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समाज विरोधी लोग फिर से देश को जाति के नाम पर बांटने का षड़यंत्र कर रहे हैं- प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि संतों-महात्माओं और महापुरुषों के दशकों के प्रयास से देश जाति के बंधनों से मुक्ति की ओर बढ़ रहा है। लेकिन, मुट्ठीभर लोग देश का माहौल बिगाड़ने के प्रयास में लगे हैं। उन्होंने कहा कि अगर सच्चे अर्थों में विवेकानंद को मानना है तो दिल से जाति के जहर को निकालना होगा। विवेकानंद जयंती और राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर उन्होंने कर्नाटक के बेलगावी में वीडियो कांफ्रेंस से सर्वधर्म सभा को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।

भारत का नौजवान कुछ मुट्ठीभर लोगों के बहकावे में नहीं आने वाला है- प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि श्रीसिद्धलिंग महाराज जी की प्रेरणा से बेलगावी के विरक्त मठ के रूप में जाना जाने वाले मठ ने दशकों जाति के हर तरह के भेदभाव को खत्म करने का काम किया है। ऐसे अनगिनत मठों के दशकों के प्रयासों से देश जाति के बंधन से मुक्त होने की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि,” आप जैसे लाखों-करोड़ों लोगों की इस मेहनत पर कुछ समाज विरोधी लोगों ने अपनी नजर टिका दी है। ये लोग फिर से देश को जाति के नाम पर बांटने का षड़यंत्र कर रहे हैं।”

विवेकानंद को मानना है तो हमें माहौल बदलना होगा- प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री के मुताबिक आज की युवा पीढ़ी ऐसे लोगों को जवाब देकर रहेगी और जवाब दे रही है। देश में जातिवाद, कुरीतियां, अंधविश्वास खत्म करने का संकल्प लेने वाले ऐसे नौजवान न्यू इंडिया के सपने को साकार करने के लिए, संकल्प लेने वाले ऐसे नौजवान ही सच्चे अर्थ में विवेकानंद के विचार के दूत हैं। वे भारत के नए विक्रमी, पराक्रमी, विकासमान चेहरे का जीता-जागता सबूत हैं। प्रधानमंत्री ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि, हमें माहौल बदलना होगा। विवेकानंद को मानना है तो जाति का द्वेष-भेद, जातिवाद का जहर दिल से निकालना होगा।

स्वामी विवेकानंद ने जाति के भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद की थी- प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री ने बताया कि स्वामी विवेकानंद ने जाति के भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। उन्होंने देश के लोगों को दो टूक कहा था कि ज्ञान और दर्शन में दुनिया में तुमसे कोई महान नहीं होगा, पर व्यवहार में ऐसी निकृष्टता भी जगत में कोई नहीं करता होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सौ-सवा सौ साल पहले उन्होंने जो कहा वैसा कहने का साहस आज भी कोई नहीं दिखा पाता। प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक, “भारत से एकाकार थे विवेकानंद। भारत से एक रूप थे विवेकानंद। भारत के सुख-दुख में अपना सुख-दुख मानने वाले महापुरुष थे विवेकानंद। ” उन्होंने विदेशों में भारत को सपेरों और नटों का देश बताने वाले कुटिल प्रोपेगेंडा को नष्ट कर दिया था, दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाई। उनमें छुआछूत, भेदभाव , पाखंड को खंड-खंड करने का योद्धा भाव भी था और इसी भाव ने उन्हें एक योद्धा संन्यासी भी बनाया था।

प्रधानमंत्री के अनुसार महापुरुषों, संतों ने हमेशा देश में भरसक सामाजिक चेतना जगाने का प्रयास किया है। यहां ऐसे महान संत-मुनि हुए हैं जिन्होंने अपने जीवन का प्रयोग राष्ट्र निर्माण में किया है। उन्होंने सेवा को केंद्र में रखकर समाज सुधार किया, जो भी संकल्प लिया उसे सिद्ध करके दिखाया। श्री मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा पूरे विश्व को मानवता, लोकतंत्र, सुशासन, अहिंसा का संदेश दिया है और उसे जीकर दिखाया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि, “किसी खेत में, किसी कारखाने में, किसी स्कूल में, गली-मोहल्ले-नुक्कड़ में, देश की सेवा में जुटा हर व्यक्ति आधुनिक विवेकाननंद के रूप में एक छोटा सा रूप ही तो है जो भारत को इस समय स्वच्छ भारत मिशन को आगे बढ़ा रहा है। वही तो विवेकानंद के आदर्शों को आज के युग में जी रहा है। ” अंत में उपस्थित संतों का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि, क्या वो अगले दो वर्ष में कुछ हजार गांवों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने का संकल्प ले सकते हैं? LED बल्ब के लिए संकल्प ले सकते हैं? श्री मोदी ने कहा कि, अगर आप कदम बढ़ाएंगे तो लाखों विवेकानंद की शक्ति मिलेगी। अभी बेलगाम में 10 हजार विवेकानंद जुड़े हैं, तब लाखें विवेकानंद जुड़ जाएंगे।

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