Home चुनावी हलचल नोटबंदी की एटीएम से बीजेपी को मिल रहे वोट

नोटबंदी की एटीएम से बीजेपी को मिल रहे वोट

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ओडिशा में स्थानीय निकायों के चुनाव में भी बीजेपी ने परचम लहरा दिया है। यहां के चुनाव नतीजों से बीजेपी ने सबको चौंका दिया है। ओडिशा में कोई खास जनाधार नहीं होने के बाद भी बीजेपी को यहां 270 सीटों का फायदा हुआ है। बीजेपी को यहां 2012 में 36 सीटें मिली थीं जो अब बढ़कर 306 हो गई हैं। बीजेपी यहां सत्ताधारी बीजू जनता दल के बाद दूसरे नंबर पर आई है। बीजेपी ने कांग्रेस को तीसरे नंबर पर धकेल दिया है। राज्य में पांच चरणों में हुए पंचायत चुनावों में बीजेपी को कुल 306 सीटें मिली हैं, जबकि बीजू जनता दल (बीजेडी) ने 460 और कांग्रेस ने 66 सीटों पर जीत हासिल की है। इस चुनाव में बीजेडी को तगड़ा झटका लगा है और उसे 191 सीटों का नुकसान झेलना पड़ा है। कांग्रेस को भी 60 सीटों से हाथ धोना पड़ा है।

इसके पहले 2012 में 851 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी को सिर्फ 36 सीटें मिली थीं। बीजेडी को 651 सीटें मिली थीं जबकि कांग्रेस ने 126 सीटों पर कब्‍जा किया था। विधानसभा चुनाव से पहले आए इस परिणाम ने सीएम नवीन पटनायक के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

नोटबंदी अभियान को समर्थन
ओडिशा में कोई खास जनाधार और कैडर ना होने के बाद भी इस जीत से साबित कर दिया है कि लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले के पक्ष में हैं। ओडिशा देश के सबसे गरीब राज्यों में से एक है। लोगों ने नोटबंदी को भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ एक करारा प्रहार बताया है और इस अभियान का समर्थन किया है। नोटबंदी के बाद हुए कई चुनावों में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। नोटबंदी के बाद गुजरात, महाराष्ट्र में हुए निकाय चुनावों में और चंडीगढ़ में हुए नगर निगम चुनाव में भी बीजेपी को पहले से काफी ज्यादा सीटें मिलीं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश, राजस्थान के उप चुनावों में भी पार्टी ने बाजी मारी।

चंडीगढ़ में बल्ले-बल्ले
नोटबंदी के बाद 18 दिसंबर को चंडीगढ़ नगर निकाय के चुनाव हुए। यहां भाजपा को जबर्दस्त बहुमत मिला। इस चुनाव में 26 में से 20 सीट भाजपा की झोली में गई जबकि सहयोगी पार्टी शिरोमणी अकाली दल को एक सीट मिला। कांग्रेस पार्टी का तो सूपड़ा ही साफ हो गया। वह मात्र 4 सीट पर सिमट गई। भाजपा का वोटिंग शेयर यहां 56 फीसदी हो गया है। चंडीगढ़ निकाय चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले आम आदमी पार्टी के सभी नेताओं की जमानत जब्त हो गई।

महाराष्ट्र निकाय चुनाव में बीजेपी अव्वल
महाराष्ट्र में पहली बार म्यूनिसिपल काउंसिल के अध्यक्ष पद के लिए डायरेक्ट चुनाव हुए। इसमें बीजेपी ने 51 सीटें जीतीं जो कि कांग्रेस, एनसीपी या शिवसेना से दोगुनी है। शिवसेना को 25 और कांग्रेस को महज 23 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। यानी 2011 में जो पार्टी चौथे नंबर पर थी, वो नोटबंदी के फैसले के बाद 2016 में पहले नंबर पर आ गई, वो भी ग्रामीण इलाके में।

गुजरात में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत
गुजरात में हुए स्थानीय चुनावों में तो बीजेपी ने कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ कर दिया। यहां के स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी ने कांग्रेस से 35 सीटें छीन लीं। 126 में से 109 सीटें जीती। वापी नगरपालिका, राजकोट, सूरत-कनकपुर-कंसाड में जो चुनाव हुए, उसमें बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की।

उपचुनाव में भी जीत
नोटबंदी के बाद पहली बार 19 नवंबर को देशभर के विभिन्न राज्यों में 10 विधानसभा और चार लोकसभा क्षेत्रों में चुनाव हुए। भाजपा असम, अरुणाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश की सभी उपचुनाव जीतने में सफल रही।

असम- नोटबंदी के बाद लखीमपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुए। यहां से भाजपा प्रत्याशी प्रधान बरुआ को जीत मिली। बैथालांगसो विधानसभा सीट पर भाजपा के ही मानसिंह रोंगपी ने जीत हासिल की।

मध्य प्रदेश- मध्य प्रदेश की शहडोल लोकसभा सीट और नेपानगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुए। शहडोल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी ज्ञान सिंह और नेपानगर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी मंजू दादू ने जीत दर्ज की।

अरुणाचल प्रदेश- नोटबंदी के बाद अरुणाचल प्रदेश में भी भाजपा की लहर देखने को मिली। भाजपा प्रत्याशी देसिंगू पुल को हायूलियांग विधानसभा सीट से जीत मिली।

त्रिपुरा- यहां उपचुनाव के बाद भाजपा का वोट शेयर 1% से बढ़कर पूरे 21% तक पहुंच गया है। वहीं, कांग्रेस का वोट शेयर 41% से घट कर मात्र 2% हो गया है।

पश्चिम बंगाल- नोटबंदी के बाद पश्चिम बंगाल के कूचबिहार और तामलुक लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुए। कूचबिहार लोकसभा सीट पर भाजपा का वोट शेयर 16.4 से बढ़कर 28.5 फीसदी हो गया। वहीं तामलुक लोकसभा सीट पर भाजपा का वोट शेयर 6.4 से बढ़कर 15.25 फीसदी तक पहुंच गया। दोनों लोकसभा सीट पर भाजपा तृणमूल कांग्रेस के सामने खतरा बनकर उभरी है।

नोटबंदी के फैसले के बाद ज्यादातर नतीजे बीजेपी के पक्ष में गए हैं। सारे परिणाम उत्साहवर्धक रहे हैं। ये सारे परिणाम पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले पर जनता की सहमति का मुहर है। बीजेपी की इस जीत को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अच्छे संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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