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भारत-चीन कर मिलकर कार्य करें, तो एशिया और विश्व का भविष्य बेहतर होगा- प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिंगापुर में आयोजित शांगरी ला डॉयलोग में कहा है कि एशिया का भविष्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर निर्भर करेगा। उन्होंने सिंगापुर को स्वर्णभूमि बताते हुए कहा कि भारत के लिए सिंगापुर और ज्यादा है। यह एक भावना है, जो एक लॉयन नेशन को लॉयन सिटी से जोड़ती है। सिंगापुर हमारे लिए आसियान का स्प्रिंगबोर्ड है। पूर्व में प्रवेश के लिए सिंगापुर सदा ही एक प्रवेश द्वार रहा है। इस अवसर पर उन्होंने एशिया और विश्व के बेहतर भविष्य के लिए भारत और चीन के सहयोग पर विशेष रूप से जोर दिया।

समुद्र भारत का इतिहास भी है और भविष्य भी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के लिए समुद्र इतिहास भी है और हमारा भविष्य भी है। हमारा 90% व्यापार और ऊर्जा समुद्र पर निर्भर है। यह विश्व व्यापार की भी लाइफलाइन है। हमारा अधिकतर ओवरसीज निवेश इसी ओर हैं, जिसमें अकेले आसियान का हिस्सा 20% है। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के संबंध और मजबूत हो रहे हैं। हम अपने सहयोगियों और मित्रों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने और मैरीटाइम सुरक्षा को लेकर भी चौकस हैं, इसलिए कलेक्टिव सुरक्षा को प्रमोट कर रहे हैं। ग्लोबल ट्रांजिट रूट को शांतिपूर्ण और सबके लिए उपलब्ध बनाए रखने के लिए भी भारत सजग है, इसलिए पूर्व में SAGAR यानि Security and growth for all in the region के सिद्धांत का अनुसरण किया जा रहा है।

चीन से संबंधों का विशेष जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चीन और भारत दुनिया के दो सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश हैं। दोनों देशों ने आपसी मुद्दों को निपटाने और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए काफी परिपक्वता दिखाई है। दोनों विश्व की सबसे तेजी से बढ़ते मेजर इकोनॉमी हैं। ऐसे में एशिया और दुनिया का भविष्य अच्छा होगा, यदि भारत और चीन भरोसे और आत्मविश्वास के साथ मिलकर काम करें। श्री मोदी ने कहा कि जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ हमारे रिश्ते बेहतर हैं। रूस के साथ स्ट्रैटिजिक सहयोग भी मजबूत,मैच्योर और पुराना है और अमेरिका के साथ भी हमारे रिश्ते काफी अच्छे हैं और यह इतिहास की हिचकिचाहटों से बाहर निकल आया है। 

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