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साइबर सुरक्षा,अतिवाद और आतंकवाद से निपटना सिंगापुर से सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्र- प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत और सिंगापुर दोनों अपने देशों के लिए साइबर सुरक्षा,अतिवाद तथा आतंकवाद को सबसे बड़ा खतरा मानते हैं। सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली हसीन लूंग के साथ ज्वाइंट प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटना दोनों देशों के बीच सहयोग के मुख्य क्षेत्र होंगे। दोनों देशों के मजबूत संबंधों के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, “भारत-सिंगापुर के संबंध सच्चे अर्थों में सामरिक साझेदारी की कसौटी पर खरे उतरे हैं। हमारे संबंधों में कोई असहजता नहीं है, बल्कि केवल गर्मजोशी, सौहार्द और विश्वास है।” इस अवसर पर उन्होंने अपने और अपने प्रतिनिधिमंडल के स्वागत और प्रधानमंत्री ली की निजी मित्रता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए दोनों देशों के बीच हुए विभिन्न समझौतों के बारे में विस्तार से जानकारी दी और शंगरी ला डायलॉग में आमंत्रण के लिए सिंगापुर के पीएम को धन्यवाद भी दिया।

भारत के प्रति सिंगापुर की कंपनियों के CEOs को है विश्वास
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति को रिव्यू किया है और भविष्य के रोडमैप के बारे में चर्चा की है। उन्होंने कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट के दूसरे रिव्यू पर खुशी जताते हुए कहा कि, दोनों देश इस पर सहमत हैं कि यह मंजिल नहीं, पड़ाव मात्र है। हमारे अधिकारी शीघ्र ही इस समझौते को और अपग्रेड और सुधारने के लिए चर्चा शुरू करेंगे। श्री मोदी ने बताया कि भारत के लिए सिंगापुर FDI का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और भारत से विदेशों में होने वाले निवेश के लिए शीर्ष डेस्टिनेशन है। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां सिंगापुर का उपयोग आसियान क्षेत्र और अन्य देशों के लिए स्प्रिंगबोर्ड का काम करती हैं। सिंगापुर की कंपनियों द्वारा भारत में निवेश बढ़ रहा है। भारत की उन्नति सिंगापुर को एक अतुल्यनीय अवसर प्रदान करती है। खासकर सिंगापुर में महत्वपूर्ण कंपनियों के CEOsके साथ राउंड टेबल पर भारत के प्रति उनके विश्वास को देखकर उन्हें बहुत ही प्रसन्नता हुई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच एयर ट्रैफिक तेजी से बढ़ रहा है। दोनों पक्ष जल्द ही एयर सर्विस एग्रीमेंट की समीक्षा शुरू करेंगे। दोनों ही अपनी डिजिटल पार्टनरशिप के शुरू होने से बहुत प्रसन्न हैं। यह असीमित संभावनाओं के साथ प्राकृतिक भागीदारी का क्षेत्र है। उन्होंने बताया कि सिंगापुर में रूपे, भीम और यूपीआई सिस्टम का अंतरराष्ट्रीय लॉन्च डिजिटल इंडिया के प्रति हमारी भागीदार की नवीनता की भावनाओं को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया पॉलिसी के तहत भारत में एक डेटा सेंटर बनाया जाएगा। साथ ही उच्च शिक्षा, साइंस और टेक्नोलॉजी तथा इनोवेशन के क्षेत्र में होने वाले सहयोग और समझौते दोनों देशों के रिश्तों को बढ़ाएंगे। मोदी जी ने कहा कि स्किल डेवलपमेंट, प्लानिंग और शहरी विकास के क्षेत्र में सहयोग में अच्छी प्रगति हुई है। भारत ने 115 एस्पिरेशनल जिलों में पानी के लिए नई पहल की शुरुआत देखी है। दोनों देशों में हुए समझौते इस सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाएंगे। यह अंतत: ग्रामीण क्षेत्रों और भारत के युवाओं को लाभ पहुंचाएंगे।

रक्षा के क्षेत्र में सामरिक सहयोग पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों ने अपनी सामरिक साझेदारी में डिफेंस और सिक्योरिटी के महत्त्व पर जोर दिया है। इन संबंधों में लगातार वृद्धि का स्वागत करते हुए उन्होंने सिमबेक्स के 25वें वर्ष पर भारत और सिंगापुर की नौसेनाओं को बधाई दी। उन्होंने शीघ्र ही त्रिपक्षीय नौसैनिक अभ्यास की शुरूआत की भी बात कही। नौसैनिक अभ्यासों और नौसैनिक सहयोग को ध्यान में रखते हुए दोनों नौसेनाओं के बीच लॉजिस्टिक एग्रीमेंट के संपन्न होने का भी उन्होंने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा, अतिवाद और आतंकवाद दोनों देशों के लिए बड़ी चुनौती है और इसमें दोनों देश मिलकर काम करेंगे। दोनों नेताओं ने मौजूदा वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों पर अपनी चिंताओं को भी साझा किया। दोनों देशों ने मैरीटाइम सुरक्षा पर अपने सिद्धांतों की फिर से पुष्टि करते हुए रूल्स बेस्ड ऑर्डर के प्रति प्रतिबद्धता जाहिर की है। दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय ट्रेड रिजीम को बनाए रखने की जरूरत पर भी सहमति व्यक्त की है। साथ ही आसियान संस्थानों की एकजुटता के महत्त्व पर भी जोर दिया है। इस अवसर पर उन्होंने सिंगापुर में सफलतापूर्वक नेतृत्व परिवर्तन के लिए मौजूदा नेतृत्व को शुभकामनाएं भी दीं हैं।

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