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केंद्र सरकार की नई योजना से निखरेगा गरीबों का स्वास्थ्य

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार गरीबों एवं वंचित वर्ग के स्वास्थ्य को आधारभूत सुरक्षा प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध है। उनके लिए सरकार एक और नई योजना लाने जा रही है, जिसके अंतर्गत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में 500 रुपये तक से कम की स्वास्थ्य जांच को निशुल्क कर दिया जाएगा। आइए, एक नजर डालते हैं, मोदी सरकार की स्वास्थ्य संबंधी कुछ नीतियों पर-

स्वास्थ्य जांचों में गरीबों को मिलेगी छूट

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान [एम्स] देश-भर में अपनी उत्कृष्ट एवं उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की विशेषता के लिए जाना जाता है। प्रतिदिन पूरे देश से यहां इलाज कराने आने वाले लोग लाखों की संख्या में होते हैं। इनमें बड़ी संख्या गरीबों की होती है, जिन्हें स्थानीय स्तर पर उचित स्वास्थ्य सुविधाएं एवं संसाधन नहीं मिल पाते हैं और इस विवशता के चलते उन्हें एम्स आना पड़ता है। उनके लिए आवश्यक टेस्ट करा पाना भी कम दुष्कर नहीं होता। इन्हीं सब बिंदुओं के चलते केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को ऐसे शुल्कों की समीक्षा करने के निर्देश दिए थे, जिनमें पिछले 20 वर्षों से कोई परिवर्तन नहीं हुआ था, ताकि गरीबों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस विषय में कोई प्रभावी फैसला किया जा सके।

रोगियों के लिए संवेदनापूर्ण पहल

इसी निर्देश के जवाब में एम्स के गैस्ट्रोलॉजी विभाग ने इस स्थिति के बारे में बताया, जिसमें एम्स आने वाले रोगियों की संख्या, अपने स्थान से उनके एम्स तक आने-जाने का खर्च, उनके ठहरने संबंधी व्यवस्था, उनके रोग के उपचार का शुल्क, चिकित्सा संबंधी जांच का शुल्क, उससे एम्स को होने वाली आय, रोग के उपचार में लगे मानवीय श्रम आदि सभी स्थितियों से संबंधी स्थिति के आधार पर जानकारी प्रदान की गई थी। इसी के आधार पर मोदी सरकार ने गरीब रोगियों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए एम्स में 500 रुपये से कम लागत वाले टेस्ट को निशुल्क करने की योजना की रूपरेखा तैयार की है। साथ ही इससे संस्थान पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार को संतुलन प्रदान करने के लिए निजी वॉर्डों के शुल्क में मामूली बढ़ोतरी की जा सकती है। इस निर्णय का लाभ रोगियों को तो मिलेगा ही, साथ ही अस्पताल के कामकाज की गति में भी सकारात्मक बदलाव आएंगे।

मिशन इंद्रधनुष द्वारा बच्चों के टीकाकरण की सुनिश्चितता

प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दिसंबर 2014 में सुशासन दिवस के अवसर पर मिशन इंद्रधनुष को आरंभ किया गया था। इस योजना का लक्ष्य वर्ष 2020 तक उन सभी बच्चों के टीकाकरण को सुनिश्चित करना था, जिन्हें विविध रोगों से बचाव के टीके नहीं लगे हैं या अगर लगे भी हैं तो आंशिक रूप से आधे-अधूरे ढंग से। इन टीकों से डिप्थेरिया, टिटनस, खसरा, तपेदिक, पोलियो, हेपेटाइटिस-बी जैसे रोगों की पूर्णतया रोकथाम संभव है। यह अभियान प्रति वर्ष अधिकाधिक बच्चों के टीकाकरण के लक्ष्य के साथ विविध अभियानों द्वारा जारी रखा जाएगा।

गर्भवती महिलाओं के पोषण के लिए आर्थिक सहायता

एक गर्भवती महिला के पोषण और स्वास्थ्य रक्षा में ही बच्चे का संपूर्ण स्वास्थ्य छिपा होता है, परंतु गरीब एवं वंचित वर्ग की महिलाएं कुपोषण की शिकार होने को विवश होती हैं। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने इन महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए, चुने गए जिलों की प्रत्येक गर्भवती महिला को 6 हजार रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया। इस योजना का उद्देश्य मातृत्व मृत्यु दर जैसी स्थिति में बदलाव लाना भी है। यहां ध्यान देने वाली बात है कि मातृत्व दर में भारत की दशा बहुत भयानक है। गरीब महिलाएं गर्भावस्था जैसे संवेदनशील समय में भी अपने पोषण पर ध्यान नहीं दे पाती हैं, इसलिए मोदी सरकार ने यह प्रावधान किया कि इस 6 हजार की वित्तीय सहायता द्वारा गर्भावस्था काल में उनके आवश्यक पोषण को सुनिश्चित किया जा सके। यह राशि उन महिलाओं के बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर कर दी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत सरकार इस दिशा में भी काम कर रही है कि इस वर्ग की गर्भवती महिलाओं को कैशलेस ट्रीटमेंट दिए जाने की भी व्यवस्था की जा सके।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन प्रधानमंत्री मोदी की अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना है, जो स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश के समस्त वर्गों का हित सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाई गई है। इसके अंतर्गत राज्य सरकारों को कुछ वित्तीय सहायता द्वारा ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य की स्थिति को और बेहतर बनाने की दिशा में भी प्रयास किया गया और शहरी वर्ग के स्वास्थ्य को भी इस दायरे में लाया गया। इसके अंतर्गत 4 घटकों को शामिल किया गया, जो इस प्रकार हैं- राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, शहरी स्वास्थ्य मिशन, तृतीयक देखभाल कार्यक्रम तथा स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा के लिए मानव संसाधन। इस योजना के लिए वर्ष 2017-18 के लिए 26,690 करोड़ रुपये भी आवंटित किए गए, जो कि केंद्र सरकार की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है।

प्रधानमंत्री जन औषधि योजना

प्रधानमंत्री मोदी ने इस योजना के द्वारा न केवल वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई, बल्कि सामान्य नागरिकों को भी इससे बड़ी राहत मिली। इस योजना में केंद्र सरकार द्वारा उत्तम गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाओं को बाजार मूल्य से काफी सस्ते दामों पर उपलब्ध कराया जाता है। गरीबों के लिए जन औषधि स्टोर पर निशुल्क जांच की सुविधा की व्यवस्था भी की गई है। इस योजना के अतिरिक्त यौन शोषण पीड़ित को सरकारी व निजी, दोनों ही अस्पतालों में मुफ्त चिकित्सा सहायता दिए जाने का प्रावधान किया गया।

मेडिकल टूरिज्म और देशीय चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा

प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने हमेशा भारतीय चिकित्सा पद्धति को प्रोत्साहित किया है। उन्होंने बाकायदा मेडिकल टूरिज्म को भी बढ़ावा देने की बात हमेशा कही है। यह बात इसलिए भी उत्साहवर्धक है, क्योंकि विदेशों में भी पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति की ओर काफी झुकाव देखने को मिलता है। प्रधानमंत्री मोदी ने योग, आयुर्वेद आदि को हमेशा प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रयास किया है और देशीय चिकित्सा पद्यति के महत्त्व को रेखांकित किया है। समस्त भारतवासी का संपूर्ण स्वास्थ्य उनकी प्राथमिकताओं में सर्वोपरि है।

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