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पीएम मोदी ने निभाया वादा, ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का रास्ता साफ

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मोदी सरकार की हर योजना, हर कार्यक्रम का केंद्र बिंदु गरीब, कमजोर, पिछड़ा तबका है। अंत्योदय प्रधानमंत्री का संकल्प है और समतामूलक एवं न्यायपूर्ण समाज की स्थापना उनका उद्देश्य। इसी को और सशक्त करने के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा में ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा देने वाला बिल पास करवा लिया है। जाहिर है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल से उठाया गया यह कदम समाज के पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाने में क्रांतिकारी सिद्ध होने वाला है।

गौरतलब है कि संविधान में अनुच्छेद 342(क) जोड़कर प्रस्तावित आयोग को सिविल न्यायालय के समकक्ष अधिकार दिये जा सकेंगे। इससे आयोग को पिछड़े वर्गों की शिकायतों का निवारण करने का अधिकार मिल जाएगा। ओबीसी आयोग को दंड देने का भी अधिकार मिल जाएगा, वहीं जातियों को केंद्रीय सूची में शामिल करने के प्रस्तावों पर भी फैसला ले सकेगा। गौरतलब है कि अभी तक आयोग को ऐसे मामलों में सिर्फ विचार करने का अधिकार था।

दरअसल मोदी सरकार ने सत्ता में आने के साथ ही यह तय कर लिया था कि वह ओबीसी समाज के भले के लिए हर हाल में संवैधानिक दर्जा देगा। इसके लिए वर्ष 2015 से ही लगातार प्रयास भी करती आ रही थी, लेकिन कांग्रेस समेत कई विरोधी पार्टियां बार-बार इसमें अड़ंगा डाल रही थी। हालांकि अब यह जल्द ही अस्तित्व में आने वाला है और ओबीसी आयोग समाज के पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाने में मोदी सरकार का निर्णय एक ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा।

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दलित अत्याचार निवारण कानून के मूल प्रावधानों को बहाल करने के लिए एससी-एसटी संशोधन विधेयक 2018 लाया जाएगा। मोदी सरकार ने एक अगस्त को संशोधित विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अधिनियम के अनुच्छेद 18 अब 18ए हो जाएगा, जिससे कानून के प्रावधान सख्त हो जाएंगे। संशोधन के बाद धारा 438 के प्रावधान निष्क्रिय हो जाएंगे। इसके तहत तहत जांच कराने के बाद ही गिरफ्तारी हो सकती है।

मोदी सरकार ने सशक्त किया दलित उत्पीड़न कानून

  • दलित उत्पीड़न के मामलों के लिए विशेष अदालतों का गठन
  • सरकारी वकीलों की उपलब्धता को सुनिश्चित करने का प्रावधान
  • आरोपपत्र के दो महीने के अंदर न्याय दिए जाने की प्रतिबद्धता
  • सहायता राशि 85,000 से 8,25,000 रुपये तक किया गया

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