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न्यू इंडिया के सपने को पूरा करेंगे गांव, विकास की राह पर बढ़ रहे हैं कदम

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सबका साथ, सबका विकास- यही वो नारा है जिसकी बुनियाद पर न्यू इंडिया खड़ी होने वाली है। इस नारे में हर धर्म, संप्रदाय, जाति, अलग-अलग प्रांत और भाषा-भाषी लोग तो शामिल हैं ही, वे गांव भी शामिल हैं जहां देश की अधिसंख्य आबादी रहती है। इन गांवों को विकास की मुख्य धारा से जोड़कर ही न्यू इंडिया बनाया जा सकता है। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जेहन में रही है और इसलिए इस पर काम भी शुरू हो चुका है।

ग्रामीण योजनाओं का लाभ लोगों तक हो, इसके लिए लगातार बजट में बढ़ोतरी की जा रही है। 2016-17 में 95 हजार करोड़ खर्च किए गये, वहीं 2017-18 के लिए इसे बढ़ाकर 105447.88 करोड़ कर दिया गया है। गांवों के करीब 17 करोड़ परिवारों को लाभ हो, इसके लिए केंद्र सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है।

महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना

मनरेगा पर 2016-17 में 38 हजार 500 करोड़ खर्च किए गये थे, वहीं 2017-18 में 48,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। 100 दिन रोजगार देने के लक्ष्य में कोई कमी ना रह जाए, औसत रोजगार पहले से बढ़े- इस पर भी ध्यान दिया जा रहा है। पहले रोजगार मांगने वाले होते थे, सरकार के पास काम नहीं होता था। अब स्थिति बदली है। अब काम चाहने वालों को तुरंत काम मिल रहा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना

केंद्र सरकार 2019 तक एक करोड़ पक्के मकान बनाने पर काम कर रही है। यह पहल कोई छोटी पहल नहीं है। हर सिर को छत एक ऐसी योजना है जो लोगों को गांवों में रहने के लिए प्रेरित करेगी।

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना

इससे आगे देश के 5 लाख 93 हजार 731 गांवों को पक्की सड़क से जोड़ने पर काम तेजी से चल रहा है। 2015-16 में हर दिन औसतन 91 किमी लम्बी ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया। इस तरह 6500 बस्तियों को भी पक्की सड़कों से जोड़ने में सफलता मिली है।

दीनदयाल अंत्योदय योजना

दीन दयाल अंत्योदय योजना का मकसद गरीबी दूर करना है। प्रधानमंत्री ने 20 मार्च को ग्रामीण विकास के लिए किए जा रहे कार्यक्रम की जो समीक्षा की है, उसमें उन्हें जानकारी दी गयी है कि अब तक 3 करोड़ परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है। आधार कार्ड के जरिए इन्हें दिए जा रहे ऋण पर नजर रखने की हिदायत पीएम ने दी है। जिन्हें लाभ पहुंचाना है, उनको आसानी से ऋण मिल सके, इस पर सरकार पूरा ध्यान दे रही है और खुद प्रधानमंत्री इस बारे में समय-समय पर पूछताछ कर रहे हैं।

कौशल विकास योजना के तहत ट्रेनिंग

कौशल विकास योजना पर समग्रता में काम चल रहा है। इसका मकसद कुशल श्रमिक तैयार करना है जो पूरी दुनिया की जरूरत को पूरा कर सके। अंत्योदय योजना ने भी कौशल विकास को अपनाया है। इस योजना में 28 फरवरी 2017 तक 1 लाख 48 हजार 227 लोगों को कौशल योजना के तहत ट्रेनिंग दी जा चुकी है। कुल 329 प्रकार के कौशल की ट्रेनिंग दी जाती है। इस कौशल विकास योजना में सीखे हुए युवकों को सरकार आवास योजना और अन्य योजनाओं में काम देती है.

राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम

राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम का उद्देश्य गरीबों को सामाजिक सुरक्षा देना है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धापेंशन योजना, इंदिरागांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना, राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना और अन्नपूर्णा योजना ऐसी योजनाएं हैं जो इस मकसद से काम कर रही हैं। भ्रष्टाचार रुका है। अब सीधे खाते में धन मिल रहे हैं। इसलिए गरीबों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है। अब तक 3 करोड़ 84 लाख से ज्यादा लोगों को इन योजनाओं के माध्यम से लाभ पहुंचाया जा चुका है।

क्वालिटी पर कड़ी नज़र

काम की क्वालिटी सही रखने और तय समय में काम पूरा हो, इस पर नजर रखने के लिए जियो टैगिंग, ऑनलाइन मॉनिटरिंग, खातों से भुगतान, 5 हजार रुपये से ऊपर की राशि का नकद में भुगतान नहीं करने जैसे नियम बनाए गये हैं। इस तरह एक पारदर्शी तंत्र खड़ा हो रहा है।

हर गांव में बिजली की दिशा में चल रहा है प्रयास

गांवों के विकास में बिजली की बड़ी भूमिका होने वाली है। इसे समझते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर गांव में बिजली की पहल की है। लक्ष्य ऐसा है कि कोई गांव बिना बिजली के नहीं रहे। बिजली का उत्पादन, सोलर एनर्जी, विन्ड एनर्जी हर क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाए जा रहे हैं। वहीं, गांवों तक बिजली के लिए बुनियादी ढांचा बनाया जा रहा है। बिजली की बचत पर भी काम किया जा रहा है। इसी के तहत 33 करोड़ Led बल्ब बांटे गये हैं और गरीबों को 11 हजार करोड़ की बचत हुई है।

न्यू इंडिया के जो मुहिम छेड़ी गयी है वो अपने मकसद में कामयाब हो, इसके लिए गांवों को प्राथमिकता दी जा रही है। अगर 70 फीसदी आबादी को रोशनी मिल गयी, तो ऊर्जा से लवरेज होकर गांव भी शहरों की श्रेणी में आ खड़ी होगी। पीएम मोदी का सपना है गांवों को ऐसा बनाना जहां सुविधाएं शहर जैसी हों पर आत्मा गांवों की हो।

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