जांच से ध्यान भटकाया जा सके। क्योंकि घोटाले में परिवार के लोगों का नाम भी आ रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ आधारहीन आरोप लगाने वाले राहुल खुद 5000 करोड़ रुपए के नेशनल हेराल्ड केस में जमानत पर हैं। कांग्रेस पार्टी ने तो घोटाला करने में जमीन, आकाश और पाताल किसी को भी नहीं छोड़ा है।

जबकि इसी आरोप पर हुए सर्वे में 82.7 प्रतिशत लोगों का माना कि मोदी पर लगे आरोप बिल्कुल निराधार हैं। सी-वोटर के सर्वे में ये बात सामने आयी है कि 57.7 फीसदी लोगों को राहुल पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। 9.8 फीसदी लोग ऐसे हैं जो राहुल पर भरोसा करते हुए भी ये मानने को तैयार नहीं हैं कि मोदी रिश्वत ले सकते हैं। ये सर्वे निम्न, मध्यम और उच्च आय वर्ग के अलग-अलग उम्र के लोगों के बीच किए गये।

आखिर राहुल सीरियस कब होंगे। भूकंप लाने वाली उनके इस बात पर अब मजाक उड़ने लगा है। भूकंप लाने की बात कहने के ठीक बाद वे प्रधानमंत्री से मिलने चले गए थे जिससे विपक्षी एकता में दरार पैदा हो गई। उनपर ये आरोप लगने लगा कि अपने जीजा राबर्ट वाड्रा की फाइल दबवाने के लिए वे मोदी से मिलने गए।

आरोप लगाने से पहले राहुल को खुद अपने परिवार का रिपोर्ट कार्ड देख लेना चाहिए था। वैसे तो कांग्रेस पर कई दर्जन घोटाले के आरोप लगे, लेकिन इनमें से कई घोटाले में सीधे-सीधे इनके परिवार का नाम सामने आया है-

  • अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला- 2013
  • रॉबर्ट वाड्रा- डीएलएफ घोटाला-2012
  • नेशनल हेराल्ड केस-2011
  • बोफोर्स घोटाला
  • मारुति घोटाला- 1973

इसके साथ ही भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ चलाए जा रहे नोटबंदी अभियान का विरोध करने से पार्टी के साथ-साथ राहुल गांधी की भी छवि आम लोगों में खराब हुई। लोग इन्हें कालाधन का समर्थक मानने लगे हैं। ऐसे में क्या राहुल ने भूकंप की बात इसी सब से ध्यान भटकाने के लिए की? या फिर क्या वे चर्चा में बने रहने के लिए इस तरह की बयानबाजी करते हैं? साथ ही जब दिल्ली के सीएम इस पर पहले ही बोल चुके थे तो भूकंप वाली बात कहकर क्या खुद की छवि केजरीवाल जैसी बनाना चाहते हैं? या फिर राहुल को किसी मजबूरी में ऐसा करना पड़ रहा है? लेकिन इन सभी सवालों का जवाब खुद राहुल को ही देना होगा। हालांकि लोगों के सामने उनका पैकेट खुल चुका है।

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