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शरद यादव के बयान से पसोपेश में नीतीश, क्या ‘Zero tolerance’ पर टूट जाएगी पार्टी ?

बिहार की राजनीति में कुर्सी बचाने, पाने और कांटा बिछाने का दौर जारी है...

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इधर दौड़ है, उधर दौड़ है… यह जीना यारो दौड़ है, कोई आगे है, कोई पीछे है… बस भागमभाग है…दौड़ है… फिल्म दौड़ का यह गाना बिहार की सियासत का दृश्य पेश कर रहा है। जी हां, बिहार की राजनीति में आजकल सिर्फ दौड़ ही दौड़ है। कुर्सी पर बने रहने की दौड़, कुर्सी बचाने की दौड़, कुर्सी पर कांटे बिछाने की दौड़। कभी नीतीश कुमार दिल्ली में सोनिया-राहुल के दरबार की दौड़ लगा रहे हैं, तो कभी जेडीयू के नेता शरद यादव लालू प्रसाद की चौखट से मंत्र लेकर आ रहे हैं। जेडीयू के ही नेता रमई राम भी लालू के ‘शरणागत’ होने की दौड़ लगा रहे हैं, जबकि कांग्रेस के सोनिया-राहुल की पूरी दौड़ (कवायद) बिहार में महागठबंधन को बचाने की है। लेकिन इन सब के बीच बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव हैं जो इस दौड़ का आनंद उठाने में मशगूल हैं। दरअसल बिहार की राजनीति की ये दौड़ राज्य की राजनीति के भविष्य का संकेत दे रही है।

जेडीयू में बागी सुर
बिहार में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के इस्तीफे को लेकर जेडीयू और आरजेडी में जारी तनातनी के बीच जनता दल यू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने रविवार को कहा कि इस समय उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के इस्तीफे से ज्यादा जरूरी है महागठबंधन को बचाना। जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है कि यह नीतीश कुमार के स्टैंड से ठीक उलट है। ऐसे में कयास लगाये जा रहे हैं कि क्या शरद यादव नीतीश कुमार के फैसले के साथ नहीं हैं।

जेडीयू ने साफ किया स्टैंड
इस मुद्दे पर जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता केसी त्यागी ने साफ किया और कहा, ”पार्टी फोरम में सभी मुद्दों पर बातचीत हो चुकी है और महागठबंधन को बचाने की जिम्मेदारी जेडीयू के साथ दोनों अन्य दलों की भी है। जेडीयू भ्रष्टाचार से समझौता नहीं करेगा।” जाहिर है केसी त्यागी का यह स्टैंड पार्टी का आधिकारिक रूख है। दोनों बड़े नेताओं के बयान के साफ संकेत हैं कि महागठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।

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…तो टूट जाएगी जेडीयू !
भ्रष्टाचार पर Zero tollerance का दावा करने वाले नीतीश कुमार तेजस्वी को बर्खास्त करने में इतनी देर क्यों कर रहे हैं? तो इसका जवाब भी बिहार के राजनीतिक पेंच में ही उलझा हुआ है। खबरें हैं कि शरद यादव नीतीश कुमार से नाराज हैं। ऐसे में वे पार्टी के भीतर अपने समर्थकों को इस बात पर राजी कर चुके हैं कि वे कुछ भी हो जाए लालू प्रसाद के साथ ही रहेंगे। कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार के जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से ही वे हाशये पर चले गए हैं और इस स्थिति में वे अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं।

शरद यादव के अलग सुर
नीतीश कुमार के बारे में कहा जाता है कि वे साफ राजनीति करते हैं। फैसले लेने हों, किसी का विरोध करना हो या फिर समर्थन करना हो। लेकिन शरद यादव सरोकारों को निभाने में ज्यादा यकीन रखते हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि शरद यादव नीतीश के कई फैसलों से असहमति रखते हैं। लालू यादव के भ्रष्टाचार का मामला हो, तेजस्वी के इस्तीफे का मुद्दा हो या फिर रामनाथ कोविंद के समर्थन की घोषणा, शरद और नीतीश के सुर अलग-अलग सुनाई दिये।

‘MY’ विधायकों को एनडीए मंजूर नहीं
दरअसल बिहार में सत्ता का समीकरण ऐसा बन पड़ा है कि अगर महागठबंधन टूटता है तो जेडीयू तभी सत्ता में रह सकता है जब उसे एनडीए का समर्थन मिले। लेकिन इस स्थिति में भी एक पेंच फंस गया है। कहा जा रहा है कि एक नीतीश कुमार एनडीए का साथ लेना मंजूर करते हैं तो जेडीयू के अधिकांश यादव और मुस्लिम विधायक आरजेडी में शामिल हो जाएंगे या फिर नई पार्टी बना लेंगे। सूत्रों से खबर है कि 71 में से करीब 20 विधायक और 12 में से 6 सांसद ये फैसला कर चुके है।

महापेंच में फंस गया महागठबंधन
दुविधा की राजनीति से दूर रहने वाले नीतीश कुमार आजकल अजीब कशमकश में फंस गए हैं। एक तरफ भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति है तो दूसरी तरफ लालू यादव की ठसक है। लालू के इस दो टूक पर कि तेजस्वी इस्तीफा नहीं देंगे, नीतीश कुछ नहीं बोल रहे हैं। लेकिन जेडीयू के प्रवक्ता बार-बार दोहरा रहे हैं कि भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि नीतीश कुमार इस मामले में निर्णय लेने में इतनी देर क्यों कर रहे हैं?

राहुल से मंथन का नतीजा क्या?
शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिनर में शामिल होने के पहले नीतीश कुमार ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी। कहा जा रहा है कि उन्होंने गठबंधन बचाने के लिए कांग्रेस को पहल करने को कहा। लेकिन कांग्रेस की तरफ से अब तक ऐसे संकेत नहीं मिले हैं कि वह इस मामले में किसी भूमिका में है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस लालू प्रसाद के साथ खड़ी है। यानि महागठबंधन टूटने के बाद नीतीश को कांग्रेस के साथ की भी उम्मीद नहीं है। ऐसे में नीतीश कुमार क्या निर्णय लेते हैं सबकी नजरें इसपर टिकी हुई हैं।

क्या सुशील मोदी चला रहे हैं जेडीयू?
महागठबंधन में जुबानी जंग के बाद अब ‘पोस्टर वॉर’ शुरू हो गया है। पटना में पोस्टर-बैनर लगाकर जेडीयू के प्रवक्ताओं पर निशाना साधा गया है। बिहार विधानमंडल परिसर के बाहर लगे पोस्टर-बैनर में जेडीयू के चार प्रवक्ताओं की तस्वीर लगाते हुए तंज कसे गए हैं। कहा जा रहा है कि पोस्टर उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के समर्थकों ने लगाए हैं। हालांकि इस पोस्टर का मकसद यह दिखाना है कि नीतश-लालू-तेजस्वी-शरद में सब ठीक है। लेकिन जेडीयू के कुछ नेता महागठबंधन का माहौल खराब करने में लगे हैं और यह सब सुशील मोदी के इशारे पर हो रहा है।

बहरहाल लब्बोलुआब यह है कि महागठबंधन में दरार चौड़ी होती जा रही है। कांग्रेस की कूवत नहीं लग रही है कि वह लालू-नीतीश को एक साथ साध सके। दूसरी तरफ शरद यादव नीतीश के लिए मुश्किल खड़ी करने को तैयार बैठे हैं और लालू प्रसाद अपने चक्रव्यूह में नीतीश को फंसा चुके हैं। अब देखने वाली बात यह है कि तेजस्वी के इस्तीफे के सवाल पर नीतीश पीछे हटते हैं, लालू मान जाते हैं या फिर महागठबंधन टूट जाता है। क्या होगा यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इन तीनों में से किसी भी एक प्रकरण के बाद की राजनीति देखना दिलचस्प जरूर होगा।