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प्रधानमंत्री मोदी ने बाबासाहेब को दिया वास्तविक सम्मान

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अगर बाबासाहेब अम्बेडकर नहीं होते तो मैं यहां तक नहीं पहुंचता। ये उनके संविधान की ही ताकत है जो देश के सभी लोगों को विकास के समान अवसर देता। भेदभाव से ग्रसित बाबासाहेब ने संविधान में सभी के विकास का ध्यान रखा। बाबासाहेब अम्बेडकर परमात्मा के रूप थे। उनकी आलोचना करने वाले उन्हें नहीं समझते हैं। – नरेन्द्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अक्सर अपने संबोधन में डॉ भीमराव रामजी अम्बेडकर का जिक्र करते हैं। उन्हें अपनी प्रेरणा मानते हैं और उनके बताए हुए मार्ग का अनुसरण भी करते हैं। वे कहते हैं,  ”बाबासाहेब अम्बेडकर वो मनीषी थे, वो ताकत थे जिन्होंने आज हमें इतना बड़ा सामाजिक दृष्टिकोण दिया, आर्थिक दृष्टिकोण दिया, वैधानिक दृष्टिकोण दिया, और एक प्रकार से समाज और राष्ट्र संचालन की जो मूलभूत विधाएं है उन मूलभूत विधाओं के फाउंडेशन में उन्होंने अपनी ताकत जोड़ दी थी।”

हालांकि कई अवसरों पर प्रधानमंत्री अफसोस भी जताते हुए कहते हैं, ”देश में आजादी के बाद से लगातार महज एक परिवार को राजनीतिक लाभ पुहंचाने के लिए बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर को भुलाने की कोशिश की गई।  लेकिन बाबासाहेब की अद्भुत शक्ति थी कि उनके जाने के बाद बरसों तक राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को मिटाने का प्रयास के बावजूद उनके विचारों को लोग जनमानस के चिंतन से नहीं हटा पाए।”

तमाम मुश्किलें झेलने के बाद भी डॉ. अम्बेडकर के मन में किसी भी समाज या वर्ग के प्रति दुर्भावना नहीं थी, अंत्योदय की अवधारणा के साथ ही अखंड भारत की परिकल्पना थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी बाबासाहेब के आचरण और कहे गए शब्दों का बड़ा प्रभाव है, इसलिए वे अपनी नीतियों में अंत्योदय को प्राथमिक स्थान देते हैं। वे लोगों को अनुदानित करने से अधिक उन्हें सशक्त बनाने में, बराबरी दिलाने में, समान अधिकार दिलाने में विश्वास करते हैं और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हैं।

बहरहाल आइये हम देखते हैं प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्र सरकार में आने के बाद बाबासाहेब अम्बेडकर के सम्मान का किस तरह से ध्यान रखा-

महू में बाबा साहब को श्रद्धांजलि देने वाले पहले पीएम
14 अप्रैल, 2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयंती के मौके पर उनके जन्म स्थान मध्य प्रदेश के महू में उन्हें श्रद्धांजलि दी। ऐसा करने वाले वे देश के पहले प्रधानमंत्री बने जो उनके जन्म स्थान पर गए। इस मौके पर पीएम ने कहा कि वो भाग्यशाली हैं कि उन्हें उस जमीन पर आकर अम्बेडकर को सलाम करने का मौका मिला, जहां उन्होंने जन्म लिया था। उन्होंने कहा, ”बाबासाहेब अम्बेडकर एक व्यक्ति नहीं थे, वो एक संकल्प का नाम थे।” गौरतलब है कि 2008 में शिवराज सिंह सरकार ने यहां एक स्मारक बनवाया है जो दर्शनीय है।

लंदन में डॉ. अम्बेडकर के बंगले का अधिग्रहण किया
प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर नवंबर, 2015 में भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर का लंदन स्थित वह तीन मंजिला बंगला खरीद लिया गया जिसमें वे 1920 के दशक में एक छात्र के तौर पर रहे थे। महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने इस बंगले की कीमत दी और 2050 वर्ग के इस इस मकान को एक अंतरराष्ट्रीय स्मारक में तब्दील कर दिया गया है। इसे शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

BHIM ऐप के जरिये बाबा साहब को दिया सम्मान
30 दिसंबर, 2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी के बाद देश बदलने की जो शुरुआत भीम ऐप से की, उसे भी बाबा साहेब के नाम पर ही समर्पित किया। उन्होंने कहा, ”आज एक नई ऐप लांच की गयी है जिसका नाम भीम रखा गया है। यह शब्द बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के नाम से लिया गया है। उन्होंने कहा बाबासाहेब बेहद दूरदर्शी थे, उन्होंने रुपये पर थीसीस लिखी थी। उन्होंने विश्व के सामने भारतीय मुद्रा नीति को प्रस्तुत किया। रिजर्व बैंक का जन्म भी उन्हीं के विचारों से प्रोत्साहित होकर हुआ।  आजाद भारत में राज्य और केंद्र के बीच आर्थिक व्यवस्था कैसे चले। पैसों को बंटवारा कैसे हो इसके लिए फाइनेंस की कल्पना भी उनके विचारों का परिणाम है।”

यूएन में पहली बार मनाई गई बाबासाहेब की जयंती
प्रधानमंत्री मोदी की पहल से 14 अप्रैल 2016 को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत रत्न बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयंती मनाई गई। इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान और सेवाओं का उल्लेख किया गया। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की प्रशासक हेलन क्लार्क ने कहा,  ”डॉ. अम्बेडकर जानते थे कि असमानता लोगों के कल्याण की दिशा में बुनियादी चुनौती है।” संयुक्त राष्ट्र संघ में पहली बार बाबासाहेब पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया  था।

भीमराव अम्बेडकर अंतराष्ट्रीय केंद्र का शिलान्यास
11 अक्टूबर, 2015 को प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र में अम्बेडकर स्मारक की आधारशिला रखी। मुंबई के इंदु मिल के साढ़े 12 एकड़ में बनने वाले इस स्मारक पर 4 अरब रुपये से अधिक खर्च होंगे।   

अम्बेडकर से जुड़े स्थलों को ‘पंचतीर्थ’ के रूप में विकास    
प्रधानमंत्री मोदी की पहल से आंबेडकर के जीवन से जुड़े पांच प्रमुख स्थलों को ‘पंचतीर्थ’ के तौर पर संरक्षित करने की तैयारी जारी है। अम्बेडकर की जन्मस्थली महू, मुंबई में इन्दु मिल चैतन्य भूमि पर स्मारक,  नागपुर में दीक्षास्थल, दिल्ली में बाबासाहेब के महापरिनिर्वाण स्थल और 15 जनपथ पर स्मारक को इस पंचतीर्थ में योजना में रखकर विकास किया जा रहा है।

दिल्ली में बनाया अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर
7 दिसंबर, 2017 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नयी दिल्ली में बी आर अम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय केन्द्र का उद्घाटन किया। डीएआईसी में डॉ. अम्बेडकर सेंटर फार सोशियो-इकोनामिक ट्रासफोर्मेशन केंद्र भी है जो सामाजिक और आर्थिक अध्ययन के क्षेत्र में अनुसंधान का एक बेहतरीन केंद्र होगा। साथ ही ये एक विशेषज्ञ थिंक टैंक के रूप में भी काम करेगा जिसमे समावेशी विकास और सामाजिक-आर्थिक मामलों पर ध्यान दिया जाएगा। 192 करोड़ रूपए की लागत से तैयार ये केन्द्र रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हो गया। डीआईएसी की आधारशिला अप्रैल 2015 में प्रधानमंत्री ने रखी थी और इसका निर्माण सवा तीन एकड़ क्षेत्र में किया गया है।

बाबासाहेब के सम्मान में जारी किए सिक्के
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के 125वीं जयन्ती वर्ष समारोह के तहत 125 रूपए और 10 रूपए के स्मारक सिक्के जारी किए।

नदी जोड़ो अभियान बाबासाहेब का सपना
प्रधानमंत्री मोदी अक्सर बंदरगाहों का विकास, जल परिवहन और नदी जोड़ो योजना के लिए उत्सुक हैं तो इसके पीछे एक कारण बाबासाहेब की दृष्टि भी है। पीएम मोदी कहते हैं- ”हम नदी जोड़ो का अभियान चलाते है river grid की बात करते हैं आज हिन्दुस्तान में एक महत्वपूर्ण issue है। बाबा साहब अंबेडकर ने उस जमाने में पानी को ले करके कमिशन के निर्माण की कल्पना की थी। यानि कोई दीर्घद्रष्टा व्यक्ति किस प्रकार से आगे सोच सकता है।”

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