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धुर विरोधियों को भी अपना बना लेते हैं पीएम मोदी

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जनता दल युनाइटेड ने चार साल पहले एनडीए अलग हो जाने का निर्णय किया था। लेकिन चार साल बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में उनकी वापसी सियासी चर्चा में है। कई लोग इससे हैरत में भी हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जानने समझने वालों के लिए ये कोई अचंभा नहीं है। दरअसल पीएम मोदी ने सियासत में जो लकीर खींची है ये उसी की बानगी भर है। अब ये सभी मानने लगे हैं कि पीएम मोदी विपक्ष को साधने में माहिर हैं। उनकी राजनीतिक शैली ऐसी है जो विपक्ष दूर खड़ा होते हुए भी सत्ता पक्ष के साथ खड़ा दिखता है। ये वो सियासत है जहां विपक्ष का विरोध भी आपसी सहमति का रास्ता अख्तियार कर लेता है और धुर विरोधी भी साथ हो लेते हैं। 

नीतीश कुमार की ‘घर वापसी’
सितंबर 2013 में बिहार की सियासत ने नई करवट ली थी। ये वही समय था जब बीजेपी ने प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के नाम की घोषणा की थी। इसके बाद नीतीश कुमार ने उनके नाम पर असहमति जताते हुए एनडीए से 17 का अपना नाता ही तोड़ लिया था। लेकिन चार साल बाद नीतीश कुमार की एनडीए में ‘घर वापसी’ हो गई है।  इस प्रकरण में सबसे खास यह रहा कि जिन पीएम मोदी के कारण नीतीश कुमार का एनडीए से नाता टूटा था, उन्हीं के कारण फिर से वह नाता वापस स्थापित हो गया है। दरअसल नोटबंदी, जीएसटी, बेनामी संपत्ति एक्ट जैसे मुद्दों पर पीएम मोदी और नीतीश कुमार के समान विचार हैं। पीएम मोदी का चूंकि विकास की राजनीति में विश्वास है और नीतीश कुमार भी विकास पुरुष के तौर पर पहचान रखते हैं। साफ है कि नमो ने बड़ा दिल दिखाया और नीतीश कुमार को अपने साथ करने में सफल रहे। इस घटनाक्रम में दो बातें महत्वपूर्ण हुईं, एक तो बिहार में विकास की रफ्तार तेज होगी और सियासत में भी यह पीएम मोदी का सिक्सर साबित हो चुका है। 

ममता मोदी के लिए चित्र परिणाम

ममता बनर्जी भी हैं पीएम मोदी की मुरीद
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के स्टैंड में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। नोटबंदी, जीएसटी जैसे मामलों पर पीएम मोदी के खिलाफ सख्त बयानबाजी करने वाली ममता के सुर बदलते दिखाई दे रहे हैं। शनिवार(19 अगस्त) को एक प्राइवेट चैनल के साथ इंटरव्यू में पश्चिम बंगाल की सीएम ने यहां तक कह डाला है कि वह पीएम मोदी के पक्ष में हैं। ममता बनर्जी के स्टैंड में इस शिफ्ट को बीजेपी जहां मोदी की नीतियों की स्वीकार्यता के रूप में ले रही है, वहीं विपक्ष के लिए यह चौंकाऊ है। लेकिन ममता का यह हृदय परिवर्तन अचानक नहीं बल्कि पीएम मोदी द्वारा राज्य सरकार को किए गए उनके सकारात्मक सहयोग का परिणाम है। साफ है कि पीएम मोदी अपनी सकारात्मक सोच की बदौलत अपने धुर विरोधियों को भी अपना मुरीद बना लेते हैं। रामविलास पासवान नरेंद्र मोदी के लिए चित्र परिणाम

रामविलास पासवान हुए मोदी के मुरीद
27 फरवरी, 2014 को भी एक ऐसी ही सियासी हलचल हुई थी। रामविलास पासवान ने कांग्रेस और आरजेडी का साथ छोड़ एनडीए में शामिल होने का निर्णय लिया था। रामविलास पासवान एनडीए में आने से पहले नरेंद्र मोदी के विरोध की राजनीति करते रहे थे। लेकिन वर्तमान में पीएम मोदी का अगर सरकार में सबसे बड़े समर्थकों में से नाम चुनने को कहा जाए तो उनमें से रामविलास पासवान भी एक होंगे। दरअसल पीएम मोदी के व्यक्तित्व की विशेषता है कि उनके धुर विरोधियों को भी वे अपना बना लेते हैं।

रामदास अठावले नरेंद्र मोदी के लिए चित्र परिणाम

रामदास अठावले हैं पीएम मोदी के प्रशंसक
रामदास अठावले की आरपीआई जब 2012 में एनडीए का हिस्सा बनी थी तब प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के नाम की चर्चा तक नहीं थी। लेकिन ऐसा माना जाता था कि रामदास अठावले गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी के विरोधी थे। जब नरेंद्र मोदी का नाम पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर आया तो वे उतने उत्साहित भी नहीं थे। लेकिन तीन साल से पीएम मोदी के साथ वे लगातार कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। आज संसद में कोई बहस होती है तो अपने मसखरे अंदाज से पीएम मोदी के समर्थन में सबसे अधिक खड़े रहते हैं। विरोधियों द्वारा पीएम मोदी के हर वार का प्रतिकार करते हैं।

वाघेला मोदी के लिए चित्र परिणाम

गुजरात के कई कांग्रेसी नेता-विधायक बीजेपी में
मार्च के आखिरी हफ्ते में जब गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष शंकर सिंह वाघेला और अमित शाह मिले थे तो गुजरात में सियासत की एक नयी तस्वीर समझ आने लगी थी। जुलाई में वाघेला के कांग्रेस से इस्तीफा देने के साथ तो कांग्रेस के एक के बाद एक 14 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी। दरअसल गुजरा पीएम मोदी का गृह राज्य है। वहां उनके नाम के इर्द गिर्द ही सियासत के समीकरण गढ़े जाते हैं। सीएम रहते हुए नरेंद्र मोदी ने गुजरात की जो तस्वीर देश-दुनिया में बनाई उससे उनका विरोध करने वाले भी मुरीद हो गए हैं। आज इतना तो साबित हो चुका है कि पीएम मोदी के नाम का विरोध कर गुजरात की राजनीति नहीं चल सकती है।

एआइएडीएमके भी एनडीए में शामिल होगी
तमिलनाडु की एआईएडीएमके सरकार एनडीए में शामिल हो सकती है। अटकलों ने जोर तब पकड़ा जब मुख्यमंत्री पलानिसामी ने पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद से अंदाजा लगाया जा रहा है कि एआईएडीएमके के दोनों धड़ों के विलय के बाद एआइएडीएमके एनडीए में शामिल हो सकती है। दरअसल कभी पीएम मोदी का विरोध करती रही एआइएडीएमके का पीएम मोदी का मुरीद होना और एनडीए में शामिल होना, तमिलनाडु की राजनीति में नया गुल खिला सकता है।

मोदी का आकर्षक व्यक्तित्व के लिए चित्र परिणाम

आकर्षक व्यक्तित्व, दमदार नेतृत्व
दूरदर्शी सोच और ‘सबका साथ, सबका विकास’ नीति के माध्यम से प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी देश की सवा सौ करोड़ आबादी की उम्मीद बन गए हैं। ओजस्वी वक्ता के रूप में नरेंद्र मोदी की प्रतिभा ने उन्हें जनता से जोड़े रखने में मदद की और सरकार का भरोसा कायम रखा है। इसके साथ ही राजनीति के कुशल कारीगर के तौर पर उन्होंने पार्टी के भीतर किसी गुट को पनपने नहीं दिया। पीएम मोदी ने नयी पीढ़ी की नब्ज पकड़ी और आने वाले कई सालों की राजनीतिक पृष्ठभूमि तैयार कर दी। टेक्नोफ्रेंडली नरेंद्र मोदी सोशल साइट के जरिये लोगों से जुड़े रहे और जमीनी सच्चाई से रूबरू होते रहे। इन तमाम विशेषताओं ने नरेंद्र मोदी को एक दमदार नेतृत्व के तौर पर पहचान दी।

मोदी का नेतृत्व के लिए चित्र परिणाम

 

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