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प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष के झूठ का किया पर्दाफाश, बताया किस तरह एक वर्ष में 1 करोड़ लोगों को मिला रोजगार

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, साथ ही साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। विपक्षी दलों द्वारा लगातार यह भ्रम फैलाया जाता है कि देश में युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है, जबकि वास्तविकता इसके उलट है। लोकसभा में विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रोजगार को लेकर विपक्षी दलों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम और झूठ का पर्दाफाश किया। उन्होंने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि किस तरह पिछले वर्ष एक करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।

संगठित क्षेत्र में 70 लाख लोगों को मिली नौकरियां
प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में कहा कि संगठित क्षेत्र में रोजगार वृद्धि मापने का तरीका है Employee Provident Fund यानी EPF में कर्मचारियों की घोषणा। ईपीएफ के सितम्बर, 2017 से लेकर मई, 2018 तक 9 महीनों के आंकड़ों के मुताबिक लगभग 45 लाख नए नेट सब्स्क्राइबर ईपीएफ से जुड़े हैं। इनमें से 77 प्रतिशत 28 वर्ष से कम उम्र के हैं। इतना ही नहीं फार्मल सिस्टम में न्यू पैंशन स्कीम यानी NPS में पिछले 9 महीने में 5 लाख 68 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इस तरह ईपीएफ और NPS के दोनों आंकड़ों को मिलाकर ही पिछले 9 महीनों में संगठित क्षेत्र में 50 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। जाहिर है कि अगर पूरे वर्ष के हिसाब से देखें तो यह संख्या 70 लाख से अधिक होगी। यानि पिछले एक वर्ष में 70 लाख से अधिक लोगों को संगठित क्षेत्र में रोजगार मिला है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि इस संख्या में ईएसआईसी के आंकड़ों को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि इनके आधार लिंकिंग का काम अभी चल रहा है।

डॉक्टर, सीए और वकालत जैसे प्रोफेशन में 6 लाख से अधिक लोगों को रोजगार
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि संगठित क्षेत्र के अलावा देश में कई प्रोफेशनल बॉडीज हैं, जिनमें युवा प्रोफेशनल डिग्री लेकर अपने आपको रजिस्टर करते हैं और अपना काम करते हैं। उदाहरण के तौर पर डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, आर्किटेक्ट्स, लॉयर्स, चार्टर्ड अकांउटेंट्स, कॉस्ट अकाउंट्स कंपनी, कंपनी सेक्रेटरीज। श्री मोदी ने बताया कि इन फ्रोपेशनल बॉडीज में रोजगार को लेकर एक स्वतंत्र संस्थान ने सर्वे किया है और इस सर्वे के मुताबिक लाखों लोगों को इन पेशेवरों ने रोजगार दिया है। सर्वे के अनुसार 2016-17 में लगभग 17,000 नये चार्टर्ड अकांउटेंट सिस्टम में जुड़े हैं। इनमें से 5,000 से ज्यादा लोगों ने नई कंपनियां शुरू की हैं। अगर एक चार्टर्ड अकांउट संस्था में बीस लोगों को रोजगार मिलता है, तो इन संस्थाओं में एक लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है।

इसी प्रकार हर वर्ष देश में 80,000 से ज्यादा पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टर, डेंटल सर्जन और आयुष डॉक्टर शिक्षित होकर कॉलेज से निकलते हैं। इनमें से अगर साठ प्रतिशत भी खुद की प्रैक्टिस करें तो प्रति डॉक्टर पांच लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और ये संख्या 2,40,000 होगी। इसी तरह 2017 में 80,000 अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट वकील बने। इनमें से अगर 60 वकीलों ने अपनी प्रैक्टिस शुरू की होगी और अपने दफ्तर में दो-तीन लोगों को रोजगार दिया होगा, तो लगभग दो लाख रोजगार इन वकीलों के माध्यम से मिले। जाहिर है कि इन तीनों पेशों में ही 2017 में 6 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं।

ट्रांस्पोर्ट सेक्टर में ही 20 लाख से अधिक लोगों को मिला रोजगार
जाहिर सी बात है कि जब संगठित क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला है तो फिर असंगठित क्षेत्र में इससे अधिक लोगों को रोजगार मिला होगा। लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने असंगठित क्षेत्र में सिर्फ ट्रांस्पोर्ट सेक्टर की बात की। उन्होंने गाड़ियों की बिक्री के जरिए यह बताया कि इस क्षेत्र में कितनी बड़ी संख्या में लोग रोज-रोटी कमा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष ट्रांस्पोर्ट सेक्टर में 7,60,000 कामर्शियल गाड़ियों की बिक्री हुई। इन गाड़ियों में से अगर 25 प्रतिशत गाड़ियों की बिक्री पुरानी गाड़ियों को बदलने के लिये मान लें तो 5,70,000 नई गाड़ियां सामान ढुलाई के लिये सड़क पर उतरी। ऐसी एक गाड़ी पर दो लोगों को भी अगर रोजगार मिलता है, तो रोजगार पाने वालों की संख्या 11,40,000 होती है।

इसी प्रकार सवारी गाड़ियों की बिक्री के आंकड़ें देंखे तो पिछले वर्ष इनकी संख्या 25,40,000 थी। इनमें से अगर 20 प्रतिशत गाड़ियां पुरानी गाड़ियों को बदलने की मानी जाएं, तो लगभग 20 लाख नई गाड़ियां सड़कों पर उतरीं। इन नई गाड़ियों में अगर केवल 25 प्रतिशत भी ऐसी मानी जाए जो एक ड्राइवर को रोजगार देती हैं, तो इससे पांच लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा।

इसी तरह पिछले साल देश 2,55,000 ऑटो की बिक्री हुई है। इनमें से 10 प्रतिशत की बिक्री अगर पुरानी ऑटो बदलने की मानी जाए, तो लगभग 2,30,000 नए ऑटो पिछले वर्ष सड़क पर उतरे हैं। आपको बता दें कि ऑटो दो शिफ्ट में चलते हैं, तो दो ऑटो से तीन लोगों को रोजगार मिलता है। ऐसे में 3,40,000 लोगों को नए ऑटो के जरिए रोजगार मिलता है। इन सभी को यदि जोड़ दिया जाए तो अकेले ट्रांस्पोर्ट सेक्टर में ही पिछले एक वर्ष में बीस लाख लोगों को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि ईपीएफ, एनपीएस, प्रोफेशनल, ट्रांस्पोर्ट सैक्टर की अगर हम जोड़कर के देखें तो अकेले पिछले वर्ष में एक करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है।

असंगठित क्षेत्र में ट्रांस्पोर्ट के अलावा कंस्ट्रक्शन एक बहुत बड़ा सेक्टर है। पिछले वर्षों में निर्माण के क्षेत्र में बहुत वृद्धि हुई है। सरकार द्वारा चलाई जा रही विकास की परियोजनाओं, सड़क निर्माण, आवास निर्माण जैसे क्षेत्र में लाखों मजदूरों और राजमिस्त्रियों को रोजगार मिला है। यानि विपक्ष का यह कहना की देश में रोजगार नहीं मिल रहे है, पूरी तरह से झूठ साबित होता है।

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