Home नरेंद्र मोदी विशेष बाबासाहेब के सपनों को साकार कर रही है सरकार: प्रधानमंत्री मोदी

बाबासाहेब के सपनों को साकार कर रही है सरकार: प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली के अलीपुर रोड में बाबासाहेब डॉ. बी आर अम्बेडकर की महापरिनिर्वाण भूमि पर बने डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय स्मारक का लोकार्पण किया। डॉ. अम्बेडकर के जीवन से जुड़ी यादों को संजोने वाले स्मारक के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने समारोह को संबोधित करते हुए देश के निर्माण में बाबासाहेब के योगदान को याद किया। श्री मोदी ने कहा कि देश के सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए आज बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है, देश को आज डॉ. अम्बेडकर नेशनल मेमोरियल के रूप में अनमोल उपहार मिला है। श्री मोदी ने कहा कि यह काम बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था, लेकिन स्वतंत्रता के बाद इतनी सरकारें आईं और किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। बाबासाहेब की जयंती से एक दिन पहले इस स्मारक का लोकार्पण उनके प्रति इस सरकार की अटूट श्रद्धा और प्रतिबद्धता को प्रकट करता है। यह स्मारक एक असाधारण व्यक्ति के असाधारण जीवन को दर्शाता है।

सरकार की कार्य संस्कृति का प्रतीक है अंबेडकर स्मारक
पीएम मोदी ने कहा कि स्मारक की यह इमारत भव्य भी है और दिव्य भी है। यह इस सरकार के कार्य करने की संस्कृति का भी प्रतीक है। उन्होंने बताया कि अटल की सरकार थी तब यहां इस जमीन पर नेशनल मेमोरियल की बात आरंभ हुई थी, लेकिन कांग्रेस सरकार के समय इस प्रोजेक्ट पर काम रुक गया। 2014 में एनडीए की सरकार बनने पर इसकी फाइलों को खोजा गया और एक बार फिर तेजी से काम शुरू किया गया। 26 मार्च 2016 को मेमोरियल के शिलान्यास के समय ही 2018 में बाबासाहेब की जयंती से पहले इसका लोकार्पण करने की इच्छा प्रकट की थी और आज यह अवसर भी आ गया। श्री मोदी ने कहा कि हमारी सरकार ने ऐसा वर्क कल्चर विकसित किया है कि जिसका शिलान्यास हम करेंगे उसका लोकार्पण भी हम करेंगे।

श्री मोदी ने पूर्व की सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व की सरकार में जवाबदेही की कमी थी, हमारी सरकार ने कार्य संस्कृति को पूरी तरह बदल दिया है। श्री मोदी ने तीन दिन पहले चंपारण में मधेपुरा की लोकोमोटिव इंजन फैक्ट्री के लोकार्पण का जिक्र करते हुए कहा कि इस प्रोजेक्ट को भी पूर्व की सरकार ने 7 वर्ष तक फाइलों में बंद करके रखा था, जिसे हमारी सरकार ने शुरू किया, और आज वहां दुनिया के सबसे बेहतरीन रेल इंजन का निर्माण शुरू हो गया है। श्री मोदी ने कहा कि बाबासाहेब ने कभी नहीं सोचा होगा कि देश को अटकाने, भटकाने और लटकाने की कार्यसंस्कृति मिलेगी। इस तरह का कृत्य देश के प्रति बड़ा अपराध है। श्री मोदी ने बताया कि केंद्र सरकार 9.5 लाख करोड की अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने का काम तेजी से कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘अभाव का रोना नहीं और प्रभाव से विचलित होना नहीं, यह मंत्र हर किसी के लिए ताकत बन जाता है। यह मंत्र बाबासाहेब ने अपने जीवन से दिया है। लक्ष्य का निर्धारण करना और उसे पाने के लिए पूरी ताकत लगा देना यही बाबासाहेब ने सिखाया है।‘ श्री मोदी ने दुनिया से 2030 तक टीबी खत्म करने के लक्ष्य को भारत में 2025 तक करने का भी जिक्र किया।

गरीबों, वंचितों, पिछड़ों को समान अधिकार दिला रही है सरकार- प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बाबासाहेब की विचारधारा के मूल में समाज में समानता स्थापित करना था। बाबासाहेब हमेशा कानून की समानता, अधिकार की समानता, मानवीय गरिमा की समानता, अवसर की समानता की बात उठाते रहे। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि आने वाली सरकारी संविधान का पालन कर जाति का भेद किए बिना चलनी चाहिए और इस सरकार में सब को समानता देने का प्रयास आप सभी महसूस करेंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि गरीबों, वंचितों, पिछड़ों, आदिवासियों को समान अधिकार दिलाना, सम्मान दिलाना बाबासाहेब का सपना था और सरकार इसी सपने को साकार करने के लिए काम कर रही है। श्री मोदी ने कहा कि सरकार समाज में दशकों से बने असंतुलन अपनी योजनाओं से खत्म करने का प्रयास कर रही है। जनधन योजना की बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश की आजादी के इतने वर्ष बाद भी करोड़ों लोगों के पास बैंक एकाउंट नहीं थे, आज जनधन योजना के तहत 31 करोड़ से अधिक खाते खुल चुके हैं। करोड़ों घरों में शौचालय नहीं होना भी एक सामाजिक असंतुलन था, जिसे सरकार दूर करने में लगी है। आज देशभर में 7 करोड़ शौचालय बनाए जा चुके हैं, जिनमें 2.25 करोड़ शौचालय ग्रामीण इलाकों में दलितों, गरीबों, आदिवासियों के घरों में बने हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज के दौर में किसी घर में बिजली नहीं होना भी सामाजिक अन्याय है। 2014 में जब सरकार बनी थी तब देश के 18 हजार गांवों में बिजली नहीं थी, आज लगभग सभी गांवों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है, सिर्फ 200 गांव बचे हैं। सौभाग्य योजना के तहत 4 करोड़ घरों में बिजली कनेक्शन देने का काम किया जा रहा है। मुद्रा योजना दशकों के अन्याय को खत्म करने का काम कर रही है। मुद्रा योजना के तहत बिना बैंक गारंटी के लोन का विकल्प दिया गया है। इस योजना के माध्यम से अब तक 12 करोड़ से अधिक लोन स्वीकृत किए गए हैं। मुद्रा योजना में 2 करोड 16 लाख से ज्यादा दलित लाभार्थियों को बिना गारंटी का लोन मिला है और आज वो अपने पैरों पर खड़े हैं। पीएम मोदी ने बताया कि आयुष्मान योजना भी समाज में असमानता को खत्म करने का काम करेगी। इसके तहत देश के 10 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों यानी करीब 50 करोड़ आबादी को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा। ग्रामीण महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत देश में 3.5 करोड़ से ज्यादा गैस कनेक्शन मुफ्त दिए जा चुके हैं और इसका लक्ष्य बढ़ाकर 8 करोड़ कर दिया गया है।

दलितों पर अत्याचार रोकने के कानून को सख्त किया
श्री मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार कानून के माध्यम से भी सामाजिक संतुलन लाने का प्रयास कर रही है। सरकार ने दलितों पर होने वाले अत्याचर रोकने के लिए कानून को और सख्त कर दिया गया। पहले सिर्फ 22 अपराधों के तहत कार्रवाई होती थी, जिसे बढ़ा कर 47 कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने इस कानून को संशोधित किया था, तब आरोपियों को अग्रिम जमानत नहीं देने का प्रावधान था, उसे यथावत रखा गया है। प्रधानमंत्री ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने जब इससे जुड़ा फैसला दिया तो सरकार की तरफ से तुरंत पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई। कोर्ट के फैसले के बाद याचिका दायर करने में देरी पर श्री मोदी ने कहा कि 6 दिन की छुट्टी होने की वजह से देरी हुई, जबकि इसके लिए कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने गुमराह करने की कोशिश की। श्री मोदी ने आश्वस्त किया कि जिस कानून को सरकार ने सशक्त किया है उसे कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि एससी-एसटी पर अत्याचार की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट का गठन किया जा रहा है। सरकार ने पिछड़ी जातियों के लिए कमीशन का गठन किया है। सरकार चाहती हैं अति पिछड़ों को आरक्षण का और ज्यादा फायदा मिले। पहले क्रीमीलेयर 6 लाख थी, इसे बढ़ाकर 8 लाख प्रतिवर्ष किया गया है ताकि पिछड़े वर्ग के और ज्यादा लोगों को ओबीसी आरक्षण का फायदा मिले।

लोकार्पण के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय स्मारक का बारीकी से निरीक्षण किया। आपको बता दें कि दिल्ली के अलीपुर रोड इलाके में स्थित इस जगह को बाबासाहेब की महापरिनिर्वाण भूमि कहा जाता है। यह स्मारक करीब 7400 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है। इसके निर्माण में 100 करोड़ रुपये की लागत आई है। भारतीय संविधान को दर्शाती यह देश की पहली किताबनुमा इमारत है। इस स्मारक में एक आधुनिक संग्रहालय है, जिसमें डॉ. बी आर अम्बेडकर के जीवन और कार्यों को आधुनिक तकनीक के जरिए दिखाया गया है। स्मारक के बाहर बौद्ध धर्मों के प्रतीक चिन्हों को दर्शाया गया है। प्रदर्शिनी कक्ष में उनके जीवन से जुड़ी वस्तुओं और पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया है। यह स्मारक मोदी सरकार द्वारा बाबासाहेब से जुड़े पंच तीर्थों में से एक है।

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