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पीएम मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ पॉलिसी ने आसियान देशों के साथ संबंधों को दिया नया आयाम

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘एक्शन’ में अधिक यकीन करते हैं। यह बात उनके हर कार्य और निर्णयों में साफ दिख जाते हैं। वर्ष 2014 में जब उन्होंने देश की कमान संभाली तो दक्षिण-पूर्वी देशों के साथ आर्थिक, सामरिक और सांस्कृतिक संबंधों को अलग दृष्टिकोण से देखा। इसके लिए उन्होंने ‘एक्ट ईस्ट’ की पॉलिसी अपनाई। दरअसल यह इन देशों के साथ संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की नई शुरुआत थी।  पीएम मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का ही परिणाम है कि आज इन देशों का भारत पर भरोसा बढ़ा है।

इंडोनेशिया में लगे मोदी-मोदी के नारे
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 29 मई से 2 जून तक इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर के दौरे पर हैं। इंडोनेशिया की अपनी पहली यात्रा पर 30 मई को वे राजधानी जकार्ता पहुंचे। प्रधानमंत्री मोदी का एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत हुआ। वे जैसे ही एयरपोर्ट परिसर से बाहर निकले, हजारों लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और मोदी-मोदी के नारे लगाने लगे। जब वे इंडोनेशिया के सबसे बड़े इस्तेकाल मस्जिद गए तो वहां भी कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। जाहिर है एक मुस्लिम देश में मोदी-मोदी के नारे लगना ये बताने को काफी है कि दुनिया प्रधानमंत्री मोदी को एक ग्लोबल लीडर के तौर पर देख रही है।

सद्भाव का संदेश देता है अर्जुन का रथ
बहुलतावादी संस्कृति को कैसे सहेजकर रखा जाए इसका संदेश देता है जकार्ता के सबसे बड़े चौराहे पर लगा अर्जुन का विशाल रथ। प्रधानमंत्री मोदी अर्जुन के उस खास रथ को भी देखने गए। दरअसल यह खास इसलिए है कि यह उस चौराहे पर बना है, जहां आसपास 95 प्रतिशत मुस्लिम रहते हैं। यहां से रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं और उसके बीच में अर्जुन और भगवान कृष्ण की ये तस्वीर कहती है कि इंडोनेशिया में सभ्यता और संस्कृति को वहां के लोग कैसे संभाल कर रखते हैं।

भारतीय संस्कृति के ध्वजवाहक हैं प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारतीय संस्कृति के सबसे बड़े ध्वजवाहक हैं। जब वे इंडोनेशिया की अपनी पहली यात्रा पर गए तो वहां भी अपनी मिट्टी की सांस्कृतिक महक बिखेर आए। प्रधानमंत्री मोदी ने जकार्ता में ‘पतंग प्रदर्शनी’ महोत्सव का उद्घाटन किया तो यह बेहद खास था। दरअसल इसे रामायण-महाभारत की थीम पर आयोजित किया गया। इस प्रदर्शनी के जरिए भारत-इंडोनेशिया के बीच मजबूत सांस्कृतिक रिश्तों को दर्शाने की कोशिश की गई।

‘सबांग’ बंदरगाह का आर्थिक-सामरिक इस्तेमाल करेगा भारत
प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर इंडोनेशिया ने सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘सबांग’ बंदरगाह के आर्थिक और सैन्य इस्तेमाल की स्वीकृति भारत को दे दी है। यह चीन के लिए बड़ा झटका है। दरअसल ‘सबांग’ अंडमान निकोबार द्वीप समूह से 710 किलोमीटर की दूरी पर है। यह महत्वपूर्ण इसलिए भी है कि चीन भी इस बंदरगाह को लेना चाहता था। दरअसल ‘सबांग’ बंदरगाह सुमात्रा द्वीप के उत्तरी छोर पर है और मलक्का स्ट्रैट के भी निकट है। गौरतलब है कि यह जिस इलाके में यह पड़ता है उससे भारत का 40 प्रतिशत समुद्री व्यापार होता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्ट ईस्ट’ पॉलिसी से चीन को दिया संदेश
अप्रैल में पीएम मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ वुहान में अनौपचारिक वार्ता कर यह जता दिया कि चीन से अपने रिश्ते को भारत अलग दृष्टिकोण से देखता है। चालीस दिन बाद ही इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर की एक साथ यात्रा कर चीन को यह भी संदेश दे दिया कि भारत अपने हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। गौरतलब है कि पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, मालदीव और म्यांमार में चीन अपना दखल बढ़ा रहा है। ऐसे में भारत ‘एक्ट ईस्ट’ पॉलिसी के तहत चीन की विस्तारवादी नीतियों से परेशान- जापान, फिलीपीन्स, ताईवान,  ब्रूनेई,  मलेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर और वियतनाम जैसे देशों से संबंधों को बढ़ा रहा है।

…जब प्रधानमंत्री मोदी के आमंत्रण पर 10 राष्ट्रप्रमुख एक साथ आए भारत
26 जनवरी, 2018 को नई दिल्ली के राजपथ पर विश्व ने एक और अनोखा दृश्य तब देखा जब आसियान देशों के 10 राष्ट्राध्यक्ष भारत की जमीन पर एक साथ दिखे। थाइलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस, सिंगापुर, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस और ब्रुनेई आसियान के नेताओं ने भारत को अपनी इस इच्छा से अवगत कराया कि रणनीतिक तौर पर अहम भारत-प्रशांत क्षेत्र में ज्यादा मुखर भूमिका निभाए। साफ है कि आसियान देशों के नेताओं का पीएम मोदी पर भरोसा व्यक्त किया जाना विश्व राजनीति में भारत के दबदबे को दिखा रहा है।

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