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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की सामरिक क्षमता का विस्तार जारी, बेड़े में जल्द शामिल होगी ‘अग्नि-5’

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सामरिक शक्ति को चौतरफा विस्तार देने में लगा है। इसी क्रम में अब अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से तैयार और लंबी दूरी तक मार करने वाली अग्नि-5 मिसाइल जल्द ही देश के हथियारों के बेड़े में शामिल होने जा रही है।

चीन के कई शहरों तक लक्ष्य भेदने में सक्षम
परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इस अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल में चीन और पाकिस्तान सहित आधे यूरोप को निशाना बनाने की क्षमता है। यह मिसाइल चीन के बीजिंग, शंघाई, ग्वांगझू और हांगकांग तक मार करने की क्षमता रखती है। सेना में इसके शामिल होने भर से चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों की चिंता कहीं ज्यादा बढ़ सकती है। गौर करने वाली बात है कि अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली बहुत कम देशों के पास है, जिनमें पाकिस्तान शामिल नहीं है।

परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता कहीं अधिक
अग्नि-5, अग्नि सीरीज की मिसाइलें हैं जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि परमाणु हथियार ले जाने की इसकी क्षमता दूसरी अन्य मिसाइलों से कहीं अधिक है। अग्नि-5 की मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर तक की है। 50 टन वजन वाली इस मिसाइल की लंबाई 17 मीटर और चौड़ाई 2 मीटर है। अग्नि-5 अपने साथ एक टन से अधिक वजन के परमाणु हथियार ले जा सकती है।

अग्नि-5 की खास बातें:

  • वजन 50 टन 
  • लंबाई 17 मीटर, चौड़ाई 2 मीटर
  • एक टन से अधिक परमाणु हथियार वहन की क्षमता
  • 5,000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता

जल्द ही सौंपी जाएगी पहली खेप
अग्नि-5 मिसाइल स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड ( SFC) का हिस्सा होगी। बेड़े में शामिल किए जाने से पहले इसके कुछ और परीक्षण पूरे किए जाएंगे और फिर पहली खेप जल्द ही SFC को सौंप दी जाएगी। इसके अब तक के सभी छह परीक्षण सफल रहे हैं। ओडिशा के तट से पिछले महीने इसका छठा सफल परीक्षण किया गया था।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ेगा भारत का दबदबा
अग्नि-5 के सेना में शामिल होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का दबदबा और बढ़ने वाला है। भारतीय सेना के पास अभी चार कैटेगरी की अग्नि मिसाइलें हैं। इनकी प्रहारक क्षमता 700 किलोमीटर से लेकर 3,500 किलोमीटर तक है। भारत के पास पहले से अग्नि-1, अग्नि-2 और अग्नि-3 मिसाइलें हैं। इन्हें पाकिस्तान के खिलाफ बनाई गई रणनीति के तहत तैयार किया गया है। वहीं अग्नि-4 और अग्नि-5 को चीन की चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

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