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प्रधानमंत्री मोदी ने गरीबों के घर तक धन पहुंचाया

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देश में, गरीबों के घरों तक आज सीधे सरकारी धन पहुंच रहा है। यह ऐसी सच्चाई है जिसकी कल्पना आजादी के 67 सालों में तो हुई, लेकिन इसे हकीकत में बदलने वाला कोई नहीं था। आज कल्पना एक हकीकत में बदल चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर(DBT) योजना ने गरीबों के सपनों को पंख दे दिये हैं।

जब‘गरीबी हटाओ’ का केवल नारा ही था 

आजादी से लेकर साल 2014 तक के 67 सालों में से करीब 60 साल तक सत्ता में रही कांग्रेस ने गरीबों के कल्याण के लिए कई योजनाएं बनायीं, यहां तक कि ‘गरीबी हटाओ’ का बहुचर्चित नारा दे डाला, लेकिन गरीबों के घर के दुःख-दर्द कम नहीं हुए। क्योंकि इस दौरान गरीबों की योजनाओं के धन को जनता के ही प्रतिनिधि, सरकारी अफसरों की मिलीभगत से डकार लेते थे। इस दुष्चक्र की कमर को DBT ने पूरी तरह से तोड़ दिया। एक तरह से देखें तो DBT, बैंक खाता, आधार संख्या और मोबाइल नंबर का एक ‘त्रिदेव’ है। इस ‘त्रिदेव’ में प्राण प्रतिष्ठा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 अगस्त 2014 को जन धन योजना से की। इस योजना ने सभी गरीब परिवारों को एक बैंक खाता दिया और इन बैक खातों को आधार संख्या और मोबाइल नंबर से जोड़ दिया गया। एक साल के अंदर ही देश के लगभग सभी गरीब बैंकों से सीधे जुड़ गये। गरीबों के बैंको से जुड़ते ही सरकार ने उनके खातों में धन देना शुरू कर दिया। देखते ही देखते, गरीबों के घर की दुनिया बदल गयी।

गरीबों के दुःख दर्द कम होने की हकीकत तो हर रोज समाचार पत्रों की सुर्खियां बनती हैं, लेकिन आंकड़े इसके ठोस गवाह हैं।

आज गरीबों के पास खाते हैं –आज देश में गरीबों के पास 29.48 करोड़ जन धन खाते हैं और 111 करोड़ लोगों के पास आधार संख्या, जो कुल आबादी का लगभग 98 प्रतिशत है। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। इसके अतिरिक्त इनके पास 107 करोड़ मोबाइल कनेक्शन हैं। 

गरीबों के खातों में सरकारी धन सीधे पहुंचता है– सरकार की तरफ से गरीबों को रोजगार, पेंशन, स्कॉलरशिप, गैस सब्सिडी और अन्य कामों के लिए अलग-अलग योजनाओं के जरिए धन दिया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी की DBT योजना आने से पहले इन योजनाओं से पैसा सरकारी विभाग के कर्मचारी, गरीबों में बांटते थे। इस बंटवारे में कुछ ही हिस्सा गरीबों के हाथ लगता था, बाकी का सारा हिस्सा सरकारी तंत्र हड़प जाता था। इससे गरीबों का हक तो मारा ही जाता था, भ्रष्टाचार भी बेहिसाब बढ़ रहा था। एक बार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने एक जनसभा में कहा था कि दिल्ली से 1 रुपया चलता है तो गरीबों को 15 पैसे मिलते हैं। उनके कहने का मतलब था कि सरकारी योजनाओं का 85 प्रतिशत धन सरकार के अधिकारी खा जाते हैं।

DBT से जुडे गरीबों की संख्या- अधिक संख्या में गरीबों का इस योजना से जुड़ना, इस योजना से गरीबों को मिल रहे वास्तविक लाभ का अपने आप में एक सबूत है। 2013-14 में इस योजना से जुड़े गरीबों की संख्या मात्र 10.71 करोड़ थी, जो अगस्त 2017 में बढ़कर 41.63 करोड़ हो चुकी है।

DBT से जुड़ी गरीबों की सरकारी योजनाएं -आज स्थिति बदल चुकी है। सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों का धन गरीबों के खातों में सीधे पहुंच रहा है। साल दर साल इन योजनाओं की संख्या बढ़ती ही जा रही है। 2014 में जहां मात्र 28 योजनाओं का धन सीधे खातों में जाता था, आज इन योजनाओं की संख्या 314 तक पहुंच चुकी है। इनमें रोजगार, पेंशन, छात्रवृत्ति, गैस सब्सिडी और अन्य तमाम तरह की सरकारी योजनाएं शामिल हैं। 2014 से 2017-18 के बीच योजनाओं की संख्या में 1000 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह अपने आप में इस योजना की सफलता की कहानी कहती है।

DBT के जरिए गरीबों तक पहुंचता धन- इन 314 योजनाओं के जरिए इस वित्त वर्ष में अगस्त माह तक लगभग 33,370 करोड़ रुपये, गरीबों के बैंक खातों में डाले जा चुके हैं। सरकार ने 2014-17 के बीच, तीन सालों में 2,17,242.53 करोड़ रुपये दिये हैं। हर साल गरीबों के खाते में पहुंचने वाले धन में हो रही लगातार बढ़ोत्तरी, इस योजना की कामयाबी का एक और ठोस सबूत है। 2014 से 2017-18 के बीच गरीबों तक पहुंचने वाले धन में 912 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

गरीबों की योजनाओं में भ्रष्टाचार पर लगी लगाम– लगभग 42 करोड़ गरीबों के इस योजना के जुड़ जाने से, सरकारी विभाग के अधिकारियों का हस्तक्षेप एकदम खत्म सा हो गया है। भ्रष्टाचार के मूल कारण का अंत होते ही सरकारी खजाने को मात्र दो सालों में ही 57,029 करोड़ रुपये का फायदा हुआ। अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि यह DBT योजना लागू न हुई होती तो 57,029 करोड़ रुपये से सरकारी अधिकारियों की जेब गर्म हो चुकी होती। करीब छह दशक के कांग्रेस के शासन में गरीबों का कितना धन भ्रष्टाचार में लूटा गया है, उसको समझने के लिए इन दो सालों की सरकारी बचत का आंकड़ा ही काफी है। 2015-16 के दौरान DBT से सरकारी खजाने को 36,144 करोड़ रुपये की बचत हुई वहीं 2016-17 में 20,885 करोड़ रुपये की बचत हुई।

जब गरीबों के जन धन खातों में सरकार की ओर से आर्थिक सहायता पहुंचती है तो उनको एहसास होता है कि देश में उनकी अपनी सरकार है, जो उनका हर संकट में ख्याल रखती है। प्रधानमंत्री मोदी की इस DBT योजना ने गरीबों के चेहरे पर मुस्कराहट ला दी है, जिसकी कल्पना महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के समय की थी।

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