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प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने बदली ग्रामीण भारत की तस्वीर, बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े करोड़ों लोग

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने चार वर्षों में कई ऐसी योजनाएं चलाई हैं, जो लोगों का जीवन बदलने में क्रांतिकारी साबित हुई है। इन्हीं योजनाओं में से एक है प्रधानमंत्री जन-धन योजना। इस योजना के तहत प्रधानमंत्री मोदी ने आजादी के इतने वर्षों बाद भी बैंकिंग व्यवस्था से दूर रहने वाले गरीबों, वंचितों, ग्रामीणों को आर्थिक स्वतंत्रता देने का फैसला किया। इस योजना के तहत जीरो बैलेंस पर बैंक में खाता खोला जाता है।

31 करोड़ से अधिक जन-धन खाते खुले
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जन धन योजना के तहत चार वर्षों में 31 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं। 18 मई, 2018 तक देशभर में 31.60 करोड़ जन-धन खाते खोले जा चुके हैं और इन खातों में 81,203 करोड़ रुपयों से अधिक रकम जमा है। सबसे बड़ी बात यह है कि 59 फीसदी खाते यानि करीब 18.60 करोड़ खाते ग्रामीण इलाकों की बैंक शाखाओं में खोले गए हैं।

आधे से अधिक खाते महिलाओं के नाम पर
जन-धन योजना सिर्फ गरीबों, वंचितों की आर्थिक प्रगति और स्वावलंबन को बढ़ाने में कारगर सिद्ध नहीं हुई है, वरन महिलाओं के आर्थिक विकास के लिए भी क्रांतिकारी साबित हुई है। जन-जन योजना के तहत जितने भी खाते खोले गए हैं, उनमें आधे से अधिक खाते महिलाओं ने खुलवाए हैं। इसका मतलब है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान बैंक खाते के मालिकाना हक में पुरुष और महिला का अंतर बहुत कम हो गया है।

विश्व बैंक के आंकड़े दर्शाते हैं कि वर्ष 2014 में पुरुषों के पास महिलाओं की तुलना में 20 फीसदी ज्यादा खाते थे, लेकिन वर्ष 2017 तक यह अंतर घटकर महज 6 फीसदी हो गया है। महिला-पुरुष के खातों के बीच के इस अंतर को प्रधानमंत्री जन-धन योजना से ही कम किया गया है। विश्व बैंक की हाल की ग्लोबल फिनडेक्स रिपोर्ट, 2017 के मुताबिक सबसे गरीब 40 फीसदी परिवारों की महिलाओं और वयस्कों के बैंक खातों में 30 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। यह इस बात का संकेत है कि अमीरों और गरीबों के बीच खातों के स्वामित्व के लिहाज से खाई कम हो रही है।

वर्ल्ड बैंक ने की प्रधानमंत्री जन-धन योजना की प्रशंसा
वर्ल्ड बैंक ने भी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जन-धन योजना की तारीफ की थी। 19 अप्रैल, 2018 को जारी वर्ल्ड बैंक की Global Findex की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 2014  तक सिर्फ 53 प्रतिशत भारतीयों के पास बैंक खाते थे जबकि 2017 तक 80 प्रतिशत भारतीयों के पास बैंक खाते हो चुके थे। यानि देश में हर पांच में से चार लोगों के पास बैंक खाता है। जाहिर है कि 2014 में ही मोदी सरकार सत्ता में आई थी जिसके बाद यह तेजी आई है।

Global Findex के आंकड़ों से जुड़ी इस रिपोर्ट में प्रधानमंत्री जन धन योजना की सफलता का विशेष उल्लेख भी किया गया है जिसकी शुरुआत व्यापक स्तर पर जनसामान्य को औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने के लिए की गई। मार्च 2018 तक जन धन योजना के अंतर्गत खोले गए खातों की संख्या 31.44 करोड़ तक जा पहुंची जो संख्या साल भर पहले 28.17 करोड़ थी। बैंकों के करेंट और सेविंग अकाउंट्स को जोड़ें तो मार्च 2017 में इनकी कुल संख्या 157.1 करोड़ थी, जो दो साल पहले 122.3 करोड़ थी।

दुनिया में बैंक खातों की संख्या में भारत का बड़ा योगदान
दुनिया भर में बैंक खातों की संख्या में हुई बढ़ोतरी में जन धन योजना का योगदान सबसे बड़ा है। 2014 से 2017 के बीच विश्व भर में करीब 51.4 करोड़ बैंक खाते खुले। इस अवधि में भारत में जन धन के तहत खुले बैंक खातों का इसमें करीब 55% योगदान है। खास बात यह भी है कि जन-धन के खाते खोलने में महिलाओ की हिस्सेदारी बड़ी है।   

डिजिटल लेनदेन में हो रही तेज बढ़ोतरी
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कैश की जगह बैंक अकाउंट के जरिए लेनदेन में काफी बढ़ोतरी हुई है। लेनदेन में आया यह एक ऐसा व्यावहारिक बदलाव है जिससे सरकार का कर राजस्व बढ़ सकता है। आने वाले समय में मजदूरी, कृषि उत्पाद और जनोपयोगी सेवाओं के लिए भी डिजिटल भुगतान का तरीका निकाला जा सकता है।

वर्ल्ड बैंक ने ‘आधार’ पर बल देने के कदम को सराहा
वर्ल्ड बैंक के Global Findex database 2017 के मुताबिक भारत में वित्तीय सेवाओं तक महिलाओं की पहुंच में बड़ी तेजी आई है। ऐसा आधार कार्ड पर सरकार के जोर देने से संभव हुआ है क्योंकि इसके जरिए खाताधारियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी आई है।  देश में आज करीब 83% पुरुष और 77% महिलाओं के पास बैंक खाते हैं। यानि आधार के जरिए बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच के मामले में ना सिर्फ अमीर और गरीब का फर्क कम हुआ है बल्कि जेंडर गैप भी बेहद कम हुआ है। गौर करने वाली बात है कि तीन साल पहले बैंक खाता रखने वाले पुरुषों और महिलाओं की संख्या में 20 अंकों का अंतर था जो अब मात्र छह रह गया है।

सिर्फ प्रधानमंत्री जन-धन योजना ही नहीं, मोदी सरकार ने कई ऐसी योजनाएं शुरू की हैं और कदम उठाए हैं, जिनसे देश में आम लोगों की जिंदगी आसान हुई है। एक नजर डालते हैं मोदी सरकार के ऐसे कदमों पर, जो आम भारतीयों का जीवन आसान बनाने में कारगर साबित हो रही है। 

डीबीटी से रुका भ्रष्टाचार
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी योजना का दायरा बढ़ाया। मोदी सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, खाद्य सब्सिडी, फर्टिलाइजर सब्सिडी समेत कई सरकारी योजनाओं के तहत लोगों को मिलने वाली आर्थिक मदद को अब सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता है। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है और करोड़ों फर्जी लाभार्थी गायब हो गए हैं। पहले सिर्फ 28 योजनाएं डीबीटी से जुड़ी थीं, अब 433 सरकारी योजनाएं डीबीटी से जुड़ी हैं। मार्च, 2018 में केंद्र सरकार ने डीबीटी के जरिए रिकॉर्ड 83,000 करोड़ रुपये बचाए हैं।

मुफ्त गैस कनेक्शन
मोदी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र खासकर महिलाओं की जिंदगी बदलने वाली प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना लॉन्च की। इस योजना के तहत केंद्र सरकार ग्रमीण परिवारों को मुफ्त में एलपीजी कनेक्शन और गैस का चूल्हा उपलब्ध कराती है। सरकार अब तक 3,95,77,000 मुफ्त एलपीजी कनेक्श दे चुकी है। सरकार ने इस योजना के तहत 2020 तक 8 करोड़ मुफ्त गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पहले यह लक्ष्य 2019 तक 5 करोड़ गैस कनेक्शन देने का था।

मुफ्त बिजली कनेक्शन
देश के 4 करोड़ घरों आज भी बिजली का कनेक्शन नहीं है। मोदी सरकार ने सौभाग्य योजना के तहत अंधेरे में रहने को मजबूर 4 करोड़ परिवारों को 31 मार्च, 2019 तक मुफ्त बिजली कनेक्शन देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब तक 58,56,584 घरों में बिजली कनेक्शन दिया जा चुका है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए जोरशोर से काम चल रहा है। इतना ही नहीं मोदी सरकार ने 18000 गांवों में बिजली पहुंचाने का भी काम किया है और अब देश का एक भी गांव बिना बिजली का नहीं है।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना
युवाओं में स्वरोजगार बढ़ाने के लिए मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना शुरू की थी। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में यह योजना क्रांतिकारी साबित हुई है। इस योजना के तहत 12,78,08,464 लाभार्थियों को 5,93,841करोड़ रुपये का ऋण दिया जा चुका है। सबसे खास बात यह है कि मुद्रा योजना के तहत लाभ पाने वालों में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं। यानी इस योजना के माध्यम से 8 करोड़ से अधिक महिलाओं ने अपना उद्यम शुरू किया है।

स्वच्छ भारत मिशन
स्वच्छ भारत मिशन के तहत मोदी सरकार ने देशभर में स्वच्छता के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ाई है। प्रधानमंत्री मोदी ने जब देश की बागड़ोर संभाली थी तब देश में ग्रामीण स्वच्छता का दायरा करीब 40 फीसदी था, जो अब बढ़कर 80 प्रतिशत से अधिक हो गया है। 2 अक्टूबर, 2014 के बाद से अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में 7,21,62,000 से अधिक शौचालयों को निर्माण हो चुका है। इतना ही नहीं 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है। देश में अब तक कुल 385 जिलों और 3,61,693 गांवों को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है।

नीम कोटेड यूरिया
खेती के लिए यूरिया आवश्यक है, लेकिन पहले यूरिया की कालाबाजी होती थी इससे किसानों को समय पर यूरिया नहीं मिल पाती थी और उन्होंने इसके लिए भारी परेशानी होती थी। मोदी सरकार ने नीम कोटेड यूरिया लाने का फैसला किया। इस फैसले ने किसानों की सबसे बड़ी परेशानी को खत्म कर दिया है। अब नीम कोटेड यूरिया की कालाबाजारी नहीं हो सकती है, साथ ही इसकी सब्सिडी की रकम भी सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है।

एमएसपी को डेढ़ गुना किया
मोदी सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में काम कर रही है। इसी के मद्देनजर मोदी सरकार ने एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य को डेढ़ गुना करने का फैसला लिया है। इसके तहत किसानों को फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य उपलब्ध कराया जा रहा है। इस फैसले से देशभर के करोड़ों किसान लाभान्वित हो रहे हैं।

मैटर्निटी लीव बढ़ाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कामकाजी महिलाओं को बढ़ी राहत दी है। सरकार ने मैटर्निटी लीव को 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दिया। इतना ही नहीं 50 से अधिक कर्मचारियों वाले दफ्तर में कैच रखना भी अनिवार्य किया गया है, ताकि महिला कर्मचारी अपने बच्चों को साथ में रख सकें।

बेकार के कानून खत्म किए
मोदी सरकार ने एक और बहुत बड़ा काम किया है, वह बेकार के कानूनों को खत्म करना। मोदी सरकार ने कुल 1827 ऐसे कानूनों की पहचान की है, जिनका आज के माहौल में कोई मतलब नहीं है। सबसे बड़ी बात है कि केंद्र सरकार 1175 ऐसे कानूनों को खत्म कर चुकी है और बाकी कानूनों को भी खत्म करने की प्रक्रिया चल रही है।

स्वप्रमाणित सर्टिफिकेट
मोदी सरकार ने सरकारी नौकरियों या शिक्षण संस्थाओं में एडमीशन के वक्त किसी गैजटेड अधिकारी से सत्यापित प्रमाणपत्रों के नियम को खत्म किया। सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने स्वप्रमाणित यानी सेल्फ अटेस्टेड सर्टिफिकेट को मान्यता देने का नियम बनाया। केंद्र सरकार के इस फैसले से युवाओं और छात्रों की बहुत बड़ी परेशानी खत्म हो गई।

ग्रुप सी और ग्रुप डी में इंटरव्यू खत्म किया
मोदी सरकार ने ग्रुप सी और ग्रुप डी की नौकरियों में साक्षात्कार की बाध्यता को खत्म करने का ऐतिहासिक फैसला किया। इस निर्णय के बाद ग्रुप सी और ग्रुप डी की सरकारी नौकरियों में सिर्फ लिखित परीक्षा के आधार पर अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया और इंटरव्यू के दौरान भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी खत्म हो गईं।

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