Home विचार कांग्रेस के ‘मुंगेरी लाल’ यानि राहुल गांधी के हसीन सपने

कांग्रेस के ‘मुंगेरी लाल’ यानि राहुल गांधी के हसीन सपने

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लोकसभा के चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी देश की जनता को हसीन सपने दिखाने वाले भाषण करने लगे हैं। राहुल गांधी की कांग्रेस वही पार्टी है जिसने सत्तर के दशक में देश में गरीबी हटाओ का हसीन सपना दिखाया था। उस समय कांग्रेस चुनाव तो जीत गई और उसके बाद के चुनाव भी जीतती रही, लेकिन गरीबी हटने के बजाए बढ़ती रही। आज फिर कांग्रेस एक हसीन सपना दिखा रही है कि वह सत्ता में आते ही गरीबों के लिए बेसिक मिनिमम इनकम की योजना लागू करेगी। राहुल गांधी ने रायपुर में भाषण देते हुए कहा कि इस योजना से देश में गरीबी खत्म हो जाएगी, कोई भूखा नहीं रहेगा। एक बार फिर कांग्रेस के मुंगेरी लाल… राहुल गांधी हसीन सपने दिखा रहे हैं। यह समझना जरूरी है कि देश को मुंगेरी लाल ने जो हसीन सपने दिखाए थे उसका क्या हाल हुआ..

गरीबी हटाओ का कांग्रेस का हसीन सपना

देश में 1971 के लोकसभा चुनाव से पहले ‘इंदिरा हटाओ’ का माहौल पूरे देश में विपक्ष ने खड़ा कर दिया था। इसमें जीत हासिल करने के लिए कांग्रेस की नेता इंदिरा गांधी ने देश को एक हसीन सपना ‘गरीबी हटाओ’ का दिखाया। जनता को कांग्रेस के ‘गरीबी हटाओ’ के सपने पर भरोसा हुआ और कांग्रेस को चुनाव में जबरदस्त जीत मिली। लेकिन कांग्रेस ने जनता को जो सपना दिखाया वह जीत के साथ ही ध्वस्त हो गया। कांग्रेस ‘गरीबी हटाओ’ के सपने को भूल गई और अपने सत्ता के खेल में लग गई। देश के हालात जस के तस बने रहे। गरीब अपनी गरीबी पर आंसू बहाते रहे। एक बार फिर 1985 में राहुल गांधी के पिताजी स्व. राजीव गांधी ने कांग्रेस के अधिवेशन के संबोधन में देश’ गरीबी हटाओ’ का हसीन सपना दिखाया। फिर भी कांग्रेस गरीबों की गरीबी दूर नहीं कर पायी।

2004 से 2014 तक दस सालों तक लगातार देश में शासन करने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर देश की जनता को हसीन सपने दिखा रहे हैं। यह समझना किसी के लिए भी कठिन नहीं है कि हसीन सपने दिखाने वाली कांग्रेस जमीनी स्तर पर कितना काम करती है। 1971 से यदि कांग्रेस ने वास्तविक रूप में देश से ‘गरीबी हटाओ’ के सपने पर काम किया होता तो आज फिर से कांग्रेस को ‘गरीबी हटाओ’ के सपने दिखाने का मौका ही नहीं मिलता।

किसानों के कर्जमाफी का कांग्रेसी सपना

मुंगेरी लाल के हसीन सपने दिखाने वाली कांग्रेस ने एक बार फिर 2008 में किसानों को हसीन सपना दिखाया। 2009 के लोकसभा चुनाव में जाने से पहले कांग्रेस ने एक बार फिर हसीन सपना दिखाया। कांग्रेस ने वादा किया कि वह देश के किसानों का 60 हजार करोड़ रुपया माफ करेगी। यह 60 हजार करोड़ रुपया ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुआ। देश में किसानों के ऊपर चार लाख करोड़ रुपये का कर्ज था, लेकिन सिर्फ 60 हजार करोड़ रुपये माफ हुए। इसमें भी बंदरबाट हुई, जो किसान असली में कर्जदार थे उनका तो ऋण माफ नहीं हुआ बल्कि उन लोगों का माफ हुआ जिन्होंने मोटरसाइकिल, स्कूटर आदि सामानों के लिए कर्ज ले रखा था। सीएजी की रिपोर्ट बताती है कि 40 प्रतिशत ऐसे फर्जी किसानों का ऋण माफ किया गया, जिन्होंने ऋण लिया ही नहीं था। इस तरह से करीब 25 हजार करोड़ रुपये कांग्रेस ने अपनी जेब में डाल लिए। कांग्रेस देश के गरीबों को हसीन सपने इसलिए दिखाती है कि वह सत्ता पा सके और गरीबों के नाम पर सरकारी खजाने को लूट सके।

मनरेगा…कांग्रेस का हसीन सपना

कांग्रेस ने 2005 में देश के गरीबों को मनरेगा का हसीन सपना दिखाया। संसद से कानून पारित करके ग्रामीण क्षेत्रों में हर वयस्क को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन का न्यूनत्तम काम देने का वादा किया। मनरेगा के तहत काम करने के लिए मजदूरी को भी निर्धारित कर भी कर दिया। लेकिन इसके तहत मजदूरों को काम नहीं मिलता था यदि काम मिलता भी था तो समय पर मजदूरी नहीं मिलती थी। हाल ऐसा हुआ कि मनरेगा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक रोग बन गया।अब कांग्रेस का न्यूनत्तम आय का हसीन सपना

कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने रायपुर में देश को एक बार फिर मुंगेरी लाल के हसीन सपने दिखाए हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ में वादा किया कि केंद्र की सत्ता में आते ही कांग्रेस देश के गरीबों को हर माह न्यूनतम आय देगी। कांग्रेस के मुंगेरी लाल यानि राहुल गांधी का कहना था कि इस न्यूनतम आय से देश का कोई व्यक्ति भूखा नहीं रहेगा। मुंगेरी लाल ने सपना तो दिखा दिया, लेकिन यह नहीं सोचा कि इतना पैसा कहां से लाएंगे। जब किसानों का चार लाख करोड़ रुपया माफ करना था तो सिर्फ 60 हजार करोड़ रुपये ही माफ कर सकी और माफ करने में भी किसी को मिला और किसी को नहीं मिला। ऐसा ही हाल कुछ न्यूनतम आय के हसीन सपने के साथ भी होगा। राहुल गांधी ने कहा कि वह न्यूनतम आय के लिए प्रधानमंत्री मोदी डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम का सहारा लेंगे, इस स्कीम में प्रधानमंत्री मोदी आधार संख्या से जुड़े हुए गरीबो के बैंक खातों में सीधे आर्थिक सहायता देते हैं। इस स्कीम का राहुल गांधी ने जमकर विरोध किया था और उनके चमचों ने सर्वोच्च न्यायालय में आधार संख्या को खत्म करने की गुहार लगायी थी। 

कांग्रेस देश के लोगों को सिर्फ हसीन सपने दिखाकर सत्ता पा लेने के लिए ही सोचती है। वह उन सपनों को सही तरीके से लागू करने का प्रयास नहीं करती है, जिसका फल यह हुआ है कि देश का गरीब कांग्रेस के शासन के दौरान गरीब का गरीब ही रहा।

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