Home तीन साल बेमिसाल विकास को रफ्तार दे रहा शहरी विकास मंत्रालय

विकास को रफ्तार दे रहा शहरी विकास मंत्रालय

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”शहरीकरण पर 25-30 साल पहले भी काम हो सकता था। शहरीकरण को एक अवसर के रूप में अगर काम किया गया होता तो आज स्थिति कुछ और होती। लेकिन पुराने अनुभवों के आधार पर निराश होकर बैठने की जरूरत नहीं है। हम सही रास्ते पर हैं और किसी तरह की कानूनी या आर्थिक समस्या पेश आई तो उसे हल कर लिया जाएगा।”
– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

देश में आर्थिक विकास की ज्यादातर गतिविधियां शहरों में होती हैं। हमारे सकल घरेलू उत्पाद का 60 प्रतिशत से अधिक शहरी क्षेत्र से आता है और अनुमान है कि अगले 15 वर्ष में यह बढ़कर 70 प्रतिशत हो जाएगा। जिस अनुपात में आर्थिक गतिविधियां बढ़ रहीं हैं उसी अनुपात में ग्रामीण आबादी का भी जोर शहरों में बसने की भी है। इस स्थिति में ये अनुमान है कि 2050 शहरों में रहने वाले लोगों की संख्या गांवों में रहने वालों से अधिक होगी। इसी को ध्यान में रखकर पिछले तीन साल में मोदी सरकार ने कई अभूतपूर्व कार्य किए हैं। 

बढ़ता शहरीकरण, बढ़ती चुनौतियां
स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत के शहरों में 17% लोग ही रहते थे, लेकिन 2011 में ये आंकड़ा 31% तक पहुंच गया। एक अनुमान के मुताबिक 2030 तक देश के 40% लोग शहरों में रहने लगेंगे। इसलिए तेजी से बढ़ता शहरीकरण एक बड़ी आबादी के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए गंभीर चुनौती है। ऐसे में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार एकीकृत विजन और मिशन के साथ कार्य कर रही है जिससे आने वाली चुनौतियों से पार पाया जा सके।

एकीकृत विजन और मिशन पर जोर
शहरों में रहने वाले लोगों को बेहतर जीवन जीने के लिए, शिक्षा, रोजगार और मनोरंजन के अच्छे अवसरों की तलाश रहती है। लेकिन पहले की सरकारों ने शहरों का विकास टुकड़ों में किया। उनके पास एकीकृत विजन और मिशन का अभाव था जिसके कारण आज शहरों में रह रहे लोगों के जीने का अनुभव अच्छा नहीं है। लेकिन एकीकृत, सुनियोजित और दूरदर्शी योजनाओं के माध्यम से शहरों का पुनरूद्धार हो सकता है। इसीलिए मई, 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार गठन के बाद से ही इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया गया।


एक्शन में शहरी विकास मंत्रालय
शहरों और कस्बों के समेकित विकास के उद्देश्य के साथ शहरी विकास मंत्रालय आगे बढ़ रहा है। एक के बाद एक ऐसी योजनाएं और नीति बनाई जा रही हैं जो शहरों में कठिन जीवन को सुगम बनाएगा। इसी उद्देश्य के तहत सरकार गठन के दो महीने के भीतर ही जुलाई, 2014 में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का एक सम्मेलन किया गया। दो दिनों तक विचार विमर्श करने के बाद शहरी शासन और सुधारों पर एक राष्ट्रीय घोषणा पत्र अपनाया गया। इससे देश में शहरी नवचेतना के प्रति नई सोच और रूख की नींव रखी गई।

टीम इंडिया की तरह काम करने की कवायद
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक क्रांतिकारी पहल करते हुए शहरों और कस्बों में संसाधनों के आवंटन के लिए मानदंडों को आधार बनाया गया, जिसमें केन्द्र सरकार के पास किसी भी प्रकार के अधिकार की गुंजाइश नहीं है। शहरी विकास विकास परियोजनाओं को अलग-अलग समय पर लागू करने के तरीके को समाप्त करते हुये नई परियोजनाओं को तैयार करने और उनके कार्यान्वयन के लिये केंद्र और राज्य सरकारों की सभी योजनाओं को एक साथ सम्मिलित करने का नया नियम बनाया गया है, ताकि एक ही कार्य दोबार न हो और संसाधनों के नुकसान को बचाया जा सके।

नए शहरी मिशन

  • 2 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की ।
  • 21 जनवरी, 2015 को धरोहर विकास एवं संवर्धन योजना (हृदय) का शुभारंभ किया गया।
  • 25 जून, 2015 को अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) की शुरुआत की गई।
  • 25 जून, 2016 को स्मार्ट सिटी मिशन का शुभारंभ किया गया।
  • 2022 तक सबके लिए घर योजना पर कार्य आरंभ।

योजनाएं लागू करने से पहले गहन विमर्श
नई योजनाओं को शुरू करने का फैसला करने के बाद राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और 500 शहरी स्थानीय निकायों के साथ राष्ट्रीय और क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें नई पहलों की डिजाइन और कार्यान्वयन के लिए दिशा निर्देश के बारे में विस्तृत विचार विमर्श किया गया।

प्रगति रिपोर्ट पर नजर
केंद्र सरकार की इन योजनाओं के सही क्रियान्वयन के लिए शहरी विकास मंत्री वेकैया नायडू हर हफ्ते किसी न किसी राज्य का दौरा करके इन योजनाओं की गति और स्थिति पर नजर रख रहे हैं।

समेकित विकास पर बल
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों की जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए शहरी क्षेत्रों में विकास योजनाएं तैयार करने में उन्होंने ‘नीचे से ऊपर’ के दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया। योजनाओं को एक साथ ही लागू करने के इस सिद्धांत के महत्व को स्थापित करने के लिए ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 जून, 2015 को एक ही दिन में अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन, स्मार्ट सिटी मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का शुभारंभ किया।

अटल नवीनीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत )
प्रधानमंत्री‬ ‪अमृत‬ ‎योजना‬ का पूरा नाम ‘अटल नवीनीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन’ यानी (AMRUT- ATAL MISSION FOR REJUVENATION AND URBAN TRANSFORMATION) है। इसमें 500 शहरों में जल आपूर्ति, सीवरेज नेटवर्क सेवाओं, पानी की नालियों, गैर मोटर चालित परिवहन पर बल देते हुए शहरी परिवहन से संबंधित आधारभूत बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है और इसके अंतर्गत हरित तथा सार्वजनिक स्थलों का प्रावधान भी है। ‬

50 हजार करोड़ की सहायता
केंद्र प्रायोजित इस मिशन के तहत प्रत्येक राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में वैधानिक शहरों तथा कस्बों एवं शहरी आबादी की संख्या के आधार पर राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों को 2019 तक 50,000 करोड़ की कुल केन्द्रीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

• अब तक सभी राज्यों की राजधानियों और पर्यटन तथा आर्थिक महत्व, पहाड़ी इलाकों और मुख्य नदी के नजदीक बसे शहरों के अलावा एक लाख से अधिक की आबादी वाले 497 शहरों और कस्बों को जून, 2015 में शुरू किये गये इस मिशन में शामिल किया गया है।

• लगभग 8 करोड़ शहरी परिवारों के एक तिहाई से अधिक को मिशन अवधि के दौरान जल आपूर्ति सुविधा उपलब्ध हो रही है।

• इनमें से अधिकतर को जल निकासी तथा शहरी परिवहन परियोजनाओं के लाभ के अतिरिक्त सीवरेज कनेक्शन भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

• सभी मिशन शहरों में हरित स्थान और पार्क भी होंगे।

• प्रत्येक मिशन शहर में 2015-16 के दौरान मंजूर किए गए कुल निवेश में से 13,324 करोड़ रुपये जल आपूर्ति के लिए, 6,360 करोड़ रुपये सीवरेज परियोजनाओं के लिए, 424 करोड़ रुपये जल निकासी के लिए, 322 करोड़ रुपये शहरी परिवहन के लिए और 453 करोड़ रुपये हरित स्थानों तथा पार्कों के लिए दिए गए।

• अब तक मोदी सरकार 56,727 करोड़ रुपये के योजनाओं की मंजूरी दे चुकी है जिसमें लगभग 22 हजार करोड़ रुपये केन्द्र ने सहायता के रूप में दी है।

अमृत से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें –

  • कस्बों का कायाकल्प करने वाली इस परियोजना का हर क्षेत्र में नियमित रूप से ऑडिट किया जाता है।
  • बिजली का बिल, पानी का बिल, हाउस टैक्स, आदि सभी सुविधाएं ई-गवर्नेन्स के माध्यम से सुनिश्च‍ित की जा रही है। 
  • जो राज्य बेहतर ढंग से इस परियोजना को आगे बढ़ायेंगे उनके लिये बजट में 10 प्रतिशत तक का अवंटन किया जाएगा।
  • यह उसी कस्बे में लागू होती है, जहां की जनसंख्या एक लाख से ज्यादा है।
  • उन छोटे शहरों में लागू होती है, जहां से छोटी-छोटी नदियां गुजरती हैं।
  • उन पहाड़ी इलाकों और द्वीपों पर लागू होती है, जहां पर्यटन का स्कोप ज्यादा है।
  • जिन राज्यों की सरकारें इसे अच्छे ढंग से आगे बढ़ाएंगी उनके लिये बजट आवंटन भी बढ़ा दिया जायेगा।
  • अमृत के अंतर्गत वो परियोजनाएं भी आएंगी, जो जेएनएनयूआरएम के अंतर्गत अधूरी रह गईं।
  • अमृत के अंतर्गत जेएनएनयूआरएम की अधूरी परियोजनाओं को 2017 तक पूरा किया जायेगा।

अमृत में शामिल शहर और कस्बे —
• अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह-1, आंध्र प्रदेश-33, अरुणाचल प्रदेश-1, असम-4, बिहार-27, चंडीगढ़-1, छत्तीसगढ़-9, दादर एवं नगर हवेली-1, दमन और दीव-1, दिल्ली-4, गोवा-1, गुजरात-31, हरियाणा-20, हिमाचल प्रदेश-2, जम्मू और कश्मीर-4, झारखंड-7, कर्नाटक-27, केरल-9, लक्षद्वीप-1, मध्य प्रदेश-34, महाराष्ट्र-44, मणिपुर-1, मेघालय-1, मिजोरम-1, नगालैंड-2, ओडिशा-9, पुदुचेरी-2, पंजाब-16, राजस्थान-29, सिक्किम-1, तमिलनाडु-32, तेलंगाना-12, त्रिपुरा-1, उत्तर प्रदेश-61, उत्तराखंड-7 और पश्चिम बंगाल-61

धरोहर विकास एवं संवर्धन योजना (हृदय)
हृदय यानी (HRIDAY- Heritage City Development and Augmentation Yojana) का उद्देश्य समावेशी तरीके से शहरी नियोजन, आर्थिक विकास और विरासत के संरक्षण करना है। इस योजना के तहत इन शहरों को एक साथ लाकर प्रत्येक शहर की अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना है।
• 21 जनवरी, 2015 को शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य 500 करोड़ रुपये की कुल आवंटित राशि से नागरिक सुविधाओं के विकास के जरिए देश के विरासत शहरों की आत्मा और अद्वितीय चरित्र को संरक्षित और पुनर्जीवित करना है। इसका कार्यान्वयन मार्च, 2017 तक पूरा हो जाएगा।
• कुल 500 करोड़ रुपये लागत के साथ यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में कार्यान्वित की जा रही है। इसका खर्च भारत सरकार उठा रही है।

2014 में 12 शहरों को चिन्हित किया गया –
• 40.04 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ अजमेर, आंध्र प्रदेश में अमरावती (22.26 करोड़ रुपये), अमृतसर (69.31 करोड़ रुपये) , कर्नाटक में बदामी (22.26 करोड़ रुपये), गुजरात में द्वारका ( 22.26 करोड़ रुपये), गया (40.04 करोड़ रुपये), तमिलनाडु में कांचीपुरम (23.04 करोड़ रुपये), मथुरा (40.04 करोड़ रुपये), पुरी (22.54 करोड़ रुपये), वाराणसी (89.31 करोड़ रुपये), तमिलनाडु में वेलांकिनी (22.26 करोड़ रुपये) और तेलंगाना में वारंगल ( 40.54 करोड़ रुपये) ।

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स्मार्ट सिटी मिशन
स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य मौजूदा शहरों में उन्नयन के जरिए 100 स्मार्ट शहर विकसित करना और नये शहर निर्मित करना है । केंद्र प्रायोजित इस योजना को 2019 तक राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों को 48,000 करोड़ रुपया दिया जाएगा।

स्मार्ट सिटी को महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा और सतत तथा स्वच्छ पर्यावरण एवं स्मार्ट समाधान आधारित प्रौद्योगिकी सुनिश्चित कर बेहतर जीवन जीने के लिए शहर के रूप में विकसित किया जाएगा।

• 60 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने की परियोजना पर काम हो रहा है।
• इस कुल 7 करोड़ 22 लाख 66 हजार 232 लोग जो शहरों में रहते हैं उनको लाभ मिलेगा।
• इस पूरी परियोजना पर 1 लाख 31 हजार 762 करोड़ रुपये का खर्च है।
• इनमें से कुछ शहरों में प्रस्तावित निवेश इस प्रकार है।

शहर में प्रस्तावित निवेश (करोड़ रुपये में )
भुवनेश्वर-4,537, पुणे-2,960, जयपुर-2,340, सूरत-2,597, कोच्चि-2.076, अहमदाबाद- 2,290, जबलपुर-3,998, विशाखापट्टनम -1,743, सोलापुर-2,247, दावणगेरे-2,283, इंदौर-4,857,नई दिल्ली (एनडीएमसी)-1,897, कोयम्बटूर- 1,570, काकीनाडा-1,993, बेलगावी -3,534, उदयपुर-1,526, गुवाहाटी -2,256, चेन्नई-1,366, लुधियाना-1.049, अगरतला-1,988, आगरा-2133, अहमदाबाद-2,290, अजमेर-1,170, अमृतसर-3,431, लखनऊ-2053, वाराणसी-2,270.


स्वच्छ भारत मिशन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को देश भर में एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की। श्री मोदी ने इस मौके पर कहा कि 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर भारत उन्हें स्वच्छ भारत के रूप में सर्वश्रेष्ठ श्रद्धांजलि दे सकता है।

स्वच्छ भारत मिशन के अहम बिंदु-
• शहरी क्षेत्रों में 1.04 करोड़ घरेलू शौचालय और 2.58 लाख सामुदायिक एवं सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण का लक्ष्य।
• देश के नागरिकों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने का संकल्प।
• 100 प्रतिशत कूड़ा घर-घर से इकट्ठा करना, परिवहन और नगरपालिका ठोस अपशिष्ट का प्रसंस्करण सुनिश्चित किया जाना।
• शहरी क्षेत्रों के लिए इस मिशन के लिए अनुमानित लागत 62,009 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार की भागीदारी 14,643 करोड़ रुपये की है।

अभियान की उपलब्धियां-

  • मार्च 2017 तक 31 लाख 14 हजार 249 परिवारों में शौचालय बनवाए जा चुके हैं।
  • 1 लाख 15 हजार 785 सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण हो चुका है।
  • मार्च 2017 तक 19,431 स्वच्छग्राहियों को जोड़ा जा चुका है, जो स्वच्छता के प्रति चेतना उत्पन्न करने का काम करते हैं।
  • मार्च 2017 तक देश के कुल 79,515 शहरी वार्डों में 42 हजार 948 वार्डों में घर-घर जाकर कूड़ा एकत्रित करने की व्यवस्था की जा चुकी है।
  • मार्च 2017 तक देश के 531 शहरों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है।
  • मार्च 2017 तक कूड़े-कचरे से 88.4 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है।
  • सितम्बर 2016 तक पूरे देश में 1 लाख 64 हजार 892 मिट्रिक टन कूड़े-कचरे से कम्पोस्ट खाद बनायी गई थी।

शहरी मेट्रो परियोजनाएं
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के मार्गदर्शन में देश में कई मेट्रो परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। कई परियोजनाओं में राज्य सरकारें अपना योगदान भी कर रही हैं।
• केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6,928 करोड़ रुपये लागत की सीसीएस हवाई अड्डा से मुंशी पुलिया (उत्तर-दक्षिण गलियारा) के बीच 22.878 किलोमीटर लंबी लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना चरण-1ए को मंजूरी।
• लखनऊ मेट्रो रेल निगम द्वारा कार्यान्वित की जा रही इस परियोजना में केंद्र और राज्य सरकार की 50-50 प्रतिशत की भागीदारी है। इसमें केंद्र सरकार का 1,300 करोड़ रुपये का योगदान है।
• केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8,680 करोड़ रुपये की लागत का 38.20 किलोमीटर लंबी नागपुर मेट्रो परियोजना को मंजूरी दी है। यह मार्च, 2018 में पूर्ण हो जाएगी।
• अहमदाबाद-गांधीनगर मेट्रो परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। जिसमें 10,773 करोड़ रुपये की लागत से 36 किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइन बिछाई जाएगी। यह परियोजना मार्च, 2018 तक पूरी हो जाएगी।

जेएनएनयूआरएम से बेहतर नई योजनाएं
• जेएनएनयूआरएम के कार्यान्वयन के दस वर्षों के दौरान, यूपीए सरकार ने, राज्यों को शहरी बुनियादी ढांचा विकास के लिए 46,751 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता देने का वादा किया गया था, जिसमें से 33,902 करोड़ रुपये ही दिए जा सके थे, इसकी तुलना में, मोदी सरकार ने अमृत, स्मार्ट सिटी मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और हृदय के तहत पांच वर्ष की मिशन की अवधि, 2022 तक, के लिये शहरी स्थानीय निकायों और राज्यों को बुनियादी ढांचा विकास के लिए 1,13,143 करोड़ रुपये देने का वादा किया है, जो केन्द्रीय सहायता के रूप में बहुत बड़ी रकम है।

• जेएनएनयूआरएम (जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन) के 10 वर्षों के दौरान आवास और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास के लिए दी गई 67,823 करोड़ रुपये की कुल केंद्रीय सहायता की तुलना में मोदी सरकार ने विभिन्न नई पहलों के तहत 5-7 साल की अवधि में क्रियांन्वित किए जाने वाले जाने वाले कार्यों के लिये 4,13,143 की कुल केंद्रीय सहायता देगी।

रियल इस्टेट बिल
2016 लागू किये गये ऐतिहासिक रियल एस्टेट (विकास एवं नियमन विधेयक), 2016 से भी निर्माण क्षेत्र में निवेश की सुविधा बढ़ेगी, जिससे जनता को काफी लाभ होगा।

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