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सुप्रीम फटकार के बावजूद नहीं सुधरे काटजू

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अनर्गल बयान और पीएम नरेन्द्र मोदी के खिलाफ बेतुके बोल से सुर्खियों में रहने वाले मार्कण्डेय काटजू सुधरते नहीं दिख रहे। अभी ज्यादा दिन नहीं बीते हैं जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने और इस बाबत बहस के लिए बुलाए जाने के बाद खंडपीठ उनसे इतना क्षुब्ध हुआ कि उन्हें अदालत से निकाल-बाहर करने की बात तक हो गयी। आखिरकार जब उन्होंने माफी मांगी तब मामला खत्म हुआ। इससे पहले भी पूर्व जज और प्रेस काउन्सिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रह चुके काटजू के खिलाफ संसद में प्रस्ताव पारित हो चुका है जब उन्होंने रविन्द्र नाथ टैगोर को अंग्रेजों और सुभाष चंद्र बोस को जापान का पिट्ठू बताया था। पर, काटजू कहां मानने वाले हैं। एक बार फिर काटजू ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को गलत बताया है जिसमें सुप्रीम अदालत ने सहारा डायरी केस में पीएम नरेन्द्र मोदी के खिलाफ मुकदमा चलाने से इनकार कर दिया है।

हम आपके सामने एक के बाद एक उदाहरण रख रहे हैं कि किस तरह नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अनर्गल बोलते रहना जस्टिस काटजू की आदत सनक बन चुकी है :

1. सहारा डायरी के बहाने पीएम मोदी पर हमला

अभी सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगे दो हफ्ते भी नहीं हुए हैं कि एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जस्टिस काटजू ने सवाल उठाया है। सहारा डायरी मामले में नरेन्द्र मोदी के खिलाफ जांच की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने इसलिए खारिज कर दी क्योंकि अदालत ने पर्याप्त आधार नहीं देखा। पर, जस्टिस काटजू को लगता है कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करके गलत किया है। मामला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जुड़ा जो ठहरा, जिनके वो हमेशा से खिलाफ रहे हैं। खास बात ये है कि सहारा डायरी का मामला ही राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित और पीएम मोदी को फंसाने के इरादे से आगे बढ़ा है। खुद राहुल गांधी इस मामले में देश में भूचाल ला देने की घोषणा कर चुके थे और उनकी भी भद पिट चुकी है। पीएम मोदी को फंसाने के लिए जारी देशव्यापी साजिश तो जस्स काटजू को नजर नहीं आती, सुप्रीम कोर्ट की गलती जरूर दिखती है।

2. मोदी को बताया ‘सपनों का सौदागर’

मई 2014 में जब देशभर में मोदी-मोदी के नारे लग रहे थे, चुनाव में जनता ने उनके लिए अभूतपूर्व वोटिंग की थी तब जस्टिस काटजू अलग ही राग गा रहे थे। काटजू ने नरेन्द्र मोदी को ‘सपनों का सौदागर’ कहकर मोदी विरोध को हवा दी थी। इतना ही नहीं विकास के नाम पर नरेन्द्र मोदी ने जो वायदे किए थे, जो नारे दिए- वो काटजू साहब को हवा लग रही थी।

3. सनकी काटजू ने कहा- नोटबंदी ‘पीएम की सनक’

जस्टिस काटजू ने पहले पहले तो ये कहा कि नोटबंदी के मामले को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती, लेकिन जल्द ही यू टर्न ले लिया। काटजू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चिट्ठी लिखी। नोटबंदी को सनकी आदेश बताया और उसे वापस लेने की मांग की।
जब देश के तमाम सर्वे में जनता नोटबंदी के फैसले को सही ठहरा रही थी, जस्टिस काटजू इसे लोगों को परेशान करने वाला बता रहे थे। इतना ही नहीं जस्टिस काटजू उसी क्षण विदेश में जमा काले धन को वापस लाने के लिए गम्भीर प्रयास नहीं करने का आरोप भी पीएम मोदी पर लगा रहे थे।

इससे ज्यादा सनकी बात और क्या होगी कि काटजू 1000 और 500 के नोट खत्म करने पर नरेन्द्र मोदी की तुलना मोहम्मद तुगलक से कर रहे थे।

जब नोटबंदी से देश ही नहीं पाकिस्तान में बैठे हवाला कारोबारी आत्महत्या कर रहे थे, आतंकी नेटवर्क कमजोर हो रहा था, कश्मीर में पत्थरबाजी बंद हो गयी थी- तब काटजू कह रहे थे कि इस कदम से देश में हवाला कारोबार बढ़ जाएगा।

जब देश में सब्जी से लेकर दूसरी तमाम चीजों के दाम घट रहे थे, तब जस्टिस काटजू आशंका जता रहे थे कि बाजार में महंगाई और मुद्रास्फीति बढ़ जाएगी।

4. कैशलेस और डिजिटल इंडिया की सोच को ‘मूर्खतापूर्ण’ कहा

जब समूचा देश और गांव-गांव में लोग डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ रहे थे। यूपीआई ट्रांजेक्शन 300 गुणा ज्यादा बढ़ रहा था और पूरी दुनिया में इसकी सराहना हो रही थी, तब भी जस्टिस काटजू के सुर अलग थे। दरअसल नरेन्द्र मोदी की किसी योजना सफल होते वो देख ही नहीं सकते थे। लिहाजा काटजू ने 8 जनवरी 2017 को अपने फेसबुक वॉल पर लिखा- “भारत अमेरिका और यूरोप की तरह विकसित नहीं है। इसलिए ये सोचना मूर्खतापूर्ण है कि इसे रातों रात डिजिटल इकोनॉमी में बदल दिया जाए।“ काटजू ने नोटबंदी को बेरोजगारी बढ़ाने वाला करार दिया।

5. सर्जिकल स्ट्राइक ‘सोते हुए को थप्पड़’

जस्टिस काटजू ने पहले तो सर्जिकल स्ट्राइक की तुलना हनुमान के एक्शन से की, जिन्होंने लंका दहन किया था। ऐसा कहते हुए उन्होंनो पाकिस्तान को चेताया भी था, पर जल्द ही उन्हें पता चल गया कि उन्होंने अपनी लाइन बदल ली है। तुरंत उन्होंने उसे अपने हिसाब से दुरुस्त किया और आईआईटी कानपुर के मेगा फेस्ट में सर्जिकल स्ट्राइक की तुलना सोते हुए इंसान पर तमाचा जड़ने से कर दी। काटजू ने कहा-सर्जिकल स्ट्राखइक कुछ इस तरह का था मानो किसी सोते हुए पर थप्पड़ जड़ दिया गया हो। सुपर पावर चीन पाकिस्तान के साथ है और हथियारों की सप्लाई कर रहा है। युद्ध को निंमंत्रण देना भारत को महंगा पड़ सकता है।

6. काटजू फरमाते हैं कि गुजरात में दंगा हिन्दुओं ने कराया

गुजरात में दंगों के लिए भी जस्टिस काटजू हिन्दू समुदाय को दोषी ठहराते हैं। एक जस्टिस होकर भी बिना सबूत के काल्पनिक तरीके से वो ये सोच लेते हैं कि साबरमती एक्सप्रेस में हुआ हादसा उसी समुदाय के लोगों ने कराया होगा। अपनी इस सोच को पूरा करने के लिए दुनिया के कई देशों के इतिहास से वो सबूत इकट्ठा करते हैं। अजीब बात है जो घटना हिन्दुस्तान की धरती पर घटी, उसका सबूत इतिहास से और दूसरे देशों में देखते हैं काटजू, लेकिन खुद अपनी सरकार, अपने लोग और अपनी अदालत पर भरोसा नहीं करते। ऐसा इसलिए कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी हमेशा से काटजू के निशाने पर रहे हैं। काटजू मानते हैं कि साबरमती एक्सप्रेस में अपने ही समुदाय के लोगों की हत्या का षडयंत्र रचा गया और बदले की आग भड़कायी गयी। जस्टिस काटजू लिखते हैं- “मेरा अपना व्यक्तिगत मत है कि गोधरा दंगों के पीछे कुछ दक्षिणपंथी हिन्दू संगठनों की सुनियोजित चाल थी। इन हिन्दू संगठनों ने साबरमती एक्सप्रेस में अपने ही समुदाय के कुछ लोगों की हत्या की साजिश रची, जिससे मुस्लिमों पर आरोप मढ़ा जा सके। गोधरा की घटना मुझे ग्लिविट्ज घटना की याद दिलाती है।“

7. गुजरात में विकास के दावे को झुठलाया, पाकिस्तान में वाहवाही

नरेन्द्र मोदी के तीन बार गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए जो विकास हुए, उसे जस्टिस काटजू मानने को तैयार नहीं हैं। वे तमाम दावों को झुठलाते हैं। ऐसा करते हुए उन्होंने एक लेख भी लिखा। ये लेख पाकिस्तान में भी छपा और उनकी खूब वाहवाही हुई। नरेन्द्र मोदी से पाकिस्तान कितना खार खाए रहता है, किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में काटजू के लेख के बहाने मोदी पर हमला करने का पाकिस्तानी हुक्मरान को मानो सियासी बहाना मिल गया। तभी तो बीजेपी के नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि जस्टिस काटजू पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं।

8. चीन में मोदी के भाषण का उड़ाया मजाक

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शंघाई के फुदान यूनिवर्सिटी में कहा था कि भारत और चीन गरीबी खत्म करने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। जस्टिस मार्कण्डे काटजू ने पूछा था कि क्या मोदी को पता नहीं है कि चीन में साढ़े तीन खरब डॉलर विदेशी मुद्रा है। काटजू ने अपने काल्पनिक तर्कों से मोदी का मजाक उड़ाया कि मिलकर गरीबी खत्म करते हुए भारत चीन का उपनिवेश बन जाएगा।

9. काटजू ने पीएम को पाइड ‘पाइपर ऑफ हेमेलिन’ बताया

देश की जनता अगर पीएम मोदी के विकास के नारे से प्रभावित है, उम्मीदों से जुड़ी है तो ये बात भी जस्टिस मार्कण्डेय काटजू को हजम नहीं होती। विकास की बात को वे बेबी का चिल्लाना (babies cry) बताते हैं। वे लोगों से पूछते हैं कि आपको शिकायत किसलिए है? आप तो ग्रेट मैन के विकास के वायदों पर भरोसा करते हैं बिना समझे, जाने और पूछे। काटजू देश की जनता को चूहा बताते हैं जो हैमेलिन के बांसुरीवाले के पीछे हो जाता है। पीएम मोदी को जो विकास के लिए अभूतपूर्व समर्थन मिला है, वो भी काटजू साहब को पच नहीं रहा है।

10. गांधी ब्रिटिश एजेंट, नरेन्द्र मोदी फ्रॉड- काटजू

जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने महात्मा गांधी को ब्रिटिश एजेंट बताते हुए नरेन्द्र मोदी को फ्रॉड तक करार दिया। ऐसा उन्होंने गुजरातियों पर निशाना साधते हुए कहा। अंग्रेजी में उनकी तुकबंदी का हिन्दी रूपांतरण कुछ इस तरह से है- “गुज्जू भाई धंधे में चतुर होते हैं। वे सोचते हैं कि वे कारोबार के सारे फंडे जानते हैं। लेकिन ब्रिटिश एजेंट जिन्ना और गांधी ने उड़ाई थी देश के बंटवारे की आंधी और अब यह फ्रॉड नरेन्द्र मोदी डंडे के साथ आया है।“ हास्यास्पद बोलना और नरेन्द्र मोदी पर हमला करना जस्टिस काटजू का शगल रहा है।

11. भारत-पाक एक हों या फिर कश्मीर पाक को दो- काटजू

कश्मीर की समस्या का समाधान किसी के पास हो या नहीं हो, लेकिन काटजू साहब के पास है। टू नेशन थ्योरी के खिलाफ हैं काटजू, पर इस सिद्धांत को कश्मीर समस्या के हल के रूप में इस तरह से पेश करते हैं कि या तो भारत और पाकिस्तान एक हो जाएं- कश्मीर की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। अगर, ऐसा नहीं हो सकता, तो चूकि 95 फीसदी कश्मीर की आबादी मुसलमानों की है, इसलिए इसे पाकिस्तान को दे दिया जाए। जाहिर है कि ऐसे समय में जब घाटी में अशांति हो, सर्जिकल स्ट्राइक किए जा रहे हों और पाकिस्तान को ईंट का जवाब पत्थर से दिए जा रहे हों, जस्टिस काटजू ऐसे सनकी बयान से पाकिस्तान को ही मदद पहुंचा रहे हैं।

12. कश्मीर देंगे पर बिहार भी लेना होगा

जस्टिस काटजू की सनक लिमिट में नहीं रहती। वो हदें पार कर जाते हैं। एक बार उन्होंने कह डाला कि पाकिस्तान के लिए उनके पास कॉम्बो ऑफर है। कश्मीर तो लें ही, बिहार भी उनको लेना होगा। काटजू ने कहा- “पाकिस्तानियों, चलो एक बार में ही अपने सारे विवाद खत्म कर लेते हैं। हम आपको कश्मीर देते हैं लेकिन उसकी एक शर्त है कि आपको बिहार भी लेना पड़ेगा। यह एक पैकेज डील है। इसके लिए आपको पूरा पैकेज लेना होगा या फिर आपको कुछ भी नहीं मिलेगा। हम आपको सिर्फ कश्मीर नहीं देंगे।“ काटजू की सनक तो देखिए। उन्होंने बिना सबूत के दावा कर दिया- “अटल बिहारी वाजपेयी ने आगरा सम्मेलन के दौरान परवेज मुशर्रफ के सामने ये डील रखी थी। लेकिन उन्होंने मना कर दिया। अब ये ऑफर फिर से आया है।” जाहिर है जब बिहार में इसकी प्रतिक्रिया हुई, तो जस्टिस काटजू ने कह डाला कि ये तो जुमला था।

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