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चीन के लिए राफेल करार खत्म करवाना चाहते हैं राहुल गांधी!

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मई, 2017 में चीनी सेना भारत, भूटान और चीन की सीमाओं के बीच स्थित डोकलाम पठार के ट्राईजंक्शन में घुस आई थी। भारत की सेना चीन की इस हरकत का विरोध करते हुए डोकलाम में चीनी सैनिकों के सामने डट गई और दो टूक कह दिया कि चीनी सैनिकों को वापस जाना होगा। ऐसा लग रहा था कि भारत-चीन के बीच फिर युद्ध छिड़ जाएगा। इसी बीच 8 जुलाई, 2017 को एक ऐसी खबर आई जिसने सभी को हैरत में डाल दिया। वह थी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने डोकलाम विवाद के बीच चीनी राजदूत से मुलाकात।

हालांकि राहुल गांधी समेत पूरी कांग्रेस पार्टी ने इस मुलाकात से इनकार किया और भाजपा पर उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया। लेकिन 10 मई को जब चीनी राजदूत ने मुलाकात की तस्वीर अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर पोस्ट की तो राहुल गांधी समेत पूरी कांग्रेस पार्टी के झूठ की पोल खुल गई।

खास बात ये कि ये मुलाकात क्यों की गई और उसे देश से छिपाने की कोशिश क्यों हुई, इस पर कांग्रेस पार्टी ने खुलकर अब तक कुछ नहीं कहा। बाद में 73 दिनों के गतिरोध के बाद चीनी सैनिकों को पीछे हटना पड़ा। जाहिर है यह पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत के सामर्थ्य के आगे चीन का सरेंडर था। जाहिर है चीन को भी समझ में आ गया कि अब भारत उसकी गीदड़ भभकियों के आगे झुकने वाला नहीं है।

हालांकि इसके बाद का घटनाक्रम राहुल गांधी और कांग्रेस के असल चरित्र की पोल खोलती है। डोकलाम विवाद के दौरान हुई इस मुलाकात के बाद से ही राहुल गांधी फ्रांस से किए गए राफाल फाइटर जेट डील पर सवाल उठाने लगे हैं।

आपको बता दें कि दो सरकारों के बीच बिना किसी बिचौलिये के एक पारदर्शी सौदा किया गया, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने इसे मुद्दा बना लिया है। राहुल गांधी भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए इस डील को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। जाहिर है देश की सुरक्षा से जुड़ी इस अहम डील को वे खत्म करवाना चाहते हैं। ऐसी खबरें भी निकलकर आ रही हैं कि चीन ने इसके लिए कांग्रेस पार्टी को फंडिंग की है कि वह किसी तरह राफेल करार को रोके। माना जा रहा है कि राहुल गांधी को आगे कर चीन राफेल डील को खत्म करवाना चाहता है।

दरअसल वह दो विकल्पों पर काम कर रहा है। एक तो ये कि किसी भी तरह से राफेल डील खटाई में पड़ जाए। आपको याद होगा कि 2001 से चल रही डील की प्रक्रिया 2013 तक सरकार में रहने के बाद भी कांग्रेस ने पूरी नहीं की थी। इस प्रक्रिया के दौरान भी कांग्रेस के नेताओं द्वारा चीन से कमीशन खाने की बात कही जा रही है। आपको बता दें कि चीन राफेल डील को डिरेल्ड इसलिए करवाना चाहता है कि उसके पास राफेल विमान का कोई तोड़ नहीं है।

दूसरा यह कि सरकार के खिलाफ ऐसा माहौल बनाया जाए कि वह राफेल की टेक्निकल डिटेल पब्लिक डोमेन ले आए। जाहिर है इससे  चीन उसका तोड़ निकाल सकता है। दरअसल टेक्निकल डिटेल और कीमतों के विवरण के साथ ये पता लगाना आसान होता है कि उस विमान में किस तरह के हथियार लगाए गए होंगे, यानि स्पष्ट है कि देश की सुरक्षा को देखते हुए ये सीक्रेट रहने चाहिए।

एक बात जो सामने आ रही है वह यह कि कांग्रेस चाहती है कि भारत की सेना को पाकिस्तान की सेना पर बढ़त हासिल न हो। हाल में जब पाकिस्तानी सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने राफेल डील में दखल दिया तो यह साफ हो गया कि राहुल गांधी चीन और पाकिस्तान के हित को फायदा पहुंचा रहे हैं। गौर करने वाली बात यह भी है कि पाकिस्तान के कई नेता राहुल गांधी को समर्थन दे रहे हैं।

डील को रोकने के लिए कांग्रेस ने कोर्ट का भी सहारा लिया है। पार्टी के नेता तहसीन पूनावावाला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल किया था। हालांकि बाद में देश में अपनी छवि सुधारने के लिए पार्टी इससे पीछे हट गई। बहरहाल कयास लगाए जा रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट में नये चीफ जस्टिस की नियुक्ति के बाद कांग्रेस इस डील को रुकवाने के लिए याचिका डालेगी।

बहरहाल आपको बता दें कि भारत ने सितंबर 2016 में फ्रांस के साथ एक इंटर-गर्वनमेंट समझौते को साइन किया था। इसके तहत 36 राफेल डील खरीदने का सौदा हुआ। इन फाइटर जेट्स की डिलीवरी सिंतबर 2019 से भारत को शुरू हो जाएगी। देश की रक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह बेहद आवश्यक डील है, जिसे इंडियन एयरफोर्स हर हाल में चाहती है। जाहिर है अगर इस डील में कोई बाधा आती है तो यह देश की सुरक्षा के लिए गंभीर स्थिति पैदा करेगा।

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