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आदिवासी कल्याण के लिए प्रतिबद्ध मोदी सरकार

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देश के सबसे पिछड़े जनजातीय समाज यानी आदिवासियों के उत्थान और कल्याण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आदिवासी मामलों का मंत्रालय नई-नई योजनाएं लाकर और उनका क्रियान्वयन कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम कर रहा है। पिछले साढ़े तीन साल में आदिवासियों के लिए इतने कार्य हुए हैं जो कि पहले कभी नहीं हुए। केंद्र सरकार ने जनजातीय लोगों के विकास के साथ ही उनकी सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्वायत्तता की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं। मोदी सरकार की तत्परता के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ तमाम राज्यों के दूर-दराज के इलाकों में बसे जनजातीय लोगों को मिलने लगा है। इसी का परिणाम है कि अब वो देश के अन्य लोगों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने लगे हैं।

आइए नजर डालते हैं मोदी सरकार की ओर से जनजातीय लोगों के लिए किए जा रहे कार्यों पर-

जनजातीय मामलों के मंत्रालय के बजट में बढ़ोतरी
मोदी सरकार ने आदिवासियों के उत्थान को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए वर्ष 2017-18 के बजट में जनजातीय मंत्रालय के बजट में 10 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। केंद्र सरकार ने जनजातीय मामलों के मंत्रालय को कुल 5329 करोड़ रुपये के बजट का आवंटन किया है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में 4847 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। इतना ही नहीं, केंद्र  सरकार ने सभी मंत्रालयों में अनुसूचित जन-जातियों के कल्‍याण के लिए भी बजट आवंटन में 30 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की है। इस मद के लिए पिछले वित्‍त वर्ष के 24,005 करोड़ रुपये की तुलना में मौजूदा वित्‍त वर्ष के लिए 31,920 करोड़ रुपये का बजट आवंटन किया गया है। अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए उच्‍चतर शिक्षा संबंधी नेशनल फेलोशिप और स्‍कॉलरशिप हेतु बजट में 140 प्रतिशत की वृद्धि की गई। इसके लिए वर्ष 2016-17 के रूपये 50 करोड़ की तुलना में मौजूदा वित्‍त वर्ष के लिए 120 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।

जनजातीय समुदायों का कौशल विकास
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समुदाय के आर्थिक विकास के लिए काफी काम किया जा रहा है। आदिवासी समुदाय के युवाओं को केंद्र सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम से जोड़ा गया है। जनजातीय लोगों को आधुनिक तकनीकि से प्रशिक्षित कर कृषि, बागवानी, मछलीपालन, पशुपालन जैसे पारंपरिक पेशों के अलावा उन्हें फ्रिज-एसी, मोबाइल की मरम्मत, ब्यूटीशियन, डाटा एंट्री ऑपरेटर, सुरक्षा गार्ड, घरेलू नर्स जैसे क्षेत्रों में पारंगत किया जा रहा है। इसके साथ ही चित्रकारी, हथकरघा, हस्तशिल्प, राजमिस्त्री, इलेक्ट्रीशियन जैसे क्षेत्रों में जनजातीय लोगों को कौशल विकास के तहत प्रशिक्षित करने का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। 

जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों का अधिकार
देश के तमाम राज्यों में रहने वाले लाखों आदिवासियों के मौलक अधिकारों की रक्षा और जल, जंगल, जमीन पर उनके हक को बरकरार रखने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की सरकार लगातार काम कर रही है। तमाम आदिवासी समूहों द्वारा इस संबंध में शिकायत की जाती रही है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद जनजातीय समूहों को भरोसा दिलाया है कि उनके अधिकारों की पूरी रक्षा की जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा है कि विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों का दोहन आदिवासियों की कीमत पर नहीं होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा है कि जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों का अधिकार रहेगा क्योंकि वे उसकी उपासना करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने जनजातियों के विकास को गति देने के लिए पिछले वर्ष जनजातीय बहुल इलाकों में एक सौ से ज्यादा विकास केंद्र खोलने की घोषणा भी की थी। इस योजना पर काम चल रहा है, इन विकास केंद्रों में शिक्षा, अस्पताल जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी।

जनजातीय छात्र-छात्राओं के लिए आश्रम स्कूल
मोदी सरकार ने अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए देशभर में 1205 आश्रम स्कूलों के निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध कराई है। इन स्कूलों में करीब 1,15,500 सीटों की व्यवस्था की गई है। इन स्कूलों के अतिरिक्त विभिन्न राज्य सरकारों ने भी जनजातीय छात्रों और छात्राओं के लिए 3272 आश्रम स्कूल खोले हैं। केंद्र सरकार ने 2017-18 के दौरान जनजातीय उप-योजना क्षेत्रों में आश्रम स्कूल योजना के तहत 10 करोड़ रुपये की रकम आवंटित की है। 

72 नए एकलव्य मॉडल स्कूलों को मंजूरी
केंद्र सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) के जरिए जनजातीय छात्रों को शिक्षा दिलाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसी के परिणामस्वरूप पिछले तीन वर्षों में 51 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय शुरू हो चुके हैं। इस योजना की शुरुआत 1998 में हुई थी और इसके तहत पहला स्कूल सन 2000 में महाराष्ट्र में खोला गया था। केंद्र में एनडीए सरकार बनने से पहले देश में महज 110 ईएमआरएस चल रहे थे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनजातीय शिक्षा पर विशेष ध्यान देने के चलते महज तीन वर्षों में 51 ईएमआरएस शुरू हुए। इस वक्त देश के  कुल 161 ईएमआरएस विद्यालयों में 52 हजार से ज्यादा आदिवासी छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इतना ही नहीं मोदी सरकार ने पिछले तीन वर्षों में 72 नए ईएमआरएस विद्यालयों की स्वीकृति प्रदान की है।

जनजातीय छात्रों की छात्रवृत्ति में वृद्धि
इसके साथ ही आदिवासी छात्रों को शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति में भी खासी बढ़ोतरी की गई है। नौंवी और दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले अनुसूचित जनजाति के लगभग 10 लाख छात्रों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रति वर्ष प्री- मैट्रिक छात्रवृत्तियों के रूप में लगभग 200 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। वहीं अनुसूचित जनजाति के लगभग 20 लाख छात्रों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रति वर्ष पोस्‍ट- मैट्रिक छात्रवृत्तियों के रूप में लगभग 750 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है।

राष्ट्रीय जनजातीय कार्निवाल, 2016
जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 25-28 अक्‍टूबर, 2016 को प्रथम राष्ट्रीय जनजातीय कार्निवाल का सफल आयोजन किया। प्रधानमंत्री ने मुख्‍य अतिथि के रूप में इस अवसर की शोभा में चार चांद लगाए और 25 अक्‍टूबर, 2016 को इंदिरा गांधी इनडोर स्‍टेडियम, नई दिल्‍ली में कार्निवाल का उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह के दौरान देश भर से आई सैंकड़ों जनजातीय कलाकारों की मंडलियों ने परंपरागत वेशभूषा में कार्निवाल परेड में भाग लिया। देश भर के लगभग 20,000 प्रतिनिधियों ने भी इस समारोह में शिरकत की।

अदिवासियों के प्रति ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार की योजनाओं और नीतियों पर नजर डालें तो उनमें से अधिकतर गरीबों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। मोदी सरकार के शासन काल में अबतक गरीबों, किसानों और समाज के दबे-कुचले लोगों के कल्याण के लिये जितने काम हुए और हो रहे हैं, उतने काम पहले कभी नहीं हुए। सबसे बड़ी बात ये है कि ये सारी योजनाएं जन-कल्याण के लिये हैं, न कि लोकप्रियता बटोरने के लिये।

गरीबों को मिल रहे हैं मुफ्त LPG कनेक्शन
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत मोदी सरकार बीपीएल परिवारों को फ्री गैस कनेक्शन और चूल्हे दे रही है। इसके लिए 8 हजार करोड़ रुपये का बजट 3 साल के लिए बनाया गया है। अब तक 3.18 करोड़ से अधिक परिवारों को इसका लाभ मिला है। हर बीपीएल परिवार को LPG गैस कनेक्शन खरीदने के लिए 1600 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इनमें बड़ी तादाद दलितों और पिछड़ों की है। इस योजना के तहत 5 करोड़ परिवारों को मुफ्त LPG कनेक्शन दिये जाने हैं और अबतक इसका विस्तार देश के 704 जिलों में हो चुका है। इस योजना से भी जनजातीय समुदाय के लोगों को जोड़ा गया है, और कोशिश की गई है कि ज्यादा से ज्यादा आदिवासी क्षेत्रों में मुफ्त एलपीजी कनेक्शन पहुंच सके।

गरीबों को पक्के मकान
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 2019 तक एक करोड़ गरीबों को पक्के मकान देने की तैयारी है। जबकि शहरों में 2022 तक दो करोड़ गरीबों को पक्का घर बना के दिया जाना है। प्रधानमंत्री मोदी की इस महत्त्वाकांक्षी योजना को युद्धस्तर पर क्रियान्वित किया जा रहा है। इसके लिये सरकार युद्धस्तर पर जुट गई है। जाहिर है कि प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में मूल रूप से दलित, पिछड़े और आदिवासियों को ही इसका फायदा मिलेगा।

 

30 करोड़ से अधिक गरीबों के खुले जनधन खाते
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में गरीबों को बैंकों से जोड़ने के लिए जन धन योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत न सिर्फ 30.69 करोड़ से ज्यादा गरीबों और आदिवासियों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा गया, बल्कि नवंबर, 2017 तक 69,176 करोड़ रुपये से अधिक उनके खाते में जमा हो गये।

खुले में शौच से मुक्ति
खुले में शौच करने वालों में ज्यादातर गरीब और खासकर दलित व आदिवासी रहे हैं जिनके पास अपना शौचालय नहीं था। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण इलाकों में 20 जुलाई, 2017 तक 4,39,21,270 घरों में शौचालय बनाए जा चुके थे। 2,06,441 गांवों को खुले में शौच से मुक्ति मिल चुकी है। 5 राज्य और 149 जिलों को खुले में शौच से मुक्ति मिल चुकी है। जबकि शहरों में 26,64,540 घरों में और 1,29,808 सामुदायिक और जन-शौचालय बनाये जा चुके हैं। इस अभियान में 2019 तक यानी महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तक भारत को स्वच्छ बनाने का लक्ष्‍य किया गया है।

गांवों में दूर हुआ अंधेरा
मोदी सरकार ने आते ही यह पता लगाया कि 18, 452 गांवों में आजादी के बाद से अब तक बिजली नहीं पहुंची है। 1 मई, 2018 तक हर गांव में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। इस पर 75, 600 करोड़ रुपये खर्च करना तय हुआ। बीते तीन सालों में 20 जुलाई, 2017 तक 13, 990 से ज्यादा गांवों में बिजली पहुंचा दी गयी है। दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत देश के 5, 97, 464 गांवों में से 594,006 गांवों में बिजली पहुंचा दी गयी है। ये संख्या भारत के कुल गांवों का 99.4 प्रतिशत है। दलित-आदिवासी और पिछड़े जो अब तक अंधेरे में रहने को मजबूर थे, उन्हें रोशनी मिल गयी है। ये लोकप्रियता के लिये नहीं हो रहा है, ये गरीबों के कल्याण के लिये है।

सबसे पिछड़े जिलों के उत्थान की सोच
पिछड़ों और गरीबों के कल्याण के लिये मोदी सरकार कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी से लगता है कि सरकार ने सबसे पहले देश के सबसे पिछड़े 100 जिलों में ही पहले विकास की योजना बनाई है। इस योजना पर नीति आयोग बाकी संबंधित मंत्रालयों के सहयोग से काम करेगा। ये बात किसी से छिपी नहीं कि सबसे पिछड़े जिलों का मतलब क्या है? ये वो जिले होते हैं जहां आम तौर पर दलित और आदिवासियों की तादाद अधिक होती है। यानी मोदी सरकार की नजर जरूरतमंदों के उत्थान पर है, अपनी लोकप्रियता पर नहीं।

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