Home गुजरात विशेष राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका, NOTA पर रोक नहीं

राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका, NOTA पर रोक नहीं

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राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात राज्यसभा चुनाव में नोटा के इस्तेमाल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस की याचिका खारिज हो गई है। इस फैसले से साफ है कि अब गुजरात में राज्यसभा चुनाव में नोटा (None Of the Above) का इस्तेमाल किया जाएगा। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानिवलकर की पीठ ने राज्य सभा चुनावों में नोटा का प्रावधान करने संबंधी निर्वाचन आयोग की अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कांग्रेस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि जब चुनाव आयोग ने नोटा के लिए 2014 में नोटिफिकेशन जारी किया था तो आपने अपील करने में इतनी देरी क्यों की? ये अब आपके पक्ष में नहीं दिख रहा है तो आप इसे चुनौती दे रहे हैं।

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही NOTA का प्रावधान किया गया है और उसके बाद कई चुनाव हुए जिसमे NOTA का इस्तेमाल भी हुआ है। आयोग के अनुसार 2014 से लेकर अब तक राज्यसभा के चुनाव 25 बार हुए जिनमें 95 सीटों पर वोटिंग हुई। इन सभी सीटों पर नोटा का इस्तेमाल हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में चुनाव आयोग को चुनाव के दौरान ईवीएम में नोटा का विकल्प देने का आदेश दिया था। इसके बाद जनवरी 2014 से नोटा का प्रावधान रखने संबंधी अधिसूचना लागू की गयी है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव को छोड़ कर नोटा का विकल्प सभी चुनावों में होता है।

सुप्रीम कोर्ट कांग्रेस की इस दलील से सहमत नहीं था कि नोटा का प्रावधान भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा। हालांकि पीठ चुनाव आयोग की अधिसूचना की संवैधानिक वैधता पर विचार के लिये सहमत हो गयी है। चुनाव आयोग के अनुसार राज्यसभा चुनाव में अगर कोई विधायक पार्टी व्हिप के खिलाफ जाकर किसी उम्मीदवार को वोट देता है या NOTA का उपयोग करता है तो इसे अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है। हालांकि पार्टी उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है।

कांग्रेस क्यों डरी हुई है ?
गुजरात की जिन तीन राज्यसभा सीटों के लिये चुनाव हो रहे हैं, उसमें पहली दो सीटों पर यानी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी की जीत पक्की मानी जा रही है। जबकि तीसरे सीट के लिये कांग्रेस के अहमद पटेल के सामने बीजेपी के बलवंत सिंह राजपूत मैदान में हैं। कांग्रेस ने बगावत के डर से 44 विधायकों को बेंगलुरु के एक आलीशान रिजॉर्ट में अय्याशी करने के लिये छोड़ रखा है। ऐसे में NOTA का विकल्प होने पर उसे डर है कि कुछ विधायक कहीं इसका उपयोग न कर लें, क्योंकि ऐसा होने पर अहमद पटेल की हार निश्चित है। नियमों के तहत अगर कोई विधायक पार्टी व्हिप का उल्लंघन करता है तो 6 साल तक चुनाव लड़ने पर पाबंदी लग जाती है। लेकिन NOTA का इस्तेमाल करने पर उसे सिर्फ पार्टी से निकाला जा सकता है, चुनाव लड़ने पर बैन नहीं लग सकता।

अहमद पटेल की हार सोनिया की हार होगी ?
बताया जाता है कि सोनिया गांधी कोई भी राजनीतिक निर्णय बिना अहमद पटेल की सलाह के नहीं करतीं। कहा तो यहां तक जाता है कि सोनिया, राहुल कुछ भी करें उसके पीछे दिमाग ज्यादातर इसी व्यक्ति का रहता है। जब वो कांग्रेस परिवार के लिये इतने अहम हैं, तो जाहिर है कि उनकी जीत हार में पार्टी अध्यक्ष की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। इसका अंदाजा इसी से लग जाता है कि इस सीट को बचाने के लिये कांग्रेस ने अपने 40 से अधिक विधायकों को बाढ़ पीड़ित राज्य से दूर करके रख दिया है। राज्य की जनता बाढ़ से बेहाल है लेकिन कांग्रेसी विधायक बेंगलुरु के आलीशान रिजॉर्ट में अय्याशी कर रहे हैं।

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