Home नरेंद्र मोदी विशेष संत श्री रामानुजाचार्य शोषितों और वंचितों के मसीहा थे – मोदी

संत श्री रामानुजाचार्य शोषितों और वंचितों के मसीहा थे – मोदी

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प्रधानमंत्री ने संत श्री रामानुजाचार्य की एक हजारवीं जयंती पर एक डाक टिकट का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि रामानुजाचार्य वंचितो और शोषितों के लिए साक्षात भगवान थे। संत श्री रामानुजाचार्य ने मंदिर को नागरिक कल्याण और जनसेवा का केंद्र बनाया।

समाज को बांटने के खिलाफ थे
प्रधानमंत्री ने संत श्री रामानुजाचार्य की जयंती पर कहा कि वो जो कहते थे, उसे जीकर भी दिखाते थे। वो हर उस परंपरा के खिलाफ थे जो समाज को बांटती हो। प्रधानमंत्री ने बताया कि किस तरह से तिरुचिराप्ली में श्रीरंगन मंदिर के प्रशासन पर एक ही जाति का कब्जा था लेकिन उन्होंने मंदिर का पूरा प्रशासन ही बदल डाला और सब जातियों को प्रतिनिधित्व दिया यहां तक कि महिलाओं को भी जिम्मेदारी सौपी उन्होंने मंदिर को जनसेवा का केंद्र बना दिया।

जाति प्रथा के खिलाफ थे
प्रधानमंत्री ने बताया कि बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि दिल्ली के सुल्तान की बेटी बीबी नचियार की मूर्ति संत श्री रामानुजाचार्य ने ही मंदिर में स्थापित कराई थी। यही हीं उन्होंने जाति प्रथा को चुनौती देते हुए अपना गुरु भी ऐसे व्यक्ति को बनाया जिसे जाति की वजह से तब का समाज गुरु बनने योग्य नहीं मानता था।

बाबा साहेब अंबेडकर भी रामानुजाचार्य से प्रभावित थे
प्रधानमंत्री ने बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर की मैगजीन में छपे संपादकीय का भी जिक्र किया। जिसमें बाबा साहेब ने लिखा था- “हिंदू धर्म में समता की दिशा में यदि किसी ने महत्वपूर्ण कार्य किए, और उन्हें लागू करने का प्रयास किया, तो वो संत श्री रामानुजाचार्य ने ही किया। उन्होंने कांचीपूर्ण नाम के एक गैर ब्राह्मण को अपना गुरु बनाया। जब गुरु को भोजन कराने के बाद उनकी पत्नी ने घर को शुद्ध किया तो संत श्री रामानुजाचार्य ने इसका विरोध किया”।

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