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उज्ज्वला योजना ने बदल डाली तकदीर

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फोटो सौजन्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश संकल्प से सिद्धि की ओर बढ़ चुका है। वर्ष 2022 तक न्यू इंडिया के सपने को साकार करने में महिलाओं की बड़ी भूमिका सुनिश्चित करने के लिए मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना सहित कई योजनाओं को मूर्त रूप दिया है। इस उज्ज्वला योजना से देश के करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल चुकी है। महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में देवली तहसील के पिंपलगांव के मंगेश रायमल की भी जिंदगी अब बदल चुकी है। मंगेश इस बात को लेकर काफी खुश हैं कि जिंदगीभर मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाने वाली उनकी बूढ़ी मां को अब ‘उज्ज्वला’ योजना के तहत गैस का सिलेंडर मिल गया है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक मंगेश की मां देवकाबाई जब चूल्हे पर खाना बनातीं और लकड़ियों के जलने से जो धुआं उनकी आंखों में लगता था, वह उनके लिए बहुत ही पीड़ादायक था। अब मंगेश को लगा है कि उज्ज्वला योजना देश की सभी मांओं के लिए एक बड़ी राहत के रूप में सामने आई है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को निजी रूप से धन्यवाद देने के लिए सीधे खत लिखने का विचार बनाया।

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मंगेश को सबसे ज्यादा आश्चर्य तो तब हुआ जब प्रधानमंत्री ने तुरंत खुद ही उनकी चिट्ठी का जवाब दिया। प्रधानमंत्री ने लिखा-‘देश के करोड़ों घरों में जल रहे मिट्टी के चूल्हे महिलाओं के स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। अमीर लोग अच्छी सुविधाएं हासिल कर सकते हैं। लेकिन गरीबी रेखा से नीचे की महिलाओं के लिए तो यह अभी एक सपना ही है। इस सपने को साकार करने के लिए ही उज्ज्वला योजना के जरिए कोशिशें की जा रही हैं।’

केंद्र सरकार की इस योजना का असल मकसद ग्रामीण महिलाओं को गैस का सिलेंडर मुहैया करवा कर मिट्टी के चूल्हे से निजात दिलवाना है।

उज्ज्वला योजना एक नई मिसाल
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मोदी सरकार बीपीएल परिवारों को फ्री गैस कनेक्शन और चूल्हे दे रही है। इसके लिए 8 हजार करोड़ रुपये का बजट 3 साल के लिए बनाया गया है। मोदी सरकार उज्ज्वला योजना के तहत देश के ग्रामीण क्षेत्रों की गरीब महिलाओं को खाना पकाने के दौरान जानलेवा धुएं के कहर मुक्ति दिलाने में जुटी हुई है। 1 मई, 2016 को शुरू हुई उज्ज्वला योजना के तहत कुल 5 करोड़ रसोई गैस के कनेक्शन मुफ्त में दिये जाने का लक्ष्य रखा गया था जिनमें से अब तक 3 करोड़ से अधिक कनेक्शन वितरित किये जा चुके हैं। गरीबों के आंसू पोंछने में मोदी सरकार जिस तरह से सामने आई है… उसकी शायद दूसरी मिसाल नहीं। ये एक समाज-कल्याण योजना है, जिसे ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लागू किया गया है।

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