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प्रधानमंत्री मोदी से संवाद : पढ़िये देश की नींव और भविष्य को मजबूत करती 11 कहानियां

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को देश भर की आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ‘सरप्राइज गिफ्ट’ दिया। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं के लिए केंद्रीय प्रोत्साहन राशि दोगुनी करने और आशा हेल्पर को चार लाख का मुफ्त बीमा कवर देने की घोषणा की। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को केंद्र की ओर से मिलने वाली मानदेय राशि भी बढ़ा दी गई है। अब उन्हें 3000 की जगह 4500 रुपये,  2250 की जगह 3500 रुपये मिलेंगे। इसके अलावा आंगनबाड़ी सहायिकाओं को 1500 की जगह 2250 रुपये मिला करेंगे। पीएम मोदी ने बताया कि ये राशि अक्टूबर महीने के मानदेय के साथ जुड़कर मिलेगी।

नरेन्द्र मोदी ऐप के माध्यम से एएनएम, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी से संवाद करते हुए अपने अनुभव भी शेयर किए, जिन्हें पीएम मोदी ने ध्यान से सुना और मार्गदर्शन भी दिए। 

शिक्षा नहीं, समझदारी से बनता है काम

झारखंड में सरायकेला की उर्माल की रहने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मनीता देवी ने कहा कि उसने प्रसव के दौरान आपातकालीन सेवा प्रदान कर मां और बच्चे की जान बचाई।

पूरा होगा एनीमिया मुक्त भारत का संकल्प

कर्नाटक में यादगीर की मलम्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना से मां और बच्चों को भरपूर फायदा हो रहा है। इससे मां और बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद मिल रही है।

विचारों में बदलाव से स्वस्थ होगा भारत

सिलवासा की नीता कल्पेश पंडवरिया ने बताया कि कैसे आयोडिन युक्त नमक को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाई। प्रधानमंत्री ने कहा विचारों में बदलाव लाने से लोगो में जागरूकता आएगी।

जन जागरण से खत्म होगी एनीमिया

राजस्थान में बारा की रुखसाना ने बताया कि कैसे चार प्वाइंट तक कम हिमोग्लोबीन वाली महिला की जान बचाई गई। परिजनों को समझाकर उनका इलाज शहर के राजकीय अस्पताल में करवाया।

सामाजिक संस्कार से होगा समाज परिवर्तन

छत्तीसगढ़ में राजनंदगांव की शांति साहू ने बताया कि कैसे उन्होंने पोषण अभियान को त्योहारों से जोड़ दिया है। रक्षा बंधन के दिन रक्षा सूत्र बंधवा कर कुपोषण से मुक्ति का संकल्प दिलवाया।

सामूहिकता की होती है अपनी शक्ति

उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी की गायत्री दारापुरी ने बताया कि उन्होंने अपने क्षेत्र में 2000 मेले लगाए और 250 बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलवाया। पीएम मोदी ने इसे उपयोगी बताया।

डिजिटल इंडिया मूवमेंट को मिल रही ताकत

मध्य प्रदेश में सतना की फूलकली प्रजापति और रितु दत्ता ने बताया कि कॉमन एप्लीकेशन सेंटर यानि कैश मोबाइल से दस्तक कार्यक्रम के तहत बाल, सेहत सुरक्षा की पहुंच घर – घर तक हो गई है।  

पेपर लेस मूवमेंट से परफेक्ट टू वे कम्यूनिकेशन

तेलंगाना में खम्मन की नागमणि ने बताया कि मोबाइल मिल जाने से डेटा संग्रहण और हर घर को स्वास्थ्य सेवा देना आसान हो गया है। 15 से 20 रजिस्टर रखने का झंझट भी खत्म हो गया है।

प्रसूता में लौह शक्ति की न हो कमी

गुजरात में नर्मदा की माछी बेन और मनीषा बेन ने कहा कि उनका लक्ष्य माताओं को एनीमिया से मुक्ति दिलाना है। मोबाइल के जरिये ऑनलाइन ट्रेनिंग से जानकारी भी बढ़ी है।  

रुढ़ियों से मुक्ति दिलाता आधुनिक विज्ञान

महाराष्ट्र में नंदूरबार की अंजना मोहन परमार ने बताया कि कई किलोमीटर चलकर माताओं को प्रथम उपचार देती हैं। छह महीने में 1900 लोगों की जांच किया और स्वस्थ रहने का गुर सिखाया।

100 प्रतिशत टीकाकरण बड़ी उपलब्धि

लेह की जिग्मे दांगऊं ने बताया कि उनके क्षेत्र में आवागमन की कठिनाईयां हैं, लेकिन 100 प्रतिशत बच्चा इम्यूनाइज्ड है। एक साल के दौरान किसी भी जच्चे-बच्चे की मौत नहीं हुई है।

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