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अपने कुकर्मों से खंडित होता पाकिस्तान

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कश्मीर में आजादी के नाम पर पाकिस्तान हमेशा से आतंकियों को पालता रहा है और इसी झांसे में कश्मीरी युवाओं को पथभ्रष्ट करके हिंसक गतिविधियों के लिए भी निरंतर उकसाता रहता है। दरअसल धरती के स्वर्ग को नर्क में तब्दील करने की हसरत लिए पाकिस्तान पिछले सात दशकों से लगातार यही कोशिशें कर रहा है, लेकिन भारत में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा पाकिस्तान खुद ही टुकड़े-टुकड़े होने की कगार पर खड़ा है। पाकिस्तान के भीतर कम से कम चार बड़े क्षेत्रों में पाकिस्तान से मुक्ति (आजादी) के लिए संघर्ष तेज हो रहा है।

पीओके मांगे आजादी
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आजादी के आंदोलन की गति रफ्तार पकड़ती जा रही है। शनिवार (19 अगस्त) को पाकिस्तान से आजादी के लिए जनदाली में जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय छात्र संघ द्वारा विशाल रैली आयोजित की गई, जिसमें हजारों लोग जुटे। रैली में आजादी के नारे लगाए गए और पाकिस्तानी आर्मी के जुल्मो-सितम का विरोध किया गया। लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान इस शांतिपूर्ण जगह को बर्बाद करने के लिए यहां आतंकवादियों को भेजने का काम कर रहा है।

पीओके में सीपेक का विरोध
पीओके को पाकिस्तान ने एक तरह से चीन के पास गिरवी रख दिया है। दरअसल पाक-चीन आर्थिक गलियारा इसी रास्ते से होकर गुजरता है, जिसका पीओके के लोग विरोध कर रहे हैं। चीन-पाक आर्थिक गलियारे को लेकर भी लोगों में आक्रोश का माहौल है। यह विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान की ओर से पीओके के लोगों पर किए जा रहे जुल्म के खिलाफ गुस्सा है। पाकिस्तानी सेना भी इस इलाके में लोगों पर अत्याचार कर रही है।

आतंकवाद भेजता है पाक
यह पहला मौका नहीं है, जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में इस तरह की रैली आयोजित की गई हो। इससे पहले भी यहां पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन होते रहे हैं। पाकिस्तान पर आरोप लगता रहा है कि वह पीओके में आतंकवाद फैलाता है। पाकिस्तान ने यहां पर आतंकवादियों के लिए कई ट्रेनिंग कैंप भी लगा रखे हैं।

पीओेके पर पाक का अवैध कब्जा
भारत हमेशा से पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान में पाकिस्तान के दमन चक्र का विरोध करता आया है। भारत यह कहता रहा है कि पीओके भारत का हिस्सा है और पाकिस्तान ने उस पर अवैध कब्जा किया हुआ है और उसे यह क्षेत्र मुक्त करना ही होगा। भारत का कहना है कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू और कश्मीर को लेकर कोई विवाद है तो वह सिर्फ पाकिस्तान की तरफ से पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान पर अवैध कब्जा है।

गिलगित बल्तिस्तान में आजादी की मांग के लिए चित्र परिणाम

गिलगित-बल्टिस्तान मांगे आजादी
कश्मीर की आजादी की बात करने वाला पाकिस्तान अब खुद ही घिर गया है, क्योंकि उसके कब्जे वाले गिलगित-बल्टिस्तान के लोग आजादी की मांग लेकर एक बार फिर से सड़कों पर उतर रहे हैं। गिलगित-बल्टिस्तान की तीनों बड़ी राजनीतिक पार्टियां अब खुलेआम पाकिस्तान का विरोध कर रही हैं और उन्होंने खुद को पाकिस्तान का हिस्सा मानने से इंकार कर दिया है।

ये है गिलगित-बल्टिस्तान का मुद्दा
भारत में जिसे हम PoK यानी पाक अधिकृत कश्मीर कहते हैं, उसे पाकिस्तान ने दो हिस्सों में बांट रखा है। उनमें से एक हिस्सा वह है, जिसमें गिलगिट-बल्टिस्तान आता है। दूसरा हिस्सा वह है, जिसे पाकिस्तान आजाद कश्मीर कहता है। दरअसल उसके पीछे पाकिस्तान की मंशा ये है कि सुन्नी बहुल पाकिस्तान शिया बहुल आबादी वाले गिलगित-बल्टिस्तान को अपना पांचवां प्रांत घोषित कर दे, जबकि लोग इसके विरोध में हैं।

CEPEC का विरोध कर रहे हैं लोग
दरअसल गिलगित-बल्टिस्तान की सीमाएं, चीन और अफगानिस्तान के अलावा जम्मू-कश्मीर से जुड़ी हुई हैं। पाकिस्तान, चीन के साथ मिलकर वहां आर्थिक कोरिडोर बना रहा है। इस गलियारे का विरोध यहां की जनता कर रही है। इस इलाके में पहली बार चुनाव साल 2009 में हुए थे, लेकिन यहां के लोग इसे छलावा करार देते हैं। स्थानीय नागरिक पाकिस्तान की नापाक हरकतों और पाक आर्मी के अत्याचारों का विरोध करते हैं। 

बलूचिस्तान में आजादी की मांग के लिए चित्र परिणाम

बलूचिस्तान मांगे आजादी
बलूचिस्तान के लोग किसी भी कीमत पर पाकिस्तान से अलग हो जाना चाहते हैं। कई बार वहां पाकिस्तानी सेना के खिलाफ आंदोलन और पाकिस्तान के खिलाफ नारे के वीडियो भी सामने आए हैं। लाल किले की प्राचीर से जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलूचों की आजादी को नैतिक समर्थन की घोषणा की तो वहां के लोगों में आजादी की उम्मीद जगी है।

दहशत में जीते हैं बलोच
बलूचिस्तान के लोगों के दिन की शुरुआत दहशत के साथ होती है। इन लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान की सेना ने उनकी जिंदगी नर्क से भी बदतर बना दी है। बलूचिस्तान के लोग और नेता लगातार आंदोलन को तेज कर रहे हैं। उनका दावा है कि जैसे 1971 में पाकिस्तान से कटकर बांग्लादेश बन गया था, उसी तरह एक दिन बलूचिस्तान भी बन जाएगा।

75 सालों से आजादी की जंग
1944 में ही बलूचिस्तान को आजादी देने के लिए माहौल बन रहा था, लेकिन 1947 में इसे जबरन पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया। तभी से बलूच लोगों का संघर्ष चल रहा है, लेकिन उतनी ही ताकत से पाकिस्तानी सेना और सरकार बलूच लोगों को कुचलती रही है। आजादी की लड़ाई के दौरान भी बलूचिस्तान के स्थानीय नेता अपना अलग देश चाहते थे, लेकिन जब पाकिस्तान ने फौज और हथियार के दम पर बलूचिस्तान पर कब्जा कर लिया तो वहां जन विद्रोह भड़क उठा था।

बलूचिस्तान में आजादी की मांग के लिए चित्र परिणाम

सिंध मांगे पाक से आजादी
पाकिस्तान के लोग लगातार वहां की सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। अब पाकिस्तान के सिंध प्रांत ने भी आजादी की मांग की है और इसके लिए  पाकिस्‍तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला भी शुरू कर दिया है। साथ ही प्रांत के लोगों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनको भी आजाद कराने की मांग की है।

सिंध को इसलिए चाहिए आजादी
दरअसल सिंध के लोग चीन और पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरीडोर का विरोध कर रहे हैं। यहां के लोग भारत द्वारा इस योजना में शामिल नहीं होने के निर्णय को सही ठहराते हैं और वे भारत के साथ खड़े हैं। इस सिलसिले में सिंध के छोटे-बड़े शहरों और प्रवासी लोगों द्वारी विरोध प्रदर्शन किए गए हैं।

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