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प्रधानमंत्री मोदी को बदनाम करने के लिए चुनाव आयोग बना विपक्ष का हथियार

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क्या चुनाव आयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने का विपक्ष का हथियार बन गया है? ये सवाल इस समय मेरे जहन में सबसे ज्यादा मुखर है। दरअसल इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी खबरें हर 1-2 दिन में देखने और पढ़ने को मिल रही हैं। नियमित अंतराल पर कांग्रेस और उससे जुड़ी विपक्षी पार्टियां प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ शिकायत करती हैं। इस पर चुनाव आयोग नोटिस जारी कर देता है और एकाध दिन खबरों में रहने के बाद पीएम मोदी को क्लीन चिट दे दी जाती है। लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस और विपक्षी पार्टियां प्रधानमंत्री मोदी की इमेज को धूमिल करने के कुत्सित प्रयास में जुट जाती हैं। दरअसल ये कांग्रेस और बाकी विपक्षी दलों का मोडस ऑपरेंडी भी हो गया है। इसमें कांग्रेस ने धीरे-धीरे सुप्रीम कोर्ट को भी घसीट लिया है।

आपने देखा होगा कि अब तक कांग्रेस और बाकी विपक्षी पार्टियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव आयोग में 10 बार शिकायतें की हैं। इन सभी शिकायतों का मोडस ऑपरेंडी एक खास प्रकार का है। कांग्रेस पार्टी की कोशिश ये नहीं है कि इसका कोई नतीजा निकले, बल्कि साजिश ये है कि इस प्रक्रिया में प्रधानमंत्री को बदनाम किया जा सके। देखिए किस तरह से कांग्रेस और उसके साथी इस प्रक्रिया को अपनाते हैं-

  1. सबसे पहले प्रधानमंत्री के किसी बयान को उठाकर विवाद पैदा करने की कोशिश की जाती है। इसमें सारे नेता एक साथ मिलकर हल्ला बोलते हैं।
  2. फिर उस बयान को मीडिया के कुछ लोग एजेंडा की तरह चलाते हैं। कांग्रेस इकोसिस्टम इसे फैलाने में लग जाता है।
  3. इसके बाद कांग्रेस अपने कुछ नामी वकीलों के साथ चुनाव आयोग में शिकायत करने के लिए पहुंच जाती है।
  4. चुनाव आयोग को शिकायत मिलने और उसके द्वारा नोटिस जारी किए जाने तक विपक्षी पार्टियां मीडिया में जमकर इसका दुष्प्रचार करती हैं।
  5. इस मुद्दे को उठाकर प्रधानमंत्री की इमेज को खराब करने के लिए मीडिया में डिबेट शो भी आयोजित किए जाते हैं।
  6. आखिर में जब चुनाव आयोग क्लीन चिट दे देता है। तो इसे गिनती बनाकर अलग से चुनाव आयोग पर दबाव बनाया जाता है कि सभी 10 मामले में प्रधानमंत्री को क्लीन चिट दे दी गई। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाने की कोशिश की जाती है।
  7. हाल ही में इसे लेकर कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट को भी घसीट लिया है। वहां भी कांग्रेस को मात खानी पड़ी है।

अब आप ये देखिए कि कांग्रेस प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ किस तरह के मुद्दों को लेकर शिकायतें करने पहुंची।

  • शुरुआत 1 अप्रैल से हुई, जब वर्धा में प्रधानमंत्री मोदी ने ये बयान दिया था कि कांग्रेस अध्यक्ष एक ऐसी जगह से लड़ रहे हैं, जहां बहुमत अल्पमत में है। हालांकि ये तथ्यात्मक रूप से सच था, लेकिन कांग्रेस ने इस पर भी विवाद पैदा किया।
  • 6 अप्रैल को नांदेड़ रैली के बाद ये शिकायत लेकर पहुंच गए कि उन्होंने कांग्रेस को डूबता टाइटैनिक बता दिया।
  • 9 अप्रैल को लातूर और 21 अप्रैल को बाड़मेर की रैली को लेकर शिकायत करने पहुंच गए। इसमें उन्होंने सेना से जुड़े तथ्यहीन सवाल उठाए।
  • 9 अप्रैल को ही केरल के चित्रदुर्ग में एयर स्ट्राइक का जिक्र करने पर चुनाव आयोग पहुंच गए।
  • 21 अप्रैल को पाटन में कैप्टन अभिनंदन के नाम लेने पर बेसिर-पैर की शिकायत की।
  • 23 अप्रैल को अहमदाबाद में रोड शो की शिकायत लेकर पहुंच गए।
  • 25 और 26 अप्रैल को वाराणसी में दिए बयान को लेकर दो शिकायतें कर दीं, जो खारिज कर दी गईं।
  • ताजा मामला 6 मई का है। कांग्रेस ये शिकायत लेकर पहुंच गई कि प्रधानमंत्री मोदी ने राजीव गांधी को भ्रष्टाचारी नंबर 1 कहा है। इसी मुद्दे पर कांग्रेसी नेता सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचे और फैसले आने के 2-3 दिन तक प्रधानमंत्री मोदी को लेकर मीडिया में उल्टे-सीधे बयान देते रहे। गौरतलब है कि जो कांग्रेस अध्यक्ष प्रधानमंत्री मोदी को लगातार चोर कह रहे हैं, वो पूर्व प्रधानमंत्री को भ्रष्टाचारी कहे जाने पर शिकायत करने पहुंच जाते हैं।

जिस तरह के मुद्दे उठाए गए हैं, उससे साफ है कि कांग्रेस का एजेंडा सिर्फ और सिर्फ चुनाव आयोग की लापरवाही का फायदा उठाना है और चुनाव तक प्रधानमंत्री मोदी को बदनाम करना है। ऐसे में सवाल ये है कि

  • क्या चुनाव आयोग का काम सिर्फ शिकायतें सुनना भर रह गया है?
  • जो लोग अनर्गल तरीके से प्रधानमंत्री के खिलाफ लगातार बेवजह शिकायतें कर रहे हैं, आखिर उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हो रही है?
  • बेबुनियाद शिकायतों को चुनाव आयोग शुरू में ही खारिज क्यों नहीं कर देता है?
  • लगातार 10 गलत शिकायतें किए जाने और इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी को बदनाम करने का विपक्ष ने जो प्रयास किया, उसके खिलाफ चुनाव आयोग ने क्या कार्रवाई की है?
  • क्या कोई भी नेता सीधे प्रधानमंत्री पर आरोप लगाकर उसे मीडिया में दुष्प्रचारित कर सकता है।
  • क्या किसी शिकायत भर से किसी प्रधानमंत्री को गुनहगार मानकर सोशल मीडिया पर प्रचार करना जायज है? क्या इसके खिलाफ चुनाव आयोग को कार्रवाई नहीं करनी चाहिए?

दरअसल जब चुनाव अपने चरम पर हो तो उसमें मुद्दों या व्यक्तित्व से बड़ा समय होता है। किसी खास समय में कौन सी रणनीति अपनाई जाए, ये सबसे बड़ा हथियार बन जाता है। ऐसे में चुनाव आयोग को समय रहते उन लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए, जो प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आरोप लगाकर न केवल सुर्खियां बटोर रहे हैं, बल्कि उन्हें बदनाम भी करने का प्रयास कर रहे हैं।

– हरीश चन्द्र बर्णवाल

लेखक वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं। उनसे उनके ईमेल hcburnwal@gmail.com  के जरिये संपर्क कर सकते हैं।

 

 

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