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पत्रकारिता के नकारात्मक ‘पति-पत्नी’

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पत्रकारिता, अब मिशन नहीं, व्यवसाय बन गया है जहां काम करने वालों को अपनी तर्कहीन बातों को ‘बाजार’ के हिसाब से परोसने में आनंद मिलता है। आज के पत्रकार देश के लिए बनावटी चिंता करते हैं और हर मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी को कोसना अपना धर्म मानते हैं, इन्हें दूर-दूर तक जीवन की जटिलताओं से कोई मतलब नहीं। इस नकारात्मक पत्रकारिता को देश में परोसने का काम वैसे तो कई पत्रकार कर रहे हैं, लेकिन पत्रकार पति-पत्नी, विनोद कापड़ी एवं साक्षी जोशी एक साथ मिलकर ऐसी नकारात्मक पत्रकारिता करते हैं।

विनोद कापड़ी, लंबे समय तक कई टीवी चैनलों के संपादक के पद पर काम कर चुके हैं और आजकल फिल्में बनाने का काम करते हैं, जबकि उनकी पत्नी साक्षी जोशी एक हिन्दी न्यूज चैनल में एंकर हैं। इन दोनों, पति-पत्नी, की नकारात्मक पत्रकारिता से देश को तो कोई लाभ नहीं मिलता, अलबत्ता ये देश में नकारात्मकता का माहौल बनाने का प्रयास करते हैं। आइये, आपको सबूतों के साथ बताते हैं कि कैसे ये दोनों मिलकर, सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में नकारात्मक पत्रकारिता करते हैं-

नकारात्मक पत्रकारिता-1
साक्षी जोशी ने 25 दिसंबर को नोएडा में प्रधानमंत्री मोदी की जनसभा में हुए भाषण में भी नकारात्मकता फैलाने का मौका नहीं छोड़ा। साक्षी ने Facebook Post पर लिखा-
नकारात्मक पत्रकारिता-2
25 दिसंबर को ही, प्रधानमंत्री मोदी के नोएडा में दिए जा रहे भाषण के दौरान, साक्षी जोशी ने Facebook Post पर प्रधानमंत्री मोदी के बारे में नकारात्मकता पैदा करने वाली अमर्यादित Parody लिख दी-
नकारात्मक पत्रकारिता-3
विनोद कपाड़ी ने 22 अक्टूबर को, नोटबंदी के बाद वेबसाइट पर एक कहानी लिखी। यह कहानी नोटबंदी के इर्द-गिर्द घूम रही है। इस कहानी में जिस अमर्यादित ढंग से प्रधानमंत्री मोदी की छवि को नकारात्मक रुप में पेश किया है, उससे देश का यह क्या भला कर रहे हैं? नोटबंदी पर कोई तार्किक विश्लेषण किया होता तो समझ में भी आता कि हां कोई समझदार पत्रकार बात कर रहा है, लेकिन इनका तो एक ही मकसद है कि प्रधानमंत्री मोदी की छवि को हर तरह से नकारात्मक बनाओ।
नकारात्मक पत्रकारिता-4
नोटबंदी के एक साल बाद, साक्षी जोशी ने Facebook Post पर प्रधानमंत्री पर अमर्यादित और असभ्य टिप्पणी करते हुए एक वीडियो शेयर किया। प्रधानमंत्री के बारे में ऐसी बात लिखने वाले पत्रकार की मंशा के बारे में Post पढ़कर ही समझ में आ जाता है।नकारात्मक पत्रकारिता-5
एजेंडा पत्रकार साक्षी जोशी ने 27 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी के गुजरात चुनाव में प्रचार पर नकारात्मक माहौल बनाने के लिए Facebook Post पर लिखा कि जिस गुजरात के विकास मॉडल की दूसरे राज्यों में दुहाई देते फिरते हैं, उसी गुजरात की जनता को बार-बार याद दिलाना पड़ रहा है कि मेरा ‘विकास’ याद है ना मित्रों। यह पत्रकार की भाषा कम किसी राजनीतिक कार्यकर्ता की भाषा ज्यादा लगती है।
नकारात्मक पत्रकारिता-6
22 दिसंबर को विनोद कापड़ी ने Twitter पर Business Standarad की खबर- Varanasi chokes as air quality 20 times above safe levels worse than Delhi- को शेयर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर ही निशाना साध दिया। प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने का मौका ढूंढने वाले इस एजेंडा पत्रकार ने लिखा-


नकारात्मक पत्रकारिता-7
विनोद कापड़ी ने डेरा सच्चा सौदा के लोगों द्वारा हरियाणा में हुई हिंसा को लेकर उच्च न्यायलय की टिप्पणी को तोड़-मरोड़कर समाचारपत्र में प्रकाशित समाचार की हेडलाइन-‘He is PM of India, not BJP,’ says Furious High Court After Haryana Riots- को 26 अगस्त को अपने Facebook पर Post करते हुए लिखा कि मैं इस खबर को Front Page पर 8 column की खबर बनाता, जबकि उच्च न्यायलय ने प्रधानमंत्री को लेकर ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की थी। इस झूठी खबर को अधिक महत्व देने की विनोद कापड़ी की मंशा जाहिर करता है कि प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ी किसी भी नकारात्मक खबर को प्रमुखता देना अपना धर्म मानते हैं।

नकारात्मक पत्रकारिता-8
20 दिसंबर को विनोद कापड़ी ने Indian Express की खबरों को शेयर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के New India को इन खबरों से जोड़ते हुए एक नकारात्मक कुतर्क रच डाला-These two news will give you some idea of # New India।


नकारात्मक पत्रकारिता-9
नकारात्मक पत्रकारिता करने वाले विनोद कापड़ी यही समझते हैं कि वे जो कह रहे हैं वही सत्य है, बाकी इस देश में सभी गलत कर रहे हैं। इन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मावती फिल्म पर यदि कोई बयान दिया, तो उसे तर्क से समझने या समझाने के बजाय, प्रधानमंत्री मोदी की छवि को नकारात्मक रुप में पेश करने का मौका बना दिया। विनोद ने 21 नवंबर को Tweet में लिखा कि-As I wrote earlier fringe is now mainstream।


नकारात्मक पत्रकारिता-10
विनोद कापड़ी और साक्षी जोशी जिस प्रधानमंत्री मोदी और सरकार के लिए नकारात्मक माहौल बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ते, उसी मोदी सरकार ने विनोद कपाड़ी द्वारा निर्देशित फिल्म ‘पीहू’ को गोवा फिल्मोत्सव-2017 के Indian Panorama में प्रिमियर शो करने का मौका मिलता है, और सरकार के हर संचार माध्यमों पर पूरा प्रचार भी मिलता है।


प्रधानमंत्री मोदी और सरकार के खिलाफ नकारात्मकता को फैलाना यदि पति-पत्नी का एजेंडा है, तो ऐसी पत्रकारिता से पत्रकारों का दोष उजागर होता है न कि सरकार और प्रधानमंत्री मोदी का। ऐसी नकारात्मक पत्रकारिता से किसी गरीब का भी भला नहीं हो सकता, इससे तो सिर्फ पत्रकार को एक झूठे अभिमान का आनंद ही मिलता, जो प्रजातंत्र के लिए खतरनाक है।

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