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प्रधानमंत्री मोदी की बंपर जीत से विपक्षी नेताओं की बत्ती गुल, कोई दे रहा इस्तीफा, तो किसी की पार्टी पर संकट

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लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुनामी के आगे सारे विपक्षी दल ध्वस्त हो गए हैं। चुनाव से पहले कांग्रेस, सपा, बसपा, आप, आरजेडी जैसे तमाम दल बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे। टीडीपी के चंद्रबाबू तो चुनाव के बाद गठबंधन बनाने के लिए विपक्षी नेताओं के चक्कर भी लगाने लगे थे। लेकिन 23 मई को नतीजों ने सभी विपक्षी नेताओं की हवाइयां उड़ गई। बीजेपी के मिले इतने प्रचंड जनादेश को ये विपक्षी नेता पचा नहीं पा रहे हैं और कोई नेता ऊलजलूल बयान दे रहा है, तो किसी ने इस्तीफे की बात कही है, कई पार्टियों का तो अस्तित्व ही संकट में आ गया है। डालते हैं एक नजर-

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने की इस्तीफे की पेशकश
मोदी की सुनामी में कांग्रेस पार्टी के अरमानों पर ही पानी नहीं फिरा, बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी अमेठी से उखड़ गए। पंद्रह साल से अपने परिवार की परंपरागत सीट अमेठी का प्रतिनिधित्व कर रहे राहुल गांधी को भाजपा की स्मृति ईरानी ने 50 हजार से अधिक वोटों से हरा दिया। इतना ही नहीं कांग्रेस पार्टी भी 52 सीटों पर सिमट गई। इस शर्मनाक हार का असर है कि राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश की है। हालांकि कांग्रेस कार्यसमिति ने उनका इस्तीफा अस्वीकार कर दिया है, लेकिन राहुल इस्तीफे पर अड़े हुए हैं।

ममता बनर्जी अब मुख्यमंत्री नहीं रहना चाहती
पश्चिम बंगाल में पीएम मोदी की अगुवाई में भाजपा ने 18 सीटों पर जीत हासिल कर ममता बनर्जी के किले में सेंध लगा दी है। भाजपा की इस जीत से ममता बनर्जी अंदर तक हिल गई हैं। पश्चिम बंगाल में खिसकती जमीन से खिसियाई ममता बनर्जी ने पार्टी में इच्छा जताई है कि वे अब मुख्यमंत्री नहीं रहना चाहती हैं। हालांकि पार्टी ने उनकी मांग को ठुकरा दिया है।

लालू यादव ने खाना पीना छोड़ा
मोदी की सुनामी में बिहार में राष्ट्रीय लोकदल का सफाया हो गया है। लालू के बेटे तेजस्वी यादव के नेतृत्व में बना महागठबंधन धराशायी हो चुका है, आरजेडी को एक भी सीट नहीं मिली है। चुनाव परिणाम से अस्पताल में भर्ती लालू प्रसाद यादव को गहरा सदमा लगा है। बताया जा रहा है कि लालू यादव ने खाना-पीना छोड़ दिया है और उनकी हालत गंभीर होती जा रही है।

उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी खात्मे की कगार पर
लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद बिहार में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी खात्मे की कगार पर पहुंच गई है। चुनाव से पहले एनडीए का हिस्सा रहे और मोदी सरकार में मंत्री रहे उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए छोड़कर महागठबंधन ज्वाइन कर लिया था। इस चुनाव में उनका एक भी प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाया और चुनाव परिणाम के बाद आरएलएसपी के दो विधायकों और एक एमएलसी भी पार्टी छोड़कर जेडीयू में शामिल हो गए। यानि अब उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी संकट में पहुंच गई है।

टीडीपी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू हुए खामोश
चुनाव परिणाम से पहले विपक्षी दलों को एकजुट करने के लिए जबरदस्त तरीके से सक्रिय रहे टीडीपी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू अब एकदम खामोश हो चुके हैं। देश में सरकार बनाने का सपना देखने वाले चंद्रबाबू नायडू की अपने ही राज्य में सरकार चली गई है। विधानसभा चुनाव में टीडीपी को सिर्फ 22 सीटें ही मिली हैं। लोकसभा में टीडीपी सांसदों की संख्या सिर्फ तीन रह गई है।

अरविंद केजरीवाल का जोश पड़ा ठंडा
लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद दिल्ली के विवादित मुख्यमंत्री और आप नेता अरविंद केजरीवाल का जोश भी ठंडा हो गया है। पिछली बार लोकसभा में आप के चार सांसद थे और दिल्ली में उसे काफी अच्छी संख्या में वोट मिला था। लेकिन इस बार प्रधानमंत्री मोदी की आंधी में केजरीवाल के सपने चकनाचूर हो गए। दिल्ली में आप के वोट पर्सेंटेज में भारी गिरावट आई है और पार्टी पंजाब से सिर्फ एक सीट जीत पाई है। अब केजरीवाल अपने कार्यकर्ताओं से इन परिणामों को भूलकर विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटने की अपील कर रहे हैं।

कमलनाथ और गहलोत अपने सरकारें बचाने में जुटे
लोकसभा चुनाव के पहले बड़ी-बड़ी बातें कहने वाले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के होश फाख्ता हो चुके हैं। राजस्थान में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला, जबकि एमपी में कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीत पाई है। दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकारे बैशाखियों पर चल रही हैं और अब ये बड़बोले नेता अपनी सरकारे बचाने में जुटे हुए हैं।

नतीजों के बाद बुआ-बबुआ सन्नाटे में
लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन का हौव्वा खड़ा किया गया, लेकिन चुनाव के बाद बुआ-बबुआ चारो खाने चित हो चुके हैं। 50 से ज्यादा सीट जीतने का दावा करने वाली मायावती और अखिलेश की जोड़ी कुल 15 सीटों ही जीत सकी है। दलितों का मसीहा होने का दंभ भरने वाली मायावती जहां इसके लिए ईवीएम को जिम्मेदार ठहरा रही हैं, वहीं अखिलेश यादव ने तो चुप्पी साध ली है। अपनी पत्नी और भाइयों की सीट भी नहीं बचा वालने अखिलेश यादव ने किरकिरी से बचने के लिए सभी पार्टी प्रवक्ताओं को बर्खाश्त कर दिया है और मीडिया से दूरी बना ली है।

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