Home बिहार विशेष भ्रष्टाचार पर ‘ZERO TOLERANCE’ का नीतीश का दावा क्या महज दिखावा है?

भ्रष्टाचार पर ‘ZERO TOLERANCE’ का नीतीश का दावा क्या महज दिखावा है?

नीतीश की भरमाती राजनीति का विश्लेषण करती रिपोर्ट

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” ये आरोप तो तब का है जब मेरी मूछें भी नहीं थीं, 14 साल का बच्चा कोई गलत काम नहीं कर सकता है? भ्रष्टाचार पर मेरी भी नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ की है।” तेजस्वी यादव का ये बयान जेडीयू प्रवक्ता के उस वक्तव्य के बाद आया जिसमें नीतीश कुमार के हवाले से कहा गया कि पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लेकर चल रही है। लेकिन जो तेजस्वी कह रहे हैं, और जो जेडीयू के नेता कह रहे हैं, क्या यही सच है?

एकबार तो ये माना जा सकता है कि 14 साल की उम्र में तेजस्वी घोटाला नहीं कर सकते, लेकिन 28 साल की उम्र में ही वे अरबपति कैसे बन गए, क्या ये बताएंगे तेजस्वी? दूसरी तरफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करने वाले नीतीश कुमार क्या ये बताएंगे कि घोटाले के आरोपी डिप्टी सीएम के साथ कैबिनेट बैठक करते हैं और बाहर आकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात कैसे कर सकते हैं?

तेजस्वी को मंत्रिमंडल में क्यों रखा बरकरार?
नीतीश कुमार को तब खूब सराहना मिली थी जब भ्रष्टाचार के दोषी साबित हो चुके पूर्व डीजीपी नारायण मिश्रा के आवास को जब्त कर लिया था। इस आवास में सरकारी स्कूल खोलने पर काफी तारीफ भी हुई थी। लेकिन क्या सत्ता की मजबूरी में वे अब तेजस्वी पर कार्रवाई करने से डर रहे हैं? बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पर एफआईआर तक दर्ज की जा चुकी है। सीबीआई कभी भी उन्हें गिरफ्तार भी कर सकती है। इसके बावजूद नीतीश कुमार की सरकार में तेजस्वी यादव का रूतवा बरकार है। भले ही नीतीश कुमार यह कहते रहें कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग उनकी प्राथमिकता में है, लेकिन वर्तमान तो उनके दावों को मुंह ही चिढ़ा रहा है।

घोटालेबाजों के साथ क्यों चला रहे सरकार?
नीतीश कुमार जिस पार्टी के साथ बिहार में सरकार चला रहे हैं उसके मुखिया लालू प्रसाद को चारा घोटाले में दोषी ठहराया जा चुका है। उनकी पत्नी, दोनों बेटे, बेटी-दामाद सभी जांच की जद में हैं। सीबीआई इन लोगों से कई बार पूछताछ भी कर चुकी है। लेकिन नीतीश कुमार हैं कि उन्हें सिर्फ अल्टीमेटम दिये जा रहे हैं। वह भी खुलकर अब तक खुद कुछ नहीं कहा है। शायद सत्ता और सिद्धांत के बीच फंसे नीतीश कुमार दोनों में सामंजस्य बिठाने का रास्ता तलाश रहे हैं।

तेजप्रताप पर एक्शन क्यों नहीं ले रहे नीतीश?
चारा घोटाला के सजायाफ्ता लालू प्रसाद के एक और बेटे तेजप्रताप पर भी फरेब करने, झूठी जानकारी देने और अवैध रूप से पेट्रोल पंप हासिल करने जैसे आरोप हैं। बावजूद इसके वे बिहार सरकार में स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा संभाल रहे हैं। नीतीश कुमार जो हमेशा अपने उसूलों की बात करते हैं उनके सारे उसूल तेजप्रताप के साथ कैबिनेट मीटिंग करते हुए खत्म हो जाते हैं। क्या ये नीतीश कुमार का डबल स्टैंडर्ड नहीं है?

सत्ता के लिए सिद्धांतों से समझौता कर रहे नीतीश!
सिद्धांतों की दुहाई देकर बिहार में भाजपा के साथ नीतीश कुमार ने 17 साल पुराने गठबंधन को भी तोड़ दिया था। लेकिन क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष का रास्ता अख्तियार करने वाले नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद के साथ समझौता कर अपने ही सिद्धांतों से समझौता नहीं किया था? एक हद तक माना जा सकता है कि लालू प्रसाद सरकार का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन क्या उनके दोनों बेटे जो भ्रष्टाचार में शामिल हैं, एक पर तो प्राथमिकी भी दर्ज है, के साथ सरकार चला रहे हैं। तो क्या नैतिकता और नीति-सिद्धांतों की दुहाई देने वाले नीतीश कुमार सत्ता और कुर्सी के लिए अपने ही सिद्धांतों की बलि नहीं दे रहे?

‘कभी हां, कभी हां’ की राजनीति कर रहे नीतीश !
लालू प्रसाद के साथ रहते हुए भी दूर-दूर दिखते हैं नीतीश। दूरी बनाकर भी गठबंधन की मजबूती की दुहाई देते हैं नीतीश। जाहिर तौर पर सुशासन कुमार की ये सियासत लोगों को असमंजस में डालती है। लेकिन नीतीश की अपनी चाल है और अपनी राजनीति। यही वजह है कि नीतीश की राजनीति को समझ पाना इतना आसान भी नहीं। बहरहाल राजनीति नीतीश की सत्ता तो बचा सकती है, लेकिन क्या सत्ता की मजबूरी भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ के उनके इमेज भी बचा पाएगा?

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