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मोदी के ‘न्यू इंडिया’ में ‘न्यू वूमेन’ का बुलंद होता हौसला

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‘न्यू इंडिया’ के रूप में देश के सामने एक नया लक्ष्य, एक नई सोच है। यह नये भारत के निर्माण की रूपरेखा है। इसमें महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त करने की योजनाएं हैं। इन योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने की नीतियां हैं। सत्तर सालों से चली आ रही ‘सब चलता है’ की मानसिक कारा को तोड़ने की पहल है। तीन तलाक पर मुस्लिम समाज की महिलाओं के पक्ष में प्रधानमंत्री मोदी की आवाज, उन सामाजिक भेदभाव के खिलाफ एक पहल थी, जिस पर सर्वोच्च न्यायलय ने भी 22 अगस्त, 2017 को अपनी मुहर लगा दी। सर्वोच्च न्यायलय का फैसला न्यू इंडिया के लक्ष्य को प्राप्त करने में एक मील का पत्थर है। इससे लगभग 8 करोड़ मुस्लिम महिलाओं में अपने सामाजिक और आर्थिक हक के लिए चेतना जगेगी, जो उन्हें ‘ न्यू इंडिया’ की विकास धारा से जोड़ने में सेतु का काम करेगा।

हमेशा विश्वास बढ़ाया
महिलाओं का न्यू इंडिया में भागीदारी सुनिश्चित होना आवश्यक है। यह तभी हो सकता है जब वास्तविक जीवन में उनकी समस्याओं का समाधान मौजूद हो। समस्याओं के जाल टूटने पर ही वे शिक्षा और रोजगार के लिए आगे आ सकती हैं। प्रधानमंत्री मोदी महिलाओं की समस्याओं को समझते हैं। इन्हें दूर करने के लिए वह सरकार के स्तर पर तो काम करते ही हैं, व्यक्तिगत स्तर पर भी पहल करते रहते हैं। हाल ही में, महिला क्रिकेट विश्व कप के फाइनल में जब देश की टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेल रही थी, तो लगातार ट्वीट करके टीम का मनोबल बढ़ाते रहे। भारतीय टीम यह मैच हार गई, लेकिन प्रधानमंत्री ने महिला क्रिकेट टीम को अपने निवास पर बुलाया और मुलाकात की। उनका हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आप मैच नहीं हारीं हैं, आपने जिस हौसले और विश्वास के साथ मैच खेला उसने सवा सौ करोड़ देशवासियों का दिल जीत लिया है ।

असरदार सोच
महिलाओं को अपनी शक्ति पर विश्वास करने और पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त करने के आदर्श अब तक मात्र कोरी बातें थीं। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने छोटे-छोटे कामों को करने की पहल करके महिलाओं में विश्वाश तो भरा ही है, साथ ही उनमें यह भरोसा भी उत्पन्न किया है कि उनके सम्मान और विकास के बारे में सोचने और कुछ कर गुजरने वाला एक व्यक्ति सरकारी तंत्र के उच्च शिखर पर बैठा है। सेनाओं में महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करना हो, फाइटर प्लेन उड़ाने के लिए मौका देने की बात हो, 26 हफ्तों का मातृत्व अवकाश हो या व्यवसाय के लिए मुद्रा ऋण हो, सभी तरीकों से महिलाओं के सशक्तिकरण को हकीकत में बदलने का काम किया है। प्रधानमंत्री मोदी की महिलाओं के लिए लागू की गई योजनाओं पर नजर डालने से स्पष्ट होता है कि छोटे-छोटे परिवर्तनों से शक्ति और विश्वास उत्पन्न करने की एक श्रृंखला तैयार की गई है।

प्रभावकारी योजनाएं

उज्जवला योजना : दो करोड से ज्यादा गरीब परिवारों की महिलाओं को चूल्हे के धुएं से भरी जिंदगी से छुटाकारा दिलाने के लिए गैस कनेक्शन और चूल्हा मुफ्त में दिए गये।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान -पूरे देश में महिला भ्रूण हत्या की सामाजिक कुरीति को रोका। हरियाणा जैसे राज्य के लिंगानुपात में सुधार आया। हरियाणा में ये सुधर कर 950 हो गया।

सुकन्या समृद्धि योजना : बेटियों के सुनहरे और सुरक्षित भविष्य के लिए इस योजना को लागू किया। बेटियों की शिक्षा पूरी करने और 18 साल के बाद होने वाली शादी के खर्च के लिए इस योजना से धन दिया जाता है। इसमें छोटे निवेश पर ज्यादा ब्याज दिया जाता है।

मुद्रा योजना : इस योजना के तहत करीब चार करोड़ महिला उद्यमियों को ऋण दिया गया है। महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने की यह सबसे बड़ी पहल है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना : रोजगार योग्य बनाने के लिए कौशल विकाश योजना के तहत करीब 11 लाख महिलाओं को अलग -अलग तरह के हुनर में प्रशिक्षित किया गया है।

मातृत्व अवकाश : कामकाजी महिलाओं के मातृत्व काल की समस्याओं को समझते हुए अवकाश को 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दिया।

गर्भवती महिलाओं को मदद : गर्मभवती महिलाओं को पोषण की जरूरत को पूरा करने के लिए 6,000 रुपये आर्थिक सहायता दी जाने लगी।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान : सुरक्षित मातृत्व के लिए हर माह की 9 तारीख को अस्पतालों में चेकअप की मुफ्त व्यवस्था शुरू की गई।

स्टैंड अप इंडिया : महिलाओं को अपना व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए हर बैंक शाखा को 10 लाख से लेकर 1 करोड़ तक के ऋण कम से कम एक महिला को उपलब्ध कराने का नियम बनाया।

महिला ए हाट : महिला उद्यमियों को बाजार के लिए एक प्लेटफॉर्म दिया गया।

पासपोर्ट बनाना आसान : महिलाओं को विदेश जाने के लिए पासपोर्ट बनाने के काम को आसान कर दिया गया, इसके लिए शादी या तलाक के सर्टिफिकेट की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई अब वे अपने पिता या मां का नाम लिख सकती हैं।

महिला पुलिस स्वयंसेवी पहल : गांवों में महिलाओं को दिक्कतों से बचाने के लिए महिला पुलिस स्वंयसेवी योजना लागू की गई। हरियाणा के करनाल और महेंद्रगढ़ से इसकी शुरुआत हुई।

पॉस्को ई बॉक्स : बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की शिकायत अब ऑनलाइन भी किया जाना संभव हुआ।

दफ्तर में सुरक्षा : दफ्तर में यौन उत्पीड़न की घटनाएं रोकने और इसके खिलाफ लड़ने के लिए ई-प्लेटफॉर्म शुरू किया गया। ऑनलाइन शिकायत संभव हुआ।

मोबाइल फोन हैंडसेट में पैनिक बटन : महिलाओं की सुविधा के लिए मोबाइल में जीपीएस सिस्टम के साथ-साथ पैनिक बटन शुरू किया गया है। इससे खतरे की स्थिति में वह आपात सिग्नल परिजनों और पुलिस को भेज सकती हैं।

महिलाओं की समस्याओं का हर स्तर पर निदान करने की मंशा और योजनाओं ने परिवर्तन का एक बड़ा दौर शुरु कर दिया है। इसमें महिलाएं आगे बढ़कर लाभ लेने का प्रयास कर रही हैं। देश के विकास में सहभागी बन रही हैं। विकास में सहभागिता का यही भाव ‘न्यू इंडिया’ की आत्मा है। मुस्लिम महिलाओं ने अपने हक की कानूनी संघर्ष में जिस तरह मोदी सरकार का साथ पाया, वह ‘न्यू इंडिया’ का एक नया अध्याय है।

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