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प्रधानमंत्री मोदी का मत : सनातन संस्कृति में है संसार की समस्याओं का समाधान

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स्वामी विवेकानंद का वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अपने अल्प जीवन काल में ही विश्व समुदाय को न केवल सार्वभौम सनातन संस्कृति से परिचित करवाया, बल्कि उससे जोड़ा भी। सनातन संस्कृति की सोच को विस्तार देने की प्रक्रिया आज के नरेन्द्र… यानि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कर रहे हैं। जब से उन्होंने देश की बागडोर अपने हाथों में ली है, तब से सनातन संस्कृति की शिक्षा को आधार मानते हुए इसके प्रसार के लिए वे ‘अग्रदूत’ की भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। पीएम मोदी न केवल सनातन संस्कृति के ज्ञान को माध्यम बनाकर विश्व समुदाय को जीवन जीने का नवीन मार्ग बता रहे हैं, बल्कि भारत को एक बार फिर विश्वगुरु के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

प्रधानमंत्री मोदी अक्सर इस बात को सबके सामने रखते आए हैं कि हमारी सनातन संस्कृति में विश्व की सभी वर्तमान समस्याओं का भी समाधान है। उन्होंने अपने इस दृष्टिकोण को ‘माय आइडिया ऑफ इंडिया’ के रूप में कई बार संसार के समक्ष भी रखा है।

‘वेद ज्ञान’ से दूर होगी जलवायु परिवर्तन की समस्या
”विश्व की हर परंपरा ने सूर्य को महत्व दिया है। भारतीय परंपरा में वेदों में सूर्य को विश्व की आत्मा और जीवन का पोषक माना गया है। आज जब हम जलवायु परिवर्तन के खतरे से जूझ रहे हैं, ऐसे में हमें इस प्राचीन विचार से आगे का मार्ग ढूंढने की जरूरत है।”

11 मार्च, 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन की समस्याओं से जूझ रहे विश्व के सामने सनातन संस्कृति द्वारा इस समस्या का समाधान बताया। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करने से जलवायु परिवर्तन की समस्या से मुक्ति मिल सकती है।

‘योग सूत्र’ से स्वस्थ होगा सारा संसार
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः … अर्थात सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त रहें। मूल रूप से गरुड़ पुराण से लिए गए इस नैतिक ज्ञान को आधार मानते हुए ही प्रधानमंत्री मोदी ने ‘योग’ को अपनाने का आह्वान किया। हर वर्ष 21 जून को संयुक्त राष्ट्र संघ ने योग दिवस घोषित कर दिया। आज सारा संसार सनातन संस्कृति के इस योग सूत्र से स्वस्थ होने की राह पर अग्रसर है।

‘सर्वधर्म समभाव’ से दुनिया में होगी शांति
सत्य, अहिंसा, करुणा, समन्वय, सर्वधर्म समभाव… ऐसे अनेकों तत्व सनातन संस्कृति के आधार हैं। ये ही वे तत्व हैं जिन्होंने बाधाओं के ‍बीच भी हमारी संस्कृति की निरन्तरता को अक्षुण्ण बनाए रखा है। अगर दुनिया सर्व धर्म समभाव यानि सभी धर्मों का सम्मान करने लगे तो संसार में धर्म के नाम पर होने वाले विवाद अवश्य खत्म हो जाएंगे।

‘वसुधैव कुटुम्बकम’ से एक हो जाएगी दुनिया
वसुधैव कुटुम्बकम सनातन धर्म का मूल संस्कार और विचारधारा है। ‘महा उपनिषद’ में उद्धृत इस कथन का अर्थ है- धरती ही परिवार है। यह वाक्य भारतीय संसद के प्रवेश कक्ष में भी अंकित है।

अयं बन्धुरयं नेतिगणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥
उदारचरितानांतु वसुधैव कुटुम्बकम्। ।
इसका अर्थ है- ”यह अपना बन्धु है और यह अपना बन्धु नहीं है, इस तरह की गणना छोटे चित्त वाले लोग करते हैं। उदार हृदय वाले लोगों की तो सम्पूर्ण धरती ही परिवार है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ को अपनी विदेश नीति का मूल आधार बनाया है। उनकी इस नीति को वैश्विक मान्यता मिल रही है और पूरी दुनिया इस अवधारणा को अपनाने की राह पर अग्रसर है। 

‘अहिंसा परमो धर्मों’ से रुकेगा कत्लेआम
‘अहिंसा परमो धर्मः’ श्लोक के व्यापक अर्थ हैं। समस्त मानव जाति के पावन ग्रंथ ‘महाभारत’ के अनुशासन पर्व में यह उद्धृत है। पूरी दुनिया में आज जिस तरह से हिंसा का वातावरण है और धर्म के नाम पर मार काट मची हुई है, इससे मुक्ति का रास्ता इस एक वाक्य में छिपा हुआ है। 

‘दरिद्र’ को ‘नारायण’ मानने से दूर होगी गरीबी
गरीब और वंचित वर्ग की सेवा को ही सनातन संस्कृति में सर्वोच्च धर्म माना गया है। प्रधानमंत्री मोदी अक्सर इस बात को वैश्विक मंचों पर दोहराते रहते हैं। अफ्रीकी देशों के साथ उन्होंने जिस तरह का नाता बनाया है उसके मूल में यही बात छिपी है।

‘नारी तू नारायणी’ से सशक्त होंगी महिलाएं
जन्म, पालन-पोषण और दिशा सब आप से तो है, आपसे ही तो हम हैं वरना हमारी अस्तित्व कहां? … नारी तू नारायणी, वाक्य को उद्धृत करते हुए अक्सर प्रधानमंत्री कहते हैं कि स्त्री शक्ति को सशक्त करना आवश्यक है नहीं तो हमारे अस्तित्व पर खतरा है। उनकी बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाओं में इसकी झलक देखी जा सकती है।

दूसरों की पीड़ा समझना ही असली शक्ति
वैष्णव जन तो तेने कहिए जे, पीड़ पराई जाने रे… गुजरात के संत कवि नरसी मेहता द्वारा रचित भजन है। ये हमारी सनतान संस्कृति का जीवन दर्शन भी है।

अच्छे विचार चारों ओर से आने चाहिए
आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः। यानि हमारे पास चारों ओर से ऐसे कल्याणकारी विचार आते रहें जो किसी से न दबें, उन्हें कहीं से बाधित न किया जा सके एवं अज्ञात विषयों को प्रकट करने वाले हों। प्रधानमंत्री पूरी दुनिया में घूम-घूम कर अच्छे आइडिया और अच्छी बातों के भारतीय संदर्भ में उपयोगिता देखते हैं। अपने विदेश दौरों में अक्सर वे ऐसी जगहों पर जाते हैं जहां से अपने देश के लिए कुछ ले आ पाएं।

सत्य की हमेशा होती है जीत
सत्यमेव जयते… मुंडकोपनिषद से लिया गया यह वाक्य स्पष्ट करता है कि सत्य की ही जीत तय है। वेदान्त एवं दर्शन ग्रंथों में जगह-जगह सत् असत् का प्रयोग हुआ है। सत् शब्द उसके लिए प्रयुक्त हुआ है, जो सृष्टि का मूल तत्त्व है, सदा है, जो परिवर्तित नहीं होता, जो निश्चित है। प्रधानमंत्री मोदी भी अपने जीवन दर्शन में इसे अहम स्थान देते हैं। दरअसल राजनीतिक जीवन में ही उन्हें जितनी झंझावतें झेलनी पड़ी हैं उतनी शायद ही किसी राजनीतिज्ञ ने झेली हों, परन्तु जीत सत्य की ही हुई है।

बहरहाल किसी भी देश की सबसे बड़ी सफलता तब होती है, जब उसकी संस्कृति को दूसरे देश भी अपनाएं। चीन जैसे देश भी भारत की सांस्कृतिक ताकत को मान चुका है। वैश्विक समुदाय का सनातन संस्कृति की ओर आकर्षण यह साबित करता है कि आज जितनी भी समस्याएं विद्यमान हैं उसका निराकरण हमारी सनातन संस्कृति में अंतर्निहित है।

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