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मोदी राज में अच्छी खबर: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने पकड़ी रफ्तार, रोजगार के अवसर भी बढ़े

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में कारोबारी माहौल अच्छा हुआ है। मोदी राज में कंपनियों के उत्पादन बढ़ाने से इस साल मई में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने रफ्तार पकड़ ली है। निक्की इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) मई में वृद्धि के साथ 52.7 अंक पर आ गया जो अप्रैल में 51.8 अंक पर था। यह पिछले तीन महीने में इस क्षेत्र में सबसे बेहतर वृद्धि है। पीएमआई का 50 अंक से ऊपर रहना विनिर्माण गतिविधियों में विस्तार और 50 अंक से नीचे रहना कमी को दिखाता है। मांग बढ़ने के साथ मई में खाली हुई इन्वेंट्री को फिर से भरने के लिए भारतीय कंपनियों ने उत्पादन में बढ़ोत्तरी की है। इससे विनिर्माण गतिविधियां बढ़ी हैं।

सेंसेक्स 40,000 और निफ्टी 12,000 के पार बंद
सोमवार, 3 मई को नए सत्र के पहले दिन शेयर बाजार रेकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ। बीएसई का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 553.42 अंक की तेजी के साथ 40,267.62 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का संवेदी सूचकांक निफ्टी 165.75 अंक की बढ़त के साथ 12,088.55 के रिकॉर्ड लेवल पर बंद हुआ। इसतरह सेंसेक्स पहली बार 40,000 जबकि निफ्टी पहली बार 12,000 के आंकड़े के पार बंद हुआ।

डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार मजबूत
लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत मिलने और एक बार फिर स्थिर सरकार बनने से बाजार उत्साहित है। दुनिया के कई बाजारों में डॉलर के नरम पड़ने और घरेलू बाजार में विदेशी मुद्रा प्रवाह बेहतर बना रहने से मंगलवार, 4 मई को स्थानीय विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में शुरुआती दौर में डॉलर के मुकाबले रुपया 26 पैसे चढ़कर 69.00 रुपये पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा प्रवाह बना रहने और कच्चे तेल के दाम कमजोर पड़ने से रुपये में मजबूती का रुख बना है।

रोजगार के अवसर बढ़े
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के रफ्तार पकड़ने से इस क्षेत्र में रोजगार भी बढ़े हैं। एक मासिक सर्वेक्षण के मुताबिक, सामानों के उत्पादकों की धारणा मजबूत होने, नए ऑर्डर में ठोस बढ़ोत्तरी के दम पर क्षेत्र में रोजगार बढ़े हैं। इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि अप्रैल, 2018 में नौकरियों में लगातार इजाफा दर्ज किया गया है। फरवरी के बाद यह वृद्धि सबसे अधिक है। इस साल फरवरी में संगठित क्षेत्र में रोजगार सृजन एक साल पहले इसी माह के मुकाबले तीन गुना तक बढ़कर 8.61 लाख तक पहुंच गया। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के मुताबिक फरवरी, 2019 में 22-25 वर्ष आयु वर्ग के 2.36 लाख को और 18-21 आयु वर्ग के 2.09 लाख युवाओं को रोजगार मिला। आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2017 – फरवरी 2019 के बीच 18 महीने के दौरान 80.86 लाख नये रोजगार का सृजन हुआ

विदेशी निवेशक जमकर कर रहे हैं निवेश
मोदी सरकार की प्रचंड जीत के बात वे भारतीय बाजार में जमकर निवेश कर रहे हैं। ज्यादातर निवेशक, खासतौर पर विदेशी निवेशक भारत में एक मजबूत सरकार चाहते थे। ऐसे में मोदी सरकार की शानदार जीत ने शेयर बाजार के साथ-साथ निवेशकों में जोश भर दिया। आम चुनावों में भाजपा की शानदार जीत के बाद कारोबार के लिए ज्यादा अनुकूल माहौल बनने की उम्मीदों को देखते हुए विदेशी निवेशकों ने मई में भारतीय पूंजी बाजार में शुद्ध रूप से 9,031 करोड़ रुपये की पूंजी डाली। डिपॉजिटरी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निवेश बढ़ा दिया। निवेशकों ने शेयर बाजारों में शुद्ध रूप से 7,919.73 करोड़ रुपये का निवेश किया जबकि बॉन्ड बाजार में 1,111.42 करोड़ रुपये डाले। इस तरह निवेशकों ने शुद्ध रूप से 9,031.15 करोड़ रुपये का निवेश किया।

FPI का बढ़ा भारतीय बाजार में भरोसा
प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का ही असर है कि आज भारतीय बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का भरोसा बढ़ा है। एफपीआई ने अप्रैल में शुद्ध रूप से 16,093 करोड़ रुपये की पूंजी डाली थी। वहीं मार्च में 45,981 करोड़ रुपये का निवेश किया। फरवरी में एफपीआई ने 11,182 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

विदेशी मुद्रा भंडार एक साल के उच्चतम स्तर पर
देश का विदेशी मुद्रा भंडार एक साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। विदेशी मुद्रा भंडार 26 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में 4.36 अरब डॉलर बढ़कर 418.51 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। इससे पिछले सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 414.14 अरब डॉलर रहा था। देश का विदेशी मुद्रा भंडार इससे पहले 13 अप्रैल 2018 को एक समय 426.028 अरब डालर के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया था। विदेशी मुद्रा भंडार ने आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब के करीब था।

मोदी सरकार ने 2018 में जुटाये रिकॉर्ड 77,417 करोड़ रुपये
मोदी सरकार ने 2018 में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में अपनी हिस्सेदारी की बिक्री करके रिकॉर्ड 77,417 करोड़ रुपये जुटाये हैं। 2018 में हुए बड़े विनिवेश सौदों में ओएनजीसी द्वारा एचपीसीएल का अधिग्रहण, सीपीएसई ईटीएफ, भारत-22 ईटीएफ और कोल इंडिया की हिस्सेदारी बिक्री समेत छह आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) समेत अन्य शामिल हैं। विनिवेश में यह तेजी एयर इंडिया के निजीकरण के साथ 2019 में भी जारी रहने की उम्मीद है।

सिर्फ पांच साल में जुटाई यूपीए से दोगुनी से ज्यादा राशि
पिछले पांच साल में सरकार ने विनिवेश के जरिए रिकॉर्ड राशि जुटाई है। विनिवेश के मामले में भी मोदी सरकार ने यूपीए सरकार को पीछे छोड़ दिया है। अपने 5 साल के कार्यकाल में एनडीए ने 2,09,896.11 करोड़ रुपए जुटाए जो यूपीए-1 और यूपीए-2 की कुल राशि से करीब दोगुनी ज्यादा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लगातार मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था के कारण सरकार ने पहली बार विनिवेश के जरिये एक बड़ी रकम जुटाई है।

 

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