Home तीन साल बेमिसाल स्वच्छता की सिद्धि, स्वच्छाग्रही देशवासियों की सिद्धि है- पीएम मोदी

स्वच्छता की सिद्धि, स्वच्छाग्रही देशवासियों की सिद्धि है- पीएम मोदी

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2 अक्टूबर को ‘स्वच्छ भारत अभियान’ तीन साल पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता के प्रति देश में आई जागरूकता की सराहना की। पीएम मोदी ने भरोसा जताया कि स्वच्छता को लेकर देश में आई जन-जागृति के चलते महात्मा गांधी की 150वीं जयंती यानि 2019 तक इसे और अधिक सफलता मिलेगी। पीएम ने कहा कि, देशवासियों की मूल प्रकृति स्वच्छता को पसंद करने की है। लेकिन जब करने की बारी आती है तो प्रश्न उठ खड़ा होता है कि यह दायित्व किसका है ? उन्होंने कहा कि, अगर 1000 महात्मा गांधी आ जाएं, एक लाख मोदी मिल जाएं, सभी मुख्यमंत्री मिल जाएं, सभी सरकारें भी मिल जाएं तो भी स्वच्छता का सपना नहीं पूरा हो सकता । लेकिन अगर सवा सौ करोड़ देशवासी मिल जाएं तो स्वच्छता का सपना पूरा होकर के रहेगा।

श्रेष्ठ भारत का शस्त्र है स्वच्छाग्रह, इसके केंद्र में हैं स्वच्छाग्रही- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा है कि, अगर समाज की शक्ति को स्वीकार करके चलें, जन-भागीदारी को साथ लेकर चलें, सरकार की भागीदारी को कम करके चलें, तो स्वच्छता का आंदोलन तमाम रुकावटों के बाद भी सफल होकर रहेगा। उन्होंने कहा कि, कुछ लोग अभी भी इसका मजाक उड़ाते हैं। लेकिन उन्हें विश्वास है कि 5 साल आते-आते देश की मीडिया उनकी खबरें छापेगी जो अभी इसके खिलाफ हैं। पीएम ने कहा कि अब यह अभियान न बापू का है और न ही सरकारों का है। आज स्वच्छता अभियान देश के सामान्य मानव का अपना सपना बन चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अबतक जो भी सिद्धि मिली है वह सरकार की सिद्धि नहीं है। अगर सिद्धि मिली है तो यह स्वच्छाग्रही देशवासियों की सिद्धि है। उन्होंने कहा कि बापू के स्वराज का शस्त्र था सत्याग्रह। श्रेष्ठ भारत का शस्त्र है स्वच्छाग्रह। स्वराज के केंद्र में सत्याग्रही थे और स्वच्छाग्रह के केंद्र में स्वच्छाग्रही हैं।

बच्चे स्वच्छता के सबसे बड़े एंबेसडर बन गए हैं- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि, स्वच्छता की रैंकिंग के चलते नेताओं एवं अफसरों पर समाज का सकारात्मक दबाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज घर-घर के छोटे बच्चे स्वच्छता के सबसे बड़े एंबेसडर बन गए हैं। वह घर में ही गंदगी देखने पर बड़ों को टोकने लगे हैं, जिससे लोगों के स्वभाव में परिवर्तन आने लगा है। उन्होंने विरोधियों से आग्रह किया कि, उनको भला-बुरा कहने के हजार विषय मिलेंगे, लेकिन स्वच्छता को लेकर राजनीति नहीं करें। पीएम ने कहा कि स्वच्छता के लिए वैचारिक आंदोलन भी जरूरी है। इसीलिए इसे फिल्मों, क्रियटिविटी,निबंध के माध्यम से वैचारिक मजबूती देने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि तीन सालों में स्वच्छता के प्रति लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले स्कूलों में बच्चों से सफाई का काम देखकर लोग भड़क जाते थे। लेकिन आज बच्चे स्कूल में स्वच्छता से जुड़ते हैं तो टीवी की बड़ी खबर बन जाती है। उन्होंने स्वच्छता के प्रति जागरूता बढ़ाने के लिए मीडिया की भी जमकर सराहना की।

मंदिर में भी तो सभी लोग नहीं जाते- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि, गांव में मंदिर होता है, लेकिन सभी लोग वहां भी नहीं जाते। मस्जिद और गुरुद्वारों में भी सभी लोग नहीं जाते। उन्होंने कहा कि मनुष्य का स्वभाव ही ऐसा है, यह समाज का स्वभाव है। सभी लोग स्वच्छता अभियान से जुड़ जाएं ऐसा नहीं सोचा जा सकता। उन्होंने कहा कि आंकड़ों के हिसाब से भी लगता है कि स्वच्छता अभियान की गति भी ठीक है और इसकी दिशा भी ठीक है। आज बच्चियां स्कूलों में तभी एडमिशन कराती हैं जब उनके लिए ट्वायलेट बना हुआ हो। प्रधानमंत्री ने यूनिसेफ के आकलन का हवाला देकर कहा है कि, एक परिवार में ट्वायलेट नहीं होने के चलते बीमारी पर सालाना 50 हजार रुपये औसत खर्च हो जाते हैं। स्वच्छता के चलते एक परिवार के 50-50 हजार रुपये बच सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने साफ किया कि 2022 तक दुनिया में देश को आगे बढ़ा के रखना है। उन्होंने कहा कि चुनौतियों के लिए देश को यूं ही नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार सिर्फ वाहवाही वाले काम हाथ में नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि तीन साल पहले ‘स्वच्छ भारत अभियान’ शुरू होने पर भी उनकी बहुत आलोचना शुरू की गई थी। गांधी जयंती की छुट्टी खराब करने जैसे आरोप लगाए गए थे। पीएम मोदी ने कहा कि, “मेरा स्वभाव है कि बहुत कुछ चुपचाप झेलता हूं। धीरे-धीरे अपनी कैपिसिटी बढ़ा रहा हूं झेलने की।” उन्होंने कहा कि, स्वच्छता के प्रति लोगों को मां-बहनों की संवेदनाओं को समझने की जरूरत है। उन्होंने ‘स्वच्छता ही सेवा’ के तहत 15 दिनों में फिर से स्वच्छता को गति देने के लिए लोगों को बधाई दी। उन्होंने देशवासियों का आह्वान किया कि श्रेष्ठ भारत बनाने के लिए थोड़ा-थोड़ा स्वच्छता के कार्य में सबको जुटना होगा।

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