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विपक्ष का मिशन सरकार, नतीजे से पहले महामिलावटियों ने मानी हार

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लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण का चुनाव अभी बाकी है, लेकिन विपक्षी दल अभी से अपनी हार को तय मान रहे हैं। इसलिए वे नतीजों से पहले ही एक और महामिलावटी गठबंधन तैयार करने की कोशिश में लग लए हैं। इनकी कोशिश नतीजे आने से पहले सभी विपक्षी पार्टियों को एक साथ लाने की है ताकि नरेन्द्र मोदी को दोबारा पीएम बनने से रोका जा सके। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की और अब अखिलेश तथा मायावती से मिलने वाले हैं। एनसीपी के नेता शरद पवार भी सोनिया गांधी से मिलने वाले हैं। इधर, तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव भी इसी कवायद में लगे हैं। हालांकि, उनकी इन कोशिशों का कुछ खास फायदा नहीं मिलने वाला क्योंकि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की 2014 से भी ज्यादा सीटों के साथ सत्ता में वापसी निश्चित है। लेकिन महामिलावटी पार्टियों की इस कवायद से यह भी स्पष्ट है कि चुनाव प्रचार के दौरान एक दूसरे के खिलाफ गाली-गलौज करने वाली ये सारी पार्टियां अंदर से एक साथ हैं।

शुक्रवार पूरे दिन सक्रिय रहे नायडू
शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे नायडू ने सबसे पहले कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी से मुलाकात की। इसके बाद नायडू आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिले। दोनों नेताओं के बीच नतीजों के बाद की रणनीति पर काफी देर तक बातचीत हुई। केजरीवाल से मुलाकात के बाद नायडू ने लेफ्ट नेताओं के साथ भी गठबंधन से सरकार बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह भी इस दौरान मौजूद थे। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी से भी मिलना चाहते थे, लेकिन ये बैठक संभव नहीं हो सकी।

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महागठबंधन से मुलाकात पर नजरें
राहुल गांधी के साथ नायडू की यह मुलाकात इस मायने में भी खास है क्योंकि एक दिन पहले शुक्रवार को राहुल गांधी ने गठबंधन से सरकार बनाने के संकेत दिए थे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने साफ कर दिया कि उनका मकसद बीजेपी को सत्ता में वापसी से रोकना है। इसके लिए वो विपक्ष के हर फॉर्मूले पर राजी हैं. नायडू से मुलाकात में इस फॉर्मूले पर ही चर्चा होने की संभावना है। राहुल से मुलाकात के बाद नायडू लखनऊ रवाना हो जाएंगे जहां वह आज ही समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की मायावती से मिलने वाले हैं। यह मुलाकात इसलिए अहम है क्योंकि चुनाव परिणाम के बाद अगर तीसरे मोर्चे की संभावना बनती है तो उसमें महागठबंधन की भूमिका बेहद अहम रहेगी।

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स्टालिन से मिले केसीआर 
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश में जुटे हैं। छठे चरण के चुनाव के बाद चंद्रशेखर राव ने पिछले हफ्ते केरल जाकर मुख्यमंत्री और माकपा नेता पिनरई विजयन से मुलाकात की थी। इसके बाद वह सोमवार को चेन्नई जाकर डीएमके नेता एमके स्टालिन से मिले. हालांकि घंटेभर चली यह बैठक कामयाब नहीं रही। डीएमके ने कांग्रेस का साथ छोड़ने से इंकार कर दिया।

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एकमात्र लक्ष्य- मोदी को हटाओ
विपक्षी दलों का एकमात्र मकसद नरेन्द्र मोदी को दोबारा पीएम बनने से रोकना है। इनका कोई सर्वमान्य नेता नहीं है। विचारधारा और नीतियां भी काफी अलग हैं, लेकिन मोदी के प्रति घृणा के चलते ये साथ आने को तैयार हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो कह भी दिया है कि मोदी को पद से हटाने लिए वे कोई भी शर्त मानने को तैयार हैं।

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