Home नरेंद्र मोदी विशेष अमेरिका में मोदी-मैजिक

अमेरिका में मोदी-मैजिक

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो विदेश यात्राएं हमेशा विरोधियों के निशाने पर रही हैं, आज उन्हीं के परिणामस्वरूप दुनिया-भर में भारत एक नए रूप-स्वरूप में, सशक्तता के साथ, सक्षमता के साथ, सामर्थ्य के साथ उभरकर सामने आता जा रहा है। नरेंद्र मोदी की प्रत्येक विदेश यात्रा के मूल में एक गहन दूरदृष्टि रहती है। अगर बिना विस्तार में गए भी केवल अमेरिका का ही उदाहरण ले लिया जाए तो वहां भारत की छवि में कितने बदलाव आ रहे हैं, यह अनेक रूपों में देखा जा सकता है।

अमेरिकी जबान पर चढ़ती हिंदी

हाल ही में अमेरिका जनगणना ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों से यह बात सामने आई है कि अमेरिका में बोली जाने वाली भारतीय भाषाओं में से हिंदी ही ऐसी भाषा है, जो पहले स्थान पर आती है और लगभग 6.5 लाख लोगों द्वारा बोली जाती है। यह बात भी बड़े रूप में सामने आई कि वहां हिंदी बोलने वालों की संख्या में निरंतर वृद्धि होती जा रही है। नरेंद्र मोदी चाहे देश में बोल रहे हों या विदेश में, वे स्वयं अपने भाषणों में हिंदी को इतना सुंदर रूप दे देते हैं कि सुनने वाला चाहे देशी हो या विदेशी, प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता।

भारतीय बाजार बने बहुराष्ट्रीय कंपनियों का आकर्षण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व में भारत को एक अत्यंत संभावनाशील बाजार वाले देश के रूप में प्रस्तुत किया है, जो आर्थिक उदारीकरण के युग में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आकर्षण का केंद्र-बिंदु है। ये कंपनियां भी अपने यहां हिंदी को अधिक से अधिक सीखने-पढ़ने को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे भारत में व्यापार करना इन कंपनियों के लिए सुलभ हो सके। भारत में इनके द्वारा किए गए व्यापार से देश को विदेशी मुद्रा प्राप्त होगी और विकास को गति मिलेगी। किसी भी देश के लिए वर्तमान समय में विदेशी निवेश और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का महत्त्व बहुत अधिक है। इसी महत्त्व को समझने के चलते मोदी सरकार ने भारतीय विदेश व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नीतियों में लगभग 7 हजार परिवर्तन किए हैं। देशी युवाओं के लिए यह अवसर रोजगार की दिशा में नए द्वार खोलेगा।

विश्व को भाया योग और ध्यान

भारतीय योग का महत्त्व सदैव से ही बहुत अधिक रहा है, लेकिन वर्तमान में इसके प्रभाव को पूरे विश्व में फैलाने में नरेंद्र मोदी के मजबूत प्रयासों की अनदेखी कोई नहीं कर सकता। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में उन्होंने पूरे विश्व को योग के सूत्र में बांध दिया है। आज केवल अमेरिका में ही योग करने वालों की संख्या 3 करोड़ पार कर चुकी है। वर्ष 2015 में पहली बार वैश्विक स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था और तब से योग लगातार अमेरिकी लोगों तक के नियमित जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है। यह देखना भी अपने-आप में कितना सुखद आश्चर्य है कि योग की तरह ही ध्यान भी अमेरिकियों के जीवन में अपना स्थान बनाने लगा है। वहां ध्यान सीखने-सिखाने के लिए कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं, जिसमें लोगों की भागीदारी सुखद आश्चर्य में डाल देती है। यहां तक कि वहां स्कूलों में भी टेलीविजन के द्वारा योग सिखाया जा रहा है। आज जब विश्व अमेरिका को एक रोल मॉडल के रूप में देखता है, तब अमेरिका भारतीय योग-ध्यान के माध्यम से जीवन के नए अर्थ ढूंढ़ने का प्रयास कर रहा है।

अमेरिकी आंगन में जगमगाता दिवाली का दीया

नरेंद्र मोदी ने भारतीय परंपराओं को हमेशा ऐसे रूप में प्रस्तुत किया है कि पूरी दुनिया का ध्यान उस ओर खिंचता है। चाहे दूसरे रीति-रिवाज या परंपराएं हों अथवा त्योहार, मोदी-मैत्री में पूरा विश्व उससे जुड़ जाता है। अमेरिका और भारत के संबंधों को जो निकटता मोदी शासन में मिली है, वह शायद ही कभी पहले संभव हुई हो। इसका उदाहरण इस बात से बढ़कर क्या होगा कि इस दिवाली का प्रकाश अमेरिकी धरती पर भी उजास भर रहा था। ऐसा पहली बार हुआ, जबकि अमेरिका में दिवाली इतने ज्यादा बड़े और भव्य रूप में मनाई गई कि यह समझना मुश्किल था कि दिवाली की जगमगाती रोशनी से नहाई यह धरती अमेरिका की है या भारत की। वहां की एक फूड कंपनी ने तो मोदी के नाम पर गुलाब जामुन ही बना दिए। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि इस बार की अमेरिकी दिवाली पूरी तरह से मोदीमय रही। सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने बराक ओबामा को गले लगाकर जो भारत-अमेरिकी मैत्री का नया अध्याय शुरू किया था, वह ट्रंप के शासन में और नए अर्थ गढ़ रहा है।

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