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महिला सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध मोदी सरकार: 19 फरवरी से देशभर में लागू हो जाएगा पैनिक बटन

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिला अधिकारों की रक्षा, महिला सशक्तीकरण और महिला सुरक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। महिलाओं को समान अधिकार, आर्थिक अवसर, सामाजिक सहयोग, कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रम लागू किए हैं। अब सरकार मुसीबत में फंसी महिलाओं को तुरंत सहायता पहुंचाने के लिए 19 फरवरी से मोबाइल फोन में पैनिक बटन को अनिवार्य करने जा रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का कहना है कि 19 फरवरी से यह बटन हर मोबाइल में होगा। मोबाइल के बेसिक पैनिक बटन के दबाने पर सायरन की तरह जोरदार आवाज निकलेगी, जिससे आसपास के लोग जान जाएंगे कि आप परेशानी में हैं। इसके अलावा पैनिक बटन दबाते ही जीपीएस की मदद से नजदीकी पुलिस थाने को आपके लोकेशन का पता चल जाएगा और वे आपके पास मदद के लिए पहुंच जाएंगे। इसके साथ ही मोबाइल में पहले से आपने जिन पांच करीबियों के नाम दर्ज किए होंगे, उनके पास एसएमएस संदेश पहुंच जाएंगे।

एक नजर डालते हैं बालिकाओं को स्वावलंबी और सशक्त बनाने के लिए उठाए गए कदमों पर, जिनसे आसान बना महिलाओं का जीवन-

निर्भया फंड के तहत उठाए कई कदम
मोदी सरकार ने महिला सुरक्षा के लिए निर्भया फंड के तहत कई कदम उठाए हैं। वर्ष 2017 में ही 2,000 करोड़ से ज्यादा की रकम इसके लिए खर्च की गई है। निर्भया के तहत रेलवे द्वारा Integrated Emergency Response Management परियोजना चलाई जा रही है। देश के 983 प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहा हैं, इनके माध्यम से 24 घंटे महिला यात्रियों को सुरक्षा प्रदान की जाएगी। पांच राज्यों में महिला पुलिस स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं, जो महिलाओं को उनके खिलाफ होने वाले अपराध की रिपोर्ट दर्ज कराने में मदद करती हैं। निर्भया के तहत ही Central Victim Compensation Fund बनाया गया है, जिसके जरिए पीड़ित महिलाओं को समय पर मदद दी जाती है। महिला सुरक्षा के लिए मोदी सरकार ने New Taxi Policy Guidelines बनाई है और यात्रा करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के कई प्रावधान किए हैं।

यौन उत्पीड़न से निवारण के लिए ई-प्लेटफॉर्म
कार्यालयों में महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न की घटनाएं रोकने के लिए ई-प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया गया है। इस ई-प्लेटफॉर्म की सुविधा के माध्यम से केंद्र सरकार की महिला कर्मचारी ऐसे मामलों में ऑनलाइन ही शिकायत दर्ज करा सकेंगी। केंद्र सरकार में करीब 30 लाख से ज्यादा कर्मचारी हैं। 2011 के जनगणना के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों में महिलाओं का प्रतिशत 10.93 है।

महिलाओं के लिए वन स्टॉप सेंटर
पहले हिंसा की शिकार हुई महिलाओं को पुलिस और दूसरे विभागों से मदद के लिए भटकना पड़ता था। अब ऐसी महिलाओं की मदद के लिए देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘वन स्टॉप सेंटर्स’ खोले जा रहे हैं। इन केंद्रों को महिला हेल्पलाइन के साथ जोड़ा गया है और ये पीड़ित महिलाओं को 24 घंटे आपातकालीन सेवा मुहैया करा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से पीड़ित महिलाओं को पुलिस, चिकित्सा, कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक सहायता और जरूरत पड़ने पर आश्रय भी प्रदान किया जा रहा है। 

महिलाओं की सहायता के लिए हेल्पलाइन 181
महिलाओं की मदद के लिए केंद्र सरकार ने वुमन हेल्पलाइन 181 शुरू की है। यह हेल्पलाइन नंबर देश के 28 राज्यों को कवर कर रहा है। पिछले एक वर्ष में इस हेल्पलाइन के जरिए 11 लाख महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई हैं, और उनका निस्तारण किया गया है।

ऑनलाइन शिकायत की सुविधा- She Box
कार्यस्थल पर महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने और ऐसी महिलाओं की मदद के लिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की सुविधा प्रदान की गई है। अब चाहे सरकारी क्षेत्र की महिला कर्मचारी हों या निजी क्षेत्र की, वह बिना की डर के ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकती हैं।

एसिड अटैक की पीड़िताओं को दिव्यांगों जैसी मदद
देश में एसिड अटैक से पीड़ित महिलाओं के लिए कोई योजना नहीं थी, पहले की किसी भी सरकार ने इसके बारे में नहीं सोचा। मोदी सरकार ने एसिट अटैक से पीड़ित महिलाओं की मदद के लिए The Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 में परिवर्तन कर एसिड अटैक को दिव्यांगता की श्रेणी में शामिल किया है। अब एसिड अटैक से पीड़ित महिलाएं को दिव्यांगों को मिलने वाली आर्थिक और दूसरी मदद जी जा सकती है।

मृत्यु प्रमाणपत्र में विधवा का नाम दर्ज करना जरूरी
पति की मृत्यु होने पर पत्नी का नाम विधवा के रूप में मृत्यु प्रमाण पत्र पर लिखना अनिवार्य कर दिया गया है। देखने में यह बहुत छोटी सी बात लगती है, लेकिन महिलाओं को अपने अधिकार पाने के लिए इससे बहुत मदद मिलेगी। अक्सर देखा जाता है कि पति की मृत्यु होने के बाद महिलाओं को अपने अधिकार पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता था, इस बदलाव के बाद महिलाओं को मदद मिलेगी।

स्वाधार गृह
समाजिक और आर्थिक सहयोग नहीं मिलने से परेशानी में रहने वाली महिलाओं को आश्रय, भोजन, कपड़ा, चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए देश भर में स्वाधार गृह स्थापित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश के वृंदावन में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की तरफ से एक Widow Home का निर्माण कराया गया है, जिसकी क्षमता एक हजार महिलाओं को आश्रय देने की है।

महिलाओं के लिए पासपोर्ट नियमों में बदलाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोकस हमेशा महिलाओं को दैनिक जीवन में आने वाली दिक्कतों को दूर करने और उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीने का अवसर प्रदान करने पर रहा है। पिछले वर्ष मोदी सरकार ने महिलाओं पासपोर्ट में शादी के पूर्व का उपनाम रखने की छूट प्रदान की। यानी अब महिलाओं को शादी के बाद पासपोर्ट में अपना सरनेम नहीं बदलना पड़ता है। इसके साथ ही एकल महिलाओं के लिए भी पासपोर्ट के नियम में बदलाव किया गया है। अब पासपोर्ट फार्म में या तो मां या फिर पिता का नाम लिखना जरूरी है। इसके साथ ही पासपोर्ट आवेदन के समय मैरिज सर्टिफिकेट या फिर तलाक का प्रमाण देने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। इससे महिलाओं को सम्मानजनक पहचान मिली है।

कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल
केंद्र सरकार की Working Women Hostel Scheme का मकसद कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित और कम खर्चीला आवास उपलब्ध कराना है। इन हॉस्टर में बच्चों के लिए Day care सुविधा भी होती है। 

देह व्यापार से बचाई गईं महिलाओं को आश्रय
केंद्र सरकार उज्ज्वला योजना के तहत देह व्यापार में फंसी महिलाओं को बचाने और उनके पुनर्वास के लिए चलाई जा रही 286 परियोजनाओं की वित्तीय सहायता कर रही है। 

मोदी सरकार ने हर कदम पर महिलाओं को बढ़ावा दिया है, और उनके लिए सुरक्षित माहौल बनाने की दिशा में योजनाएं बनाई हैं। केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं को उचित मौका देने और उन पर भरोसा जताने से न केवल उनका आत्मविश्वास जगा है, बल्कि वे आत्मनिर्भर भी हो रही हैं।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना
सरकार ने पूरे देश में महिला भ्रूण हत्या, लिंग भेद की रोकथाम और महिला शिक्षा के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना शुरू की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, परिवार कल्याण मंत्रालय और मानव संसाधन मंत्रालय के समन्वित प्रयासों से चलाए गए इस अभियान के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए।

8 करोड़ परिवारों को मिलेगा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीब महिलाओं को बीमारी से मुक्ति दिलाने और उनके चेहरे पर खुशी लाने के लिए 1 मई, 2016 को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरूआत की थी। अब तक 6 करोड़ से अधिक परिवारों को इस योजना का लाभ मिल चुका था। हालांकि इस योजना तहत पांच करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त एलपीजी गैस चूल्हा और कनेक्शन देने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन इस योजना की सफलता को देखते हुए सरकार ने इसका दायरा बढ़ाकर आठ करोड़ का फैसला किया है। सरकार का लक्ष्य 2025 तक सभी घरों तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाने है।

मातृत्व अवकाश, मातृत्व लाभ
वर्तमान सरकार ने नया मातृत्व लाभ संशोधित कानून एक अप्रैल 2017 से लागू कर दिया है। संशोधित कानून के तहत सरकार ने कामकाजी महिलाओं के लिए वैतनिक मातृत्व अवकाश की अवधि 12 सप्ताह से बढ़ा कर 26 सप्ताह कर दी है। इसके तहत 50 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाले संस्थान में एक तय दूरी पर क्रेच सुविधा मुहैया कराना अनिवार्य है। महिलाओं को मातृत्व अवकाश के समय घर से भी काम करने की छूट है। मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम के 1 जनवरी 2017 से लागू है। योजना के अंतर्गत गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को पहले दो जीवित शिशुओं के जन्‍म के लिए तीन किस्‍तों में 6000 रुपये का नकद प्रोत्‍साहन दिया जाता है।

महिला उद्यमिता और महिला कौशल को बढ़ावा
स्टैंड-अप इंडिया के अंतर्गत महिलाओं को अपना व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए हर बैंक शाखा को 10 लाख से लेकर 1 करोड़ तक के ऋण कम से कम एक महिला को उपलब्ध कराने का नियम बनाया गया है। वहीं प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत महिलाओं को रोजगार योग्य बनाने के लिए 11 लाख से अधिक महिलाओं को अलग-अलग तरह के हुनर में प्रशिक्षित किया गया है।

मुद्रा योजना में महिलाओं की भागीदारी
मुद्रा योजना महिला सशक्तिकरण का एक बहुत बड़ा जरिया बन चुकी है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत बिना गारंटी के 15 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को ऋण वितरित किए गए हैं, जिनमें 76% महिलाएं और 50% से अधिक एससी/एसटी एवं अन्य पिछड़े वर्ग के लाभार्थी शामिल हैं।

महिला ई-हाट
स्वसहायता समूहों के लिए ‘महिला ईहाट’के नाम से एक अनूठा प्लेटफॉर्म स्थापित किया गया है। जिन महिलाओं को अपने उत्पादों को बाजार तक ले जाने का साधन नहीं मिलता था, उनके लिए यह योजना एक वरदान साबित हो रही है। 

बालिका शिक्षा की योजनाएं 
उड़ान (UDAAN) योजना बालिका शिक्षा के प्रति समर्पित है, ताकि छात्राओं के प्रवेश को बढ़ावा दिया जा सके। इसका मकसद पूर्वोत्तर राज्यों के चुनिंदा स्कूली विद्यार्थियों और इंजीनियरिंग छात्रों को उनकी छुट्टियों के दौरान आईआईटी,एनआईटी और आईआईएसईआर से जोड़ना है। यूएसटीटीएडी ने परंपरागत कला और शिल्पकारी में कौशल और प्रशिक्षण को बेहतर बनाने की मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य परंपरागत कारीगरों की क्षमता को बढ़ाना, परंपरागत कला और शिल्प का मानकीकरण, उनका दस्तावेजीकरण और उन्हें बाजार से जोड़ना है। प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी पोर्टल से सरकारी छात्रवृत्ति व बैंकों द्वारा दिए जाने वाले शिक्षा ऋण के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त होती है। इससे छात्राओं को विशेष लाभ मिला है।

सुकन्या समृद्धि योजना
केंद्र सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना के माध्यम से देश की बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने का कार्य किया है। योजना के अंतर्गत 0-10 साल की कन्याओं के खाते डाकघर में खोले जाएंगे। इन खातों में जमा राशि पर 8.1 प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज दिया जाएगा। सुकन्या समृद्धि योजना अभिभावकों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है।

महिलाओं के लिए पुलिस फ़ोर्स में 33% आरक्षण
महिला सशक्तिकरण की दिशा में पुलिस भर्ती में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का एक बड़ा निर्णय किया गया है। यह राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में अभी से ही अलग-अलग स्तर पर पुलिस बालों में महला आरक्षण लागू कर दिया गया है।

अब आपको बताते हैं कि मोदी सरकार की नीतियों की वजह से महिलाएं किस तरह प्रतिदिन नया मुकाम हासिल कर रही है।

लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला बनी अवनी
इंडियन एयर फोर्स की फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। अवनी ने अकेले मिग-21 उड़ाकर एक नया इतिहास रच दिया है। 19 फरवरी, 2018 को अवनी चतुर्वेदी ने गुजरात के जामनगर एयरबेस से अकेले ही फाइटर एयरक्राफ्ट मिग-21 से उड़ान भरी। अवनि चतुर्वेदी भारत की पहली महिला लड़ाकू पायलटों में से एक है। अवनी के साथ मोहना सिंह और भावना कंठ के साथ पहली बार लड़ाकू पायलट घोषित किया गया था।

एयरफोर्स में पहली बार महिला फाइटर पायलट शामिल
इससे पहले देश की वायु सेना में फाइटर पायलट के रूप में तीन महिलाओं की नियुक्ति ने पूरे देश को गर्व से भर दिया था। अवनी चतुर्वेदी, भावना कंठ और मोहना सिंह भारतीय वायु सेना के उस लड़ाकू बेड़े में शामिल की गई थीं। यह अपने-आप में बहुत बड़ी उपलब्धि भी है और बहुत बड़ी मिसाल भी।

राजपथ पर महिला कमांडो का हैरतअंगेज करतब
गणतंत्र दिवस परेड, 2018 में पहली बार बाइक पर हैरतअंगेज करतब दिखाने के लिए महिला कमांडो के दस्ते को शामिल किया गया। अब तक ऐसा सेना के जवान करते रहे हैं। ऐसा पहली बार हुआ कि बुलेट पर महिला कमांडो पिरामिड, उल्टे-सीधे खड़े होकर अखबार पढ़ते और चाय पीते नजर आईं। महिला दस्ता में शामिल 106 महिला कमांडो ने 26 बाइक पर विजय चौक से इंडिया गेट तक (तीन किलोमीटर) अलग-अलग हैरतअंगेज करतब का प्रदर्शन किया। दस्ते में शामिल महिला कमांडो नेपाल, म्यांमार, भूटान, बांग्लादेश सीमा पर तैनात हैं। साहस और जोखिम उठाने के मामले में ये किसी से कम नहीं हैं। इस दस्ते का नाम सीमा भवानी रखा गया है। बीएसएफ की देशभर की यूनिट में से चयनित 106 महिला कमांडो को 15 महीने का विशेष प्रशिक्षण सीमा सुरक्षा बल अकादमी, टेकनपुर स्थित केंद्रीय मोटर गाड़ी प्रशिक्षण में दिया गया।

राजपथ पर पहली बार महिला सशक्तीकरण का प्रदर्शन
इसके पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महिला सामर्थ्य पर अटल विश्वास की झलक उसी समय दिख गई थी, जब राजपथ पर देश के 66वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर पहली बार तीनों सेनाओं के एक विशेष महिला दस्ते ने मार्च करके अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया। इस अवसर पर अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

नेवी की मिली पहली महिला पायलट
शुभांगी स्वरूप के रूप में नेवी को पहली महिला पायलट मिला। यह ऐतिहासिक क्षण नेवी के लिए तब आया जब नेवी में महिलाओं को शामिल करने का निर्णय पहली बार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने वर्ष 2015 में लिया गया था। अब टोही विमानों में भी महिलाओं की तैनाती के रास्ते खुलेंगे। शुभांगी के साथ-साथ आस्था सहगल, रूपा ए. और शक्तिमाया को भी नेवी के Armament यानी शस्त्र विभाग की इंस्पेक्शन ब्रांच में पहली बार ही नियुक्त किया गया है।

पहली बार बनी पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री
निर्मला सीतारमण ऐसी पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री बनी हैं, जिन्होंने अत्यंत चुनौतियों और संवेदनशीलता से भरे इस पद की कमान संभाली है। जिस इकाई के कंधों पर देश की सीमाओं की सुरक्षा से जुड़े दिशानिर्देशों का दायित्व हो, उसका प्रत्येक निर्णय देश की अस्मिता के लिए अत्यधिक महत्त्व का होता है। निर्मला सीतारमण ने इस कमान को पूरी सामर्थ्य और साहस के साथ थामा है।

नाविक सागर परिक्रमा पर निकली महिला अधिकारी
नौसेना की 6 साहस से भरी महिला अधिकारियों ने नाविक सागर परिक्रमा नामक मिशन आईएलएसवी नौका तारिणी के जरिए पूरा किया। सभी महिला सदस्यों के इस दल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी ने किया।

राजस्थान का गांधी नगर बना ‘ऑल वुमेन रेलवे स्टेशन’
जयपुर का गांधीनगर रेलवे स्टेशन देश का पहला ऐसा रेलवे स्टेशन बन गया है, जिसे केवल महिलाएं ही संभाल रही हैं। इससे पहले मुम्बई के माटुंगा को ‘ऑल वुमेन स्टेशन’ बनाया गया था, लेकिन वह सब-अर्बन रेलवे स्टेशन है। गांधी नगर रेलवे स्टेशन को स्टेशन मास्टर से लेकर गेटमैन तक कुल 40 महिलाओं की टीम संभाल रही हैं।

इस स्टेशन पर… स्टेशन मास्टर, इंजीनियर, टिकट क्लर्क, मुख्य आरक्षण पर्यवेक्षक, फ्लैग इंडिकेटर, प्वांइट्स मैन और गेटमैन तक के सभी पदों पर महिलाओं को ही नियुक्ति किया गया है। रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा में तैनात जीआरपी की टीम में भी महिलाएं ही शामिल हैं।

माटुंगा रेलवे स्टेशन का संचालन कर बनाया रिकॉर्ड
मुंबई के माटुंगा रेलवे स्टेशन का संपूर्ण प्रभार महिला कर्मचारियों पर है। यहां स्टेशन मास्टर से लेकर टिकट कलेक्टर तक महिलाएं हैं। माटुंगा देश का पहला ऐसा सब-अर्बन रेलवे स्टेशन है, जिसकी कमान पूरी तरह से महिलाओं के हाथ में है। इसी खासियत ने इस स्टेशन को 2018 के लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल करा दिया है।

महिलाओं की क्षमता पर हमेशा भरोसा जताने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशानुसार मध्य रेलवे के शीर्ष अधिकारियों ने माटुंगा रेलवे स्टेशन पर सिर्फ महिला कर्मचारियों को नियुक्त करने का फैसला किया था। इसके बाद वहां स्टेशन मैनेजर, बुकिंग स्टॉफ, टिकट चेकर, आरपीएफ जवान, सफाई कर्मचारी समेत सभी पदों पर महिला कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी और 12 जुलाई, 2017 को स्टेशन का संचालन उन्हें सौंप दिया गया था।

सरकार महिलाओं पर विश्वास जताए तो महिलाएं कोई भी मुश्किल कार्य का सफलता से संचालन कर सकती है। यही वजह है कि इस स्टेशन को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में जगह मिली है।

‘नारी’ से मिलेगी महिलाओं को शक्ति
महिलाओं को सशक्त बनाने की ऐतिहासिक पहल के तहत एक ऑनलाइन पोर्टल ‘नारी’ का शुभारंभ किया गया। इस पोर्टल को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने विकसित किया है। इस पोर्टल के माध्यम से महिलाएं सरकारी योजनाओं और पहलों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगी।

केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाएं अब एक पोर्टल पर
महिलाओं को समान अधिकार, आर्थिक अवसर, सामाजिक सहयोग, कानूनी सहायता, आवास आदि उपलब्ध कराने के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारों ने विभिन्न योजनाएं लागू की हैं, परंतु इनके प्रति जागरूकता का अभाव है। महिला केंद्रित योजनाओं की जानकारी विभिन्न वेबसाइट पर बिखरी हुई हैं। इन सारी सूचनाओं को एक स्थान पर सुलभ कराने के उद्देश्य से ‘नारी’ पोर्टल में महिलाओं के कल्याण के लिए 350 सरकारी योजनाओं से संबंधित व अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई गई हैं। पोर्टल में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के लिए महत्वपूर्ण लिंक दिए गए हैं। ‘नारी’ पोर्टल में महिलाओं के जीवन से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर जानकारी उपलब्ध कराई गई है। पोषण, स्वास्थ्य जांच, बीमारी, नौकरी, साक्षात्कार, निवेश और बचत सलाह, महिलाओं के खिलाफ अपराध, कानूनी सहायता उपलब्ध कराने वालों के नम्बर, गोद लेने की सरल प्रक्रिया आदि विषयों पर टिप्स दिए गए हैं। यह पोर्टल महिलाओं को जानकारियों की शक्ति प्रदान करेगा। मंत्रालय से एनजीओ और सिविल सोसायटी के संवाद के लिए एक ई-संवाद पोर्टल भी विकसित किया गया है। 

हर कदम पर महिलाओं के साथ खड़ी है मोदी सरकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार में ऐसी तमाम योजनाएं बना चुके हैं, जिनके बल पर आज देश की महिलाओं खुद का आत्मनिर्भर और सुरक्षित महसूस कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी की पहल ने महिलाओं में विश्वास भरने के साथ ही भरोसा भी उत्पन्न किया है। प्रधानमंत्री महिलाओं को यह यकीन दिलाने में भी सफल रहे हैं कि सम्मान और विकास के बारे में सोचने और कुछ कर गुजरने वाला एक व्यक्ति सरकारी तंत्र के उच्च शिखर पर बैठा है जो नारी शक्ति के साथ खड़ा है। चाहे बात मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के मुद्दे पर सदियों से चली आ रही कुप्रथा से मुक्ति दिलाने की हो, या फिर हज जाने के लिए बगैर ‘महरम’ के मुस्लिम महिलाओं के जाने का मामला, सभी फैसलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति दिखाई पड़ती है। इतना ही नहीं केंद्र सरकार बगैर किसी भेदभाव के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान से लेकर सुकन्या समृद्धि योजना, मातृत्व लाभ, मातृत्व अवकाश योजनाओं के जरिए महिलाओं को उनका हक दिलाने का काम कर रही है।

हज के लिए ‘महरम’ (पुरुष अभिभावक) की अनिवार्यता खत्म
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं से जुड़ी ऐसी सभी समस्याओं को खत्म करने में लगे हैं, जिससे उनके अस्तित्व को चुनौती मिलती है या फिर जो उनके मौलिक अधिकारों का हनन करती हैं। 31 दिसंबर 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल के आखिरी ‘मन की बात’ में मुस्लिम महिलाओं को बहुत ही बड़ी खुशखबरी दी। प्रधानमंत्री ने बताया है कि अब भारतीय मुस्लिम महिलाएं बिना ‘महरम’ के हज यात्रा पर जा सकती हैं। गौरतलब है कि आजादी के 70 वर्षों बाद प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर भारत की मुस्लिम महिलाओं को अकेले भी हज यात्रा पर जाने का हक मिला है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि उनकी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के इस हक पर ध्यान दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि, “70 साल से चली आ रही परंपरा को नष्ट कर के इस रेस्ट्रिक्शन को हमने हटा दिया। आज मुस्लिम महिलाएं, ‘महरम’ के बिना हज के लिए जा सकती हैं और मुझे खुशी है कि इस बार लगभग 1300 मुस्लिम महिलाएं ‘महरम’ के बिना हज जाने के लिए अप्लाई कर चुकी हैं और देश के अलग-अलग भागों से; केरल से ले करके उत्तर तक महिलाओं ने बढ़-चढ़ करके हज-यात्रा करने की इच्छा जाहिर की है।” इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि भारत की विकास यात्रा, नारी-शक्ति के बल पर, उनकी प्रतिभा के भरोसे आगे बढ़ी है और आगे बढ़ती रहेगी। इसलिए हमारा निरंतर प्रयास होना चाहिए कि महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर और समान अधिकार मिले।

तीन तलाक की ‘पापी प्रथा’ से मुक्ति दिलाने का बिल लोकसभा में पास
मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की कुप्रथा से मुक्ति दिलाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से 28 दिसंबर को विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकार सुरक्षित करने से संबंधित ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2017 लोकसभा से ध्वनिमत से पारित हो गया। अब इसे कानून का स्वरूप लेने में सिर्फ दो कदम की दूरी बची है, पहला कदम राज्यसभा में पारित होना और दूसरा कदम राष्ट्रपति से मंजूरी। प्रधानमंत्री मोदी सत्ता में आने के बाद से ही सदियों से चली आ रही इस कुप्रथा से मुस्लिम महिलाओं को मुक्ति दिलाने के प्रयास में लगे हुए थे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में भी मोदी सरकार ने तीन तलाक के खिलाफ जोरदार पैरवी की थी, और उसी का नतीजा था कि सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय खंडपीठ ने बहुमत के साथ इस प्रथा को गैरकानूनी और इस्लाम विरोधी घोषित किया था। उसके बाद से ही केंद्र सरकार इसे कानूनी जामा पहनाने की कोशिश कर रही थी। प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल ने उन्हें देश की करोड़ों मुस्लिम महिलाओं का शुभचिंतक बना दिया है। प्रधानमंत्री ने बगैर किसी भेदभाव के, मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को उनका हक दिलाने का काम किया है। इस बिल के पास होने के बाद मुस्लिम महिलाओं को बराबरी का हक मिलेगा और तलाक की स्थित में वो अपने पति पर अपने तथा नाबालिग बच्चों के गुजारा भत्ता का दावा ठोक सकेंगी। इतना ही नहीं इस गैरकानूनीकृत्य पर पति को तीन वर्ष की जेल का भी प्रावधान है।

महिला जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण
इस कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायतों की निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की क्षमता, शासन संचालन और उनका कौशल बढ़ाना है, ताकि वो गांवों का प्रशासन बेहतर तरीके से चला सकें। पंचायती संस्थाओं में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को कई बार काम में मुश्किलें पेश आती हैं। इसलिए महिला सरपंचों तथा निचले स्तर पर महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने के लिए देशव्यापी कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इसका सीधा लाभ शासन-प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी के रूप में मिल रहा है। 

इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश का महत्वपूर्ण संसाधन मानते हैं। ज्ञान-विज्ञान, खेलकूद, सूचना-प्रौद्योगिकी, कला-संगीत से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली महिलाओं को प्रधानमंत्री अपनी कई महत्वपूर्ण योजना से जोड़ चुके हैं। कामकाजी से लेकर ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं के कल्याण और उनके हितों की रक्षा के लिए सरकार ने सतत प्रयास किये हैं। प्रधानमंत्री स्वयं किसी भी क्षेत्र में कुशल नेतृत्व या उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं की सराहना करके महिलाओं को प्रोत्साहित करने का कार्य करते हैं।

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