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प्रधानमंत्री मोदी 15 अगस्त को दे सकते हैं 32 करोड़ जन धन खाताधारकों को तोहफा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब से देश की सत्ता संभाली है उनकी प्राथमिकता में देश के गरीबों, वंचितों, दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और किसानों का कल्याण रहा है। बीते चार वर्षों में शायद की मोदी सरकार का कोई ऐसा कदम होगा जो समाज के इस हाशिए पर जा चुके तबके की उन्नति को ध्यान में रखकर नहीं उठाया गया हो। प्रधानमंत्री मोदी ने जब 15 अगस्त 2014 को लाल किले से देश को संबोधित किया था, उसी दौरान उन्होंने गरीबों को आर्थिक आजादी दिलाने वाली प्रधानमंत्री जन धन योजना की घोषणा की थी। इस योजना के तहत उन लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना था, जो आजादी के इतने वर्षों के बाद भी बैंकों का मुंह तक नहीं देख सके थे। बीते चार वर्षों में इस योजना के तहत देशभर में 32.25 करोड़ जन धन खाते खोले जा चुके हैं और लाभार्थियों के खातों में 80,674 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जमा है।

15 अगस्त 2014 को हुआ था प्रधानमंत्री जन धन योजना का ऐलान
मोदी सरकार अब वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाली प्रधानमंत्री जन धन योजना के खाताधारकों के लिए तोहफा देने वाले हैं। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी 15 अगस्त को लाल किले से अपने भाषण में 32 करोड़ से अधिक जन धन खाताधारकों के लिए ओवर ड्राफ्ट को दोगुना क र 10,000 रुपये करने की घोषणा कर सकते हैं। अभी जनधन खाते के छह महीने तक ठीक से चलने के बाद 5,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट की सुविधा दी जाती है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार आकर्षक माइक्रो इंश्योरेंस स्कीम की भी घोषणा कर सकती है। रुपे कार्ड होल्डर्स को मिलने वाले मुफ्त दुर्घटना बीमा की राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाया जा सकता है। प्रधानमंत्री जन धन योजना का दूसरा चरण 15 अगस्त को पूरा होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, योजना के लिए अब नए लक्ष्य तय किए जाने हैं और इसकी घोषणा के लिए स्वतंत्रता दिवस समारोह सबसे अच्छा अवसर होगा। इसके अलावा, सरकार अटल पेंशन योजना के तहत पेंशन लिमिट की सीमा 5,000 प्रति माह से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर सकती है।

वित्तीय समावेशन की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यह योजना देश ही नहीं पूरी दुनिया में चर्चा का विषय है। वर्ल्ड बैंक भी पीएम मोदी की जन धन योजना की तारीफ कर चुका है। डालते हैं एक नजर-

प्रधानमंत्री जन धन योजना का ग्लोबल बैंकिंग सिस्टम में बोलबाला
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की बागडोर थामने के साथ ही वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने का अपना मजबूत इरादा जता दिया था। आज उसके ऐसे परिणाम सामने आ रहे हैं जो देश को विश्वस्तरीय गौरव दिला रहे हैं।

आज हर पांच में से चार भारतीयों के बैंक खाते

वर्ल्ड बैंक द्वारा गुरुवार को जारी की गई Global Findex की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 2014  तक सिर्फ 53 प्रतिशत भारतीयों के पास बैंक खाते थे जबकि 2017 के अंत तक 80 प्रतिशत भारतीय बैंक खाताधारी हो चुके थे। यानि देश में हर पांच में से चार लोगों ने बैंक खाता खोला है। जाहिर है कि 2014 में ही मोदी सरकार सत्ता में आई थी जिसके बाद यह तेजी आई है।

मौजूदा सरकार में वित्तीय समावेशन में तेजी
रिपोर्ट में वित्तीय समावेशन की वैश्विक वृद्धि में भारत के योगदान को दर्शाया गया है। Bill & Melinda Gates Foundation की फंडिंग से शुरू की गई Global Findex युवाओं की बचत, कर्ज, भुगतान के तरीकों और रिस्क मैनेजमेंट के आंकड़ों पर नजर रखती है। उसके आंकड़ों के मुताबिक 2011 में सिर्फ 35 प्रतिशत भारतीयों के पास बैंक खाते थे। इसके साथ ही रिपोर्ट भारत में बैंक खातों, डेबिट कार्ड और मोबाइल कनेक्शन की उपलब्धता को दिखाती है, जो भविष्य में खातों के इस्तेमाल में सुधार करने में महत्वपूर्ण निभाएगी।

प्रधानमंत्री जन धन योजना की प्रशंसा
Global Findex के आंकड़ों से जुड़ी इस रिपोर्ट में प्रधानमंत्री जन धन योजना की सफलता का विशेष उल्लेख भी किया गया है जिसकी शुरुआत व्यापक स्तर पर जनसामान्य को औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने के लिए की गई। आज जन धन योजना के अंतर्गत खोले गए खातों की संख्या 32 करोड़ से अधिक हो चुकी है। बैंकों के करेंट और सेविंग अकाउंट्स को जोड़ें तो मार्च 2017 में इनकी कुल संख्या 157.1 करोड़ थी, जो दो साल पहले 122.3 करोड़ थी।

दुनिया में बैंक खातों की संख्या में भारत का बड़ा योगदान
दुनिया भर में बैंक खातों की संख्या में हुई बढ़ोतरी में जन धन योजना का योगदान सबसे बड़ा है। 2014 से 2017 के बीच विश्व भर में करीब 51.4 करोड़ बैंक खाते खुले। इस अवधि में भारत में जन धन के तहत खुले बैंक खातों का इसमें करीब 55% योगदान है। खास बात यह भी है कि जन-धन के खाते खोलने में महिलाओ की हिस्सेदारी बड़ी है।   

डिजिटल लेनदेन में हो रही तेज बढ़ोतरी
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कैश की जगह बैंक अकाउंट के जरिए लेनदेन में काफी बढ़ोतरी हुई है। लेनदेन में आया यह एक ऐसा व्यावहारिक बदलाव है जिससे सरकार का कर राजस्व बढ़ सकता है। आने वाले समय में मजदूरी, कृषि उत्पाद और जनोपयोगी सेवाओं के लिए भी डिजिटल भुगतान का तरीका निकाला जा सकता है।

वर्ल्ड बैंक ने ‘आधार’ पर बल देने के कदम को सराहा
वर्ल्ड बैंक के Global Findex database 2017 के मुताबिक भारत में वित्तीय सेवाओं तक महिलाओं की पहुंच में बड़ी तेजी आई है। ऐसा आधार कार्ड पर सरकार के जोर देने से संभव हुआ है क्योंकि इसके जरिए खाताधारियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी आई है।  देश में आज करीब 83% पुरुष और 77% महिलाओं के पास बैंक खाते हैं। यानि आधार के जरिए बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच के मामले में ना सिर्फ अमीर और गरीब का फर्क कम हुआ है बल्कि जेंडर गैप भी बेहद कम हुआ है। गौर करने वाली बात है कि तीन साल पहले बैंक खाता रखने वाले पुरुषों और महिलाओं की संख्या में 20 अंकों का अंतर था जो अब मात्र छह रह गया है।

मोदी सरकार दिन-रात गरीबों और वंचितों को कल्याण के बारे में ही सोचती है। एक नजर डालते हैं उन योजनाओं पर जो देश में महिलाओं, वंचितों, किसानों, गरीबों, आदिवासियों के आर्थिक और सामाजिक विकास में सहयोग कर रही है।

सिर्फ गरीबों के कल्याण के लिये सोचती है मोदी सरकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार की योजनाओं और नीतियों पर नजर डालें तो उनमें से अधिकतर गरीबों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। मोदी सरकार के शासन काल में अबतक गरीबों, किसानों और समाज के दबे-कुचले लोगों के कल्याण के लिये जितने काम हुए और हो रहे हैं, बीते 70 साल में कभी नहीं हुए। सबसे बड़ी बात ये है कि ये सारी योजनाएं जन-कल्याण के लिये हैं, न कि लोकप्रियता बटोरने के लिये। तथ्य ये है कि सरकार की प्राथमिकता पिछड़ों को समाज की मुख्यधारा में लाकर देश को प्रगति के पथ पर आगे ले जाना है।

8 महीने पहले पूरा किया 5 करोड़ मुफ्त गैस कनेक्शन का लक्ष्य

प्रधानमंत्री मोदी सिर्फ वादा ही नहीं करते हैं, वह वादे को समय से पहले पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर देते हैं। मोदी सरकार किस तेजी के साथ काम करती है, इसका एक उदाहरण है प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब महिलाओं को धुंए की जिंदगी से आजादी दिलाने के लिए चलाई गई ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। मोदी सरकार ने इस योजना के तहत 5 करोड़ परिवारों को मुफ्त रसोई गैस उपलब्ध कराने का लक्ष्य आठ महीने पहले ही पूरा कर लिया है। मोदी सरकार ने मार्च 2019 तक पांच करोड़ लोगों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन देने का ऐलान किया था। मोदी सरकार ने 28 महीने पहले ही 3 अगस्त, 2018 को इस लक्ष्य को हासिल कर दिखा दिया है कि वह योजनाओं को धरातल पर पहुंचाने के लिए कितनी सजग और संवेदनशील है।

पीएम मोदी ने 1 मई 2016 को शुरू की थी उज्ज्वला स्कीम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के बलिया से 1 मई, 2016 को इस स्कीम की शुरुआत की थी। इसके तहत गरीब महिलाओं को एक रसोई गैस सिलेंडर, चूल्हा और रेगुलेटर निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। सरकार ने प्रत्येक ग्राहक के लिए 1600 रुपये का प्रावधान इस स्कीम के तहत किया है। मोदी सरकार ने इसके लिए 8,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। देश के 715 जिलों में चलायी गई इस स्कीम का लक्ष्य सरकार ने केवल 28 महीने में प्राप्त कर लिया है। स्कीम के तहत प्रत्येक ग्राहक को बिना दाम गैस कनेक्शन दिया जाता है और इसकी भरपाई ब्याज मुक्त लोन के जरिए की जाती है। लेकिन ग्राहक को इसके लिए कोई भुगतान नहीं करना होता है। सरकार इसकी भरपाई ग्राहक को दिये जाने वाले सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी से करती है।

गरीबों को पक्के मकान
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 2019 तक एक करोड़ गरीबों को पक्के मकान देने की तैयारी है। जबकि शहरों में 2022 तक दो करोड़ गरीबों को पक्का घर बना के दिया जाना है। प्रधानमंत्री मोदी की इस महत्त्वाकांक्षी योजना को युद्धस्तर पर क्रियान्वित किया जा रहा है। इसके लिये सरकार युद्धस्तर पर जुट गई है। जाहिर है कि प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में मूल रूप से दलित, पिछड़े और आदिवासियों को ही इसका फायदा मिलेगा। 

खुले में शौच से मुक्ति
खुले में शौच करने वालों में ज्यादातर गरीब और खासकर दलित व आदिवासी रहे हैं जिनके पास अपना शौचालय नहीं था। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण इलाकों में 20 जुलाई, 2017 तक 4,39,21,270 घरों में शौचालय बनाए जा चुके थे। 2,06,441 गांवों को खुले में शौच से मुक्ति मिल चुकी है। 5 राज्य और 149 जिलों को खुले में शौच से मुक्ति मिल चुकी है। जबकि शहरों में 26,64,540 घरों में और 1,29,808 सामुदायिक और जन-शौचालय बनाये जा चुके हैं। इस अभियान में 2019 तक यानी महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तक भारत को स्वच्छ बनाने का लक्ष्‍य किया गया है।

गांवों में दूर हुआ अंधेरा
मोदी सरकार ने आते ही यह पता लगाया कि 18, 452 गांवों में आजादी के बाद से अब तक बिजली नहीं पहुंची है। 1 मई, 2018 तक हर गांव में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। इस पर 75, 600 करोड़ रुपये खर्च करना तय हुआ। बीते तीन सालों में 20 जुलाई, 2017 तक 13, 990 से ज्यादा गांवों में बिजली पहुंचा दी गयी है। दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत देश के 5, 97, 464 गांवों में से 594,006 गांवों में बिजली पहुंचा दी गयी है। ये संख्या भारत के कुल गांवों का 99.4 प्रतिशत है। दलित-आदिवासी और पिछड़े जो अब तक अंधेरे में रहने को मजबूर थे, उन्हें रोशनी मिल गयी है। ये लोकप्रियता के लिये नहीं हो रहा है, ये गरीबों के कल्याण के लिये है।

सबसे पिछड़े जिलों के उत्थान की सोच
पिछड़ों और गरीबों के कल्याण के लिये मोदी सरकार कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी से लगता है कि सरकार ने सबसे पहले देश के सबसे पिछड़े 100 जिलों में ही पहले विकास की योजना बनाई है। इस योजना पर नीति आयोग बाकी संबंधित मंत्रालयों के सहयोग से काम करेगा। ये बात किसी से छिपी नहीं कि सबसे पिछड़े जिलों का मतलब क्या है? ये वो जिले होते हैं जहां आम तौर पर दलित और आदिवासियों की तादाद अधिक होती है। यानी मोदी सरकार की नजर जरूरतमंदों के उत्थान पर है, अपनी लोकप्रियता पर नहीं।

ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर
दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया करवाया जा रहा है। इसके तहत 18 साल से 35 साल के ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर दिए जाने के लिए कौशल प्रशिक्षण का इंतजाम किया गया है। इस योजना के तहत इस साल 30 जून तक 655 केंद्रों में 329 ट्रेड के लिये 38,057 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, इनमें से 24,103 युवाओं को रोजगार भी मिल चुका है। वहीं पिछले साल कुल 84,900 युवाओं को प्रशिक्षण मिलने के बाद रोजगार प्राप्त हो गया था।

स्टैंड अप इंडिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कदम से देशभर में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये से 100 लाख रुपये तक की सीमा में ऋणों के लिए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति और महिलाओं के बीच उद्यमशीलता को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। हर बैंक को कहा गया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि दलित, पिछड़े और महिलाओ को खोज कर इस स्कीम से उन्हें जोड़ें। 20 जुलाई, 2017 तक इस स्कीम के तहत 26,542 आवेदनों के लिये 4,369 करोड़ रुपये जारी किये जा चुके हैं।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना
गरीबी के खिलाफ लड़ाई और बेहतर रोजगार अवसर के लिए युवाओं को कुशल बनाने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई। जनजातीय कार्य मंत्रालय जनजातीय लोगों की जरूरतों और आवश्‍यकताओं के अनुरूप ढांचा तैयार करने के लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। 163 प्राथमिकता वाले जिलों (जनजातीय बहुल) में से प्रत्‍येक में एक बहु-कौशल संस्‍थान की स्‍थापना की योजना बनाई गई है। इसके तहत अबतक 398,164 को कम समय का प्रशिक्षण देकर रोजगार का अवसर उपलब्ध कराया गया है।

अटल पेंशन योजना
सरकार की यह एक और अहम योजना है। इससे किसी भी नागरिक को बीमारी, दुर्घटना या वृद्धावस्था में अभाव की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। इस योजना का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के 18 से 40 साल के लोगों को पेंशन फायदों के दायरे में लाना है। इससे उन्हें हर महीने न्यूनतम भागीदारी के साथ सामाजिक सुरक्षा का लाभ उठाने की अनुमति मिलेगी। इस योजना के तहत अबतक 50.88 लाख लोगों का पंजीकरण हो चुका है।

प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति बीमा योजना
यह सरकार के सहयोग से चलने वाली जीवन बीमा योजना है। इसमें 18 साल से 50 साल तक के भारतीय नागरिक को 2 लाख रुपये का बीमा कवर सिर्फ 330 रुपये के सलाना प्रीमियम पर उपलब्‍ध है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
इसके तहत किसान अपनी फसल का बीमा करवा सकते हैं। यदि मौसम के प्रकोप से या किसी अन्‍य कारण से फसल को नुकसान पहुंचता है तो यह योजना किसानों की मदद करती है। 2016 में खरीफ की फसल  के लिये 390.02 लाख किसानों का बीमा कराया गया, जबकि 2016-17 में रबी की फसल के लिये 167.14 लाख किसानों का कम प्रीमियम में बीमा किया गया।

मिट्टी की सेहत के लिए सॉइल हेल्थ कार्ड
किस जमीन पर कौन सी फसल होगी, किस जमीन की उर्वरा शक्ति कैसी है इसकी जानकारी किसान को उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने सॉइल हेल्थ कार्ड शुरू किया। मोदी सरकार ने फसलों के अनुसार इस योजना शुरुआत की है। इसकी मदद से किसानों को पता चल जाता है कि उन्हें किस फसल के लिए कितना और किस क्वालिटी का खाद उपयोग करना है। फसल की उपज पर इसका सकारात्मक असर पड़ा है। अभी तक 6.5 करोड़ किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिये जा चुके हैं।

हर खेत में पानी
प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना के तहत सरकार का लक्ष्य देश के हर खेत तक पानी पहुंचाना। इसमें पांच सालों (2015-16 से 2019-20) के लिए 50 हजार करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है।

किसानों के लिए ऋण सुविधा बढ़ी
खेती के लिए ऋण लेने की सुविधा बढ़ायी गयी है। अब 10 लाख करोड़ ऋण किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ-साथ जिन राज्यों में किसानों की आर्थिक स्थिति खराब है और ऋण लौटाने में दिक्कत हो रही है वहां स्थानीय सरकार से बातचीत कर रास्ता निकालने की कोशिश बढ़ी है। यूपी जैसे राज्यों ने किसानों के लिए बड़े पैमाने पर ऋण माफ कर दिया है।

2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके तहत नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने, फसल चक्र में परिवर्तन करने और कम लागत में खेती की जाए की जानकारी किसानों को दी जा रही है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी की जाए। इस संकल्प के साथ कई आधारभूत योजनाओं को जमीन पर उतारा गया है जो खेती-किसानी में सहायक सिद्ध हो रहा है।

नीम से बदली लाखों महिलाओं की तकदीर
एक समय था जब गुजरात ने ऑपरेशन फ्लड के माध्यम से देश को एक नई राह दिखाई और पूरे भारत में दूध के उत्पादन में क्रांति आ गई। दशकों बाद उसी गुजरात से आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए यूरिया पर नीम का लेप चढ़ाने का विजन दिया। उनका ये विजन भारतीय कृषि के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है। इससे यूरिया पर सब्सिडी के जरिये होने वाला भ्रष्टाचार तो रुका ही है लाखों गरीब महिलाओं की किस्मत चमक गई है। उदाहरण के तौर पर सिर्फ नीम के बीज इकट्ठा करने के लिये गुजरात के 4 हजार से अधिक गांव में लगभग 25 करोड़ रुपये की आय का नया श्रोत निकल आया है। इसका फायदा सीधे तौर पर वहां की करीब 2.25 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा है।

मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम का विस्‍तार

एक कुपोषित महिला अधिकांश तौर पर कम वजन वाले बच्‍चे को जन्‍म देती है। उन्हीं की मदद के लिये ये योजना शुरू की गई है। इस योजना के अंतर्गत गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को पहले दो जीवित शिशुओं के जन्‍म के लिए तीन किस्‍तों में 6000 रुपये का नकद प्रोत्‍साहन दिया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 दिसम्‍बर, 2016 को राष्‍ट्र को दिये गये अपने संबोधन में सभी जिलों में मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम के अखिल भारतीय विस्‍तार की घोषणा की थी और यह 1 जनवरी 2017 से लागू है। इससे करीब 51.70 लाख लाभार्थियों को प्रतिवर्ष लाभ मिलने की उम्‍मीद है।

मिशन इंद्रधनुष
इस योजना का उद्देश्‍य बच्‍चों में रोग-प्रतिरक्षण की प्रक्रिया को तेज गति देना है। इसमें 2020 तक बच्‍चों को सात बीमारियों- डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, पोलियो, टीबी, खसरा और हेपेटाइटिस बी से लड़ने के लिए वैक्‍सनेशन की व्‍यवस्‍था की गई है। इस योजना के तहत अबतक 2.8 करोड़ बच्चों और 55.4 करोड़ गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण कराया जा चुका है।

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